अयोध्या में राम मंदिर भूमि पूजन के बाद मंदिर निर्माण की तैयारियां शुरू हो गई हैं। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश एटा जिले के जलेसर में हिंदू और मुस्लिम कारीगरों की एक टीम अयोध्या के राम मंदिर के लिए 2.1 टन (21 क्विंटल) वजन का घंटा बनाने में जुटी हुई है। इस घंटे की गूंज 15 किलोमीटर दूर तक सुनाई देगी।

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मुस्लिम व्यक्ति ने तैयार किया घण्टे का डिजाइन

जिस व्यक्ति ने इसका डिजाइन तैयार किया है, वह एक मुस्लिम कारीगर है, और उसका नाम इकबाल मिस्त्री है। दयाल ने बताया कि हमारे मुस्लिम भाइयों को डिजाइनिंग, घिसाई और पॉलिशिंग में विशेषज्ञता हासिल है। यह पहली बार है जब उन्होंने इस आकार के घण्टे पर काम किया है।

 

काम खराब हो जाने का हमेशा रहता था डर

चाढ़ पीढियों के घंटी निर्माता 50 वर्षीय दयाल ने कहा कि जब आप इस आकार के घंटे पर काम करते हैं तो मुश्किलों का स्तर कई गुणा अधिक बढ़ता है। यह सुनिश्चित करना बहुत कठिन है कि महीने भर चलने वाली प्रक्रिया में एक भी गलती नहीं हो। मिस्त्री के मुताबिक अगर सांचे में पिघले धातु को डालने में पांच सेकेंड की भी देरी हो जाती है तो पूरी कोशिश बेकार हो जाती है। उन्होंने कहा कि हमारे लिए उत्साहित करने वाली बात यह है कि हम इसे राम मंदिर के लिए बना रहे हैं, लेकिन विफल होने का डर कहीं न कहीं हमारे दिमाग में था।

 

घंटे की खासियत

 

  • यह घण्टा न सिर्फ पीतल से बना है बल्कि “अष्टधातु’’ यानि आठ धातुओं- सोना, चांदी, तांबा, जिंक, सीसा, टिन, लोहे और पारे के मिश्रण से बना है।

 

  • इस घण्टे की सबसे अनोखी बात है कि यह ऊपर से नीचे तक एकसार है। इसमें कई टुकड़े साथ नहीं जोड़े गए हैं। 

 

  • भारत का सबसे बड़ा घण्टा है।

 

  • यह राम मंदिर को दान दिया जाएगा।

 

  • घंटे की ऊंचाई 6 फुट और चौड़ाई 5 फुट होगी। 

 

  • 2100 किलोग्राम का है घण्टा।

 

  • 11 लाख की कीमत का है घण्टा।

 

  • जिस व्यक्ति ने इसका डिजाइन तैयार किया है, वह एक मुस्लिम कारीगर है।

 

  • घंटे पर कारीगर और जिले का नाम भी अंकित होगा।

 

  • 25 कारीगरों की टीम ने रोजाना 8 घण्टे काम कर बनाया घण्टा

 

राम मंदिर के घण्टे का पिछले साल नवंबर में मिला था आर्डर 

पहले इस घंटे का निर्माण वाराणसी के एक घंटा व्यवसायी के आर्डर पर किया गया था, लेकिन अब यह घंटा अयोध्या में बन रहे राम मंदिर को दान कर दिया जाएगा। वहीं वाराणसी के व्यापारी के लिए दूसरा घंटा अलग से तैयार कराया जा रहा है। वहीं मित्तल परिवार को राम मंदिर के लिए घण्टा तैयार करने का ऑर्डर राम मंदिर मामले में पिछले साल नवंबर में आए फैसले के तुरंत बाद निर्मोही अखाड़ा से मिला था, जो अयोध्या विवाद में एक वादी था।

 

कई बड़े मंदिरों में लगे हैं जलेसर के घंटे

एटा का जलेसर पूरी दुनिया मे घुंघरू और घंटी उद्योग के लिए प्रसिद्ध है। यहां परंपरागत कोयले की भट्टियों और फर्मों से मिट्टी के सांचे से घंटे बनाए जाते हैं। विकास मित्तल बताते हैं- इससे पूर्व भी इनकी फैक्ट्री में बने घंटे देश के कई प्रसिद्ध मंदिरों में लगे हुए हैं। कटप्पा मंदिर, चार धाम मंदिर, बड़ा हनुमान जी मंदिर भिंड, राजस्थान के हनुमान गढ़ में शनिदेव मंदिर और उत्तर भारत के कई मंदिरों के घंटे इनकी फैक्ट्री के ही बने हैं। जलेसर के घुंघरू कई फिल्मों में भी फिल्माए गए हैं।

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