Health

W.H.O ने कहा anxiety and depression से हर साल वर्ल्ड इकोनॉमी को 1 ट्रिलियन का नुकसान उठाना पड़ता है.

  • 2018 -2019 में मेंटल हेल्थ पर 50 करोड़ रुपये खर्च हुए

  • WHO के मुताबिक 2017 में मात्र सालाना 4 रुपये खर्च होते थे

  • 2017 में देश में 19.73 करोड़ लोग किसी न किसी मानसिक बीमारी से जूझ रहे थे.

  • देशभर में 8 लाख लोग डिप्रेशन में आकर आत्महत्या करते हैं.

  • रूस के बाद भारत दूसरा बड़ा देश है मानसिक बीमारी से जूझने का

सुशांत की मौत के बाद से मेंटल हेल्थ शब्द पर ध्यान दिया जाने लगा है, भारत में 19 करोड़ लोग मेंटली परेशान रहते हैं करण कोई भी हो सकता है. लेकिन हम इसे आसानी से नजरअंदाज कर देते हैं. एक न्यूज वेबसाइट के अनुसार पिछले साल दिसंबर में साइंस जर्नल द लैसेंट की एक रिपोर्ट में कहा गया है, कि 2017 में देश में 19.73 करोड़ लोग किसी न किसी मानसिक बीमारी से जूझ रहे हैं.

WHO के मुताबिक देशभर में करीब 8 लाख लोग डिप्रेशन में  आकर आत्महत्या कर लेते हैं. मानसिक बीमारी में आने का सबसे बड़ा कारण anxiety and depression है. इसमें 15 से 29 साल के लोग खास तौर पर सुसाइड करते देखे गए हैं.

अगर आंकड़ों की बात की जाए तो रूस के बाद भारत में सबके ज्यादा मानसिक बीमारियों से पीड़ित लोग हैं. रूस में डिप्रेशन से सुसाइड का आंकड़ा 26.5 है तो वहीं भारत में 16.3 है.

The National Crime Records Burea के मुताबिक 2013 से 2018 के बीच 52 हजार 526 लोगों मानसिक बीमारियों से जूझने के कारण आत्महत्या कर ली.

हत्या की खबर से ही रूह कांप उठती है, और यहां बात तो आत्महत्या की है, सुसाइड से न केवल आपके करीबी, दोस्त, परिवार को असर पड़ता है बल्कि समाज पर भी इसका गहरा असर पड़ता है. WHO के अनुसार anxiety and depression से हर साल वर्ल्ड इकोनॉमी को 1 ट्रिलियन का नुकसान उठाना पड़ता है.

 

मानसिक बीमारी और उनके इलाज की फीस

आटिज्म (Autism)                             1,000- 5,000

एंग्जायटी (Anxiety)                           1,000- 5,000

डिमेंशिया (Dementia)                     1,000- 3,000

स्कीजोफ्रेनिया (Schizophrenia)   1,200 – 5,000 

डिस्थीमिया (Dysthymia)             1,000-5,000

 

भारत में मेंटल हेल्थ को लेकर दो नजरिए रखे जाते हैं. पहले तो महंगा इजाल दूसरा लोगों का मजाक बनाना. इसलिए लोग Anxiety and Depression को चुपचाप झेल लेते हैं.

साल 2015 में The Associated Chambers of Commerce and Industry of India (ASSOCHAM) के रिपोर्ट के अनुसार 42.5 % लोग डिप्रेशन से जूझ रहे हैं. डिप्रेशन होने का मुख्य कारण 6 घंटे से कम की नींद होने पर भी होता है.

 

 

 

 

 

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