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पर्यावरण प्रेम क्या होता है ? अगर जानना है तो पहले जानें नरपत सिंह राजपुरोहित को 

नरपत सिंह राजपुरोहित… ये नाम एक ऐसे शख्स का है जो पर्यावरण को बचाने के लिए इतना बड़ा काम कर चुका है कि उसका नाम आपके जहन में खुद-ब-खुद जगह बना लेगा। राजस्थान के बाड़मेर के लंगेरा गांव निवासी नरपतसिंह राजपुरोहित को पर्यावरण के प्रति ऐसा प्रेम हुआ कि पॉलीटेक्निक की पढ़ाई भी पूरी न कर सकें।

 

गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हैं नाम

नरपतसिंह ने 27 जनवरी 2019 को जम्मू-कश्मीर से पर्यावरण बचाने के लिए साइकिल पर यात्रा की शुरूआत की थी। इसके बाद हिमाचल, पंजाब, हरियाणा, उतराखंड, यूपी, दिल्ली, राजस्थान, गुजरात, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, गोवा, केरल, कर्नाटक, तमिलनाडू, पांडूचेरी, दीप-दमन तक साइकिल से घूमकर 87 हजार से अधिक पौधे लगा चुके हैं। वे 400 दिनों में करीब 15 राज्यों में 22000 किमी. की यात्रा कर चुके हैं। इनका यह कारनामा गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड, वर्ल्ड रिकार्ड ऑफ लंदन में दर्ज हो चुका है।

 

लोगों को पर्यावरण संरक्षण के लिए करते हैं अवेयर

नरपतसिंह पौधे लगाने के शौक को पूरा करने के लिए मिठाई की दुकान पर सेल्समेन की नौ हजार महीने की नौकरी करते हैं। गर्मी, सर्दी, बारिश, तूफान और दुर्गम रास्तों में अकेले ही पीठ पर पौधों को लिए हुए साइकिल पर सफर तय कर रहे हैं।अपनी यात्रा के दौरान वो स्वयं अपने पैसों से पौधा खरीदते और फिर उसे या फिर स्कूल या किसी सरकारी कार्यालय में स्थानीय लोगों से लगवाते और उन्हें पर्यावरण के बारे में लोगों को अवेयर करते। उनका मानना है कि लोग जब शिक्षा से जुड़ जाएंगे तो पर्यावरण संरक्षण में वैसे ही सुधार हो जाएगा। मनुष्य के अंदर आधुनिकीकरण एवं विकास की लालसा की वजह से पर्यावरण पर बुरा प्रभाव पड़ा है।

 

बहन की शादी में उपहार में दिया पौधा

नरपत सिंह राजपुरोहित का पर्यावरण के प्रति ऐसा प्रेम है कि इन्होंने अपनी बहन की शादी में दहेज में धनराशि नहीं बल्कि पौधे ही भेंट किये थे। लोगों की जिंदगी बचाने के लिए छह साल में 12 बार रक्तदान भी कर चुके हैं।

 

वन्यजीवों की देखभाल के लिए छोड़ी पढ़ाई

नरपत सिंह में वन्यजीवों के प्रति ऐसा प्यार उमड़ा कि पॉलीटेक्निक की पढ़ाई छोड़ दी। नरपत अब तक 133 हिरण, नौ मोर, चार खरगोश, एक नीलगाय, एक बाज, एक उल्लू को शिकारियों से बचा चुके हैं। दो शिकारियों को भी पुलिस के हाथों पकड़वा चुके हैं। वन्य जीवों को पानी मिल सके इसके लिए इन्होने आसपास 18 कुंड बनवाए हैं। पक्षियों को पानी मिल सके इसके लिए 1900 पानी के परिंडे लगाए हैं, जिसमें हर दिन पानी भरा जाता है।

 

इंसान को जीवन में लगाने चाहिए दो पौधे

वो कहते हैं कि इंसान को अपने जीवन में दो पौधे जरूर लगाने चाहिएं। एक जीवन में हम जो श्वास ले रहे हैं उसके लिए, दूसरा अपने अंतिम श्वास के लिए। वो कहते हैं कि अगर किसी कारणवश पौधा जल जाए, तो इंसान का धर्म है कि उसकी जगह एक नया पौधा लगाए, ये सकंल्प टूटना नहीं चाहिए। राजपुरोहित ने कहा कि जो व्यक्ति अपने जीवन में दो पौधे लगाकर उनका संरक्षण कर पेड़ न बनाए उसे लकड़ी से जलाने का भी हक नहीं है

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