सक्सेस स्टोरी

कौन हैं विजय शेखर शर्मा जिन्होंने खड़ी कर दी $2.35 बिलियन की कंपनी

कमियां भले ही हजारों हो आपमें लेकिन खुद पर विश्वास रखिए की आप सबसे बेहतर करने का हुनर रखते हैं । ये कहानी है भारतीय ई कॉमर्स भुगतान प्राणली और वित्तीय प्रोद्योगिकी कंपनी “पेटीएम” के मालिक विजय शेखर शर्मा की । अक्सर ऐसा होता है की हिंदी माध्यम से पढ़े लोग यह शिकायत करते हैं की अंग्रेजी न आने की वजह से वह सफल नहीं हो पाए लेकिन विजय शेखर भी हिंदी माध्यम से पढ़े एक होनहार विद्यार्थी थे और आज वह एक सफल भारतीय अरबपति व्यवसायी हैं ।

प्रारंभिक जीवन
विजय शेखर का जन्म 8 जुलाई , 1978 को उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में हुआ था । 15 साल की उम्र में विजय इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए दिल्ली आ गए थे । वहां उन्होंने दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में एडमिशन ले लिया था । स्कूल हो या कॉलेज विजय हमेशा से ही कक्षा की पहली बेंच पर ही बैठते थे । एक दिन उनकी अध्यापिका ने उनसे अंग्रेजी में एक सवाल पूछा लेकिन अंग्रेजी न आने की वजह से विजय उस सवाल को समझ नहीं पाए ।

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इस दिन विजय को काफी शर्मिंदगी महसूस हुई और उनके साथ पढ़ने वाले बाकी छात्रों ने उनका बहुत मज़ाक उड़ाया , इसके बाद से उन्होंने अपनी कक्षा की आखिरी बेंच पर बैठना शुरू कर दिया । कुछ दिनों बाद विजय ने क्लास में बैठना भी छोड़ दिया और उसके जगह वह लाइब्रेरी में बैठने लगे । लायब्रेरी में बैठ कर वह इंग्लिश में सक्सेस स्टोरी पढ़ा करते थे और उन सभी सक्सेस स्टोरीज़ ने विजय को काफी परभावित किया , उनकी अंग्रेजी तो ठीक हो ही गई थी साथ ही साथ उनकी सोच भी बदल गई थी । और तभी से विजय ने कुछ बड़ा हासिल करने की ठान ले थी ।

कुछ दिनों बाद वह लाइब्रेरी की कंप्यूटर लैब में जा कर बिठने लगे थे और वहां से उन्होंने कोडिंग भी सिख लिया था । जिसके बाद उन्होंने 1997 में अपने सहपाठी हरिंदर के साथ मिलकर “इंडिया साइट.नेट” की डिजाइनिंग की । इसके बाद उन दोनो ने साथ में कई छोटे छोटे प्रोजेस्ट पर काम भी किया ।

दो साल बाद 1999 में एक अमेरिकी कंपनी ने 1 मिलियन डॉलर में इंडिया साइट.नेट को खरीद लिया । 2001 में विजय ने अपने दो दोस्तों के साथ मिल कर दक्षिण दिल्ली में एक छोटे से रूम को किराए पर लेकर प्रति दोस्त 5 लाख रुपए लगा कर “वन 97 कम्युनिकेशन लिमिटेड” नाम से एक कंपनी बनाई । यह कंपनी मोबाइल यूजर्स को मोबाइल कंटेंट जैसे न्यूज़ , एस. एम. एस. , रिंगटोन और जोक्स जैसी सुविधाएं प्रदान करता था । 9/11 को अमेरिका पर हुए आतंकी हमले के कारण वन 97 कंपनी का बिजनेस धीरे धीरे बंद होने लगा और जल्द ही कंपनी का फंड भी खत्म हो गया , जिसके बाद उनके बाकी दोनों दोस्तों ने अपने हाथ पीछे कर लिए ।

लगभग 2 सालों तक यह स्थिति बरकरार रही और साल 2003 – 2004 वियज के लिए बहुत भी संघर्षपूर्ण रहा । वह कई दूसरी कंपनियों में नौकरी कर अपने इस कंपनी को चलाने की कोशिश कर रहे थे । अपने कर्मचारियों को तंखवा देने के लिए विजय में अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से 24% की सालाना ब्याज दर पर पैसा लोन लिया ।

2004 में विजय को पीयूष अग्रवाल से मदद मिली और उन्होंने विजय की कम्पनी में 8 लाख रुपए का इन्वेस्टमेंट किया और 40% शेयर भी खरीदे । पैसों की मदद होने के बाद कंपनी वापस से प्रगति करने लगी थी ।

“पेटीएम” की स्थापना
उसी बीच विजय ने गैर किया की दुनिया भर में स्मार्ट फोन का दौर तेजी से बढ़ रहा है और उन्होंने इसी में कुछ ऐसा करने का सोचा जिससे लोगों की समस्याओं का निवारण भी हो जाए । इसलिए उन्होंने 2010 में वन 97 कम्युनिकेशन लिमिटेड के अंतर्गत ही पेटीएम.कॉम की एक वेबसाइट खोली और ऑनलाइन मोबाइल रिचार्ज की सुविधा शुरू की । उस समय और भी कई ऐसी वेबसाइट्स थीं जो मोबाइल रिचार्ज की सुविधा उपलब्ध करवाती थीं , लेकिन उन सब की तुलना में पेटीएम का सिस्टम बहुत ही सरल था ।

जब पेटीएम का व्यवसाय बढ़ने लगा तब विजय ने पेटीएम.कॉम में ऑनलाइन वॉलेट , मोबाइल रिचार्ज , बिल पेमेंट , मनी ट्रांसफर और शॉपिंग जैसे और भी कई फीचर्स जोड़ दिए ।
विजय को उनके प्रयासों और संघर्षों का फल मिला और आज पेटीएम भारत का सबसे बड़ा मोबाइल पेमेंट और ई कॉमर्स प्लेटफॉर्म बन चुका है ।

अक्टूबर 2011 में , सफायर वेंचर्स ने वन 97 कम्युनिकेशन लिमिटेड में 10 मिलियन डॉलर का निवेश किया । मार्च 2015 में , पेटीएम ने चीनी ई कॉमर्स कंपनी अलीबाबा ग्रुप से अपनी बड़ी हिस्सेदारी प्राप्त की , जब अलीबाबा ग्रुप के सहयोगी एंट फाइनेंशियल सर्विसेज ग्रुप ने रणनीतिक समझौते के हिस्से के रूप में पेटीएम में 40% स्टॉक ले लिया था । इसके तुरंत बाद , इसे टाटा संस के एम. डी. रतन टाटा का समर्थन भी मिला ।

अगस्त 2016 में , पेटीएम में 5 बिलियन डॉलर से अधिक के मूल्यांकन पर ताइवान स्थित मीडियाटेक के निवेश कोषों में से एक , माउंटेन कैपिटल से धन जुटाया । मई 2017 में , पेटीएम को एक एकल निवेशक सॉफ्टबैंक द्वारा अपनी सबसे बड़ी हिस्सेदारी प्राप्त हुई , एक प्रकार कंपनी का मूल्यांकन अनुमानित 10 बिलियन डॉलर हो गया था । अगस्त 2018 में बर्कशायर हैथवे ने पेटीएम में 3% – 4% हिस्सेदारी के लिए 356 मिलियन डॉलर का निवेश किया था ।

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पुरस्कार एवं सम्मान

  1. 2017 में उन्हे 1.3 बिलियन डॉलर की कुल संपत्ति के साथ भारत के सबसे कम उम्र के अरबपति नामित किया किया गया था । फोर्ब्स की “द वर्ल्ड बिलियनर्स” की सूची में उन्हे 257 वां स्थान दिया गया था ।
  2. 2017 में ही , विजय टाइम्स मैगजीन के 100 सबसे प्रभावशाली लोगों की सूची में थे ।
  3. विजय को 2016 में द इकोनॉमिक टाइम्स द्वारा ईटी एंटरप्रेन्योर ऑफ द ईयर से सम्मानित किया गया था ।
  4. साल 2017 के 50 सबसे प्रभावशाली युवा भारतीयों की सूची में जीक्यू द्वारा विजय को चौथा स्थान दिया गया था ।
  5. 2017 में वह डेटाक्वेस्ट आईटी मन ऑफ द ईयर बने ।
  6. उन्होंने 2016 में , एमिटी यूनिवर्सिटी , गुड़गांव से डॉक्टरेट की मानद उपाधि प्राप्त की ।
  7. उन्हें 2016 में , उत्तर प्रदेश सरकार के सर्वोच्च राज्य नागरिक पुरस्कार यश भारती से सम्मानित किया गया था ।
  8. जीक्यू मैन ऑफ द ईयर अवार्ड 2016 में उन्हें बिजनेसमैन ऑफ द ईयर के रूप में नामित किया गया था  ।
  9. उन्हें 2016 में एनडीटीवी इंडियन ऑफ द ईयर से सम्मानित किए गया था ।
  10. 2015 में उन्हे द इकोनॉमिक टाइम्स द्वारा , 40 के तहत भारत का सबसे हॉट बिजनेस लीडर नामित किया गया था ।

हाल ही में भारत में कोविड 19 महामारी के दौरान , पेटीएम ने प्रत्येक उपयोगकर्ताओं को 10 रुपए का योगदान दिया , जिसने पेटीएम ऐप के माध्यम से प्रधानमंत्री केयर फंड का भुगतान किया है । दस दिनों के भीतर उन्होंने अपने ऐप में 100 करोड़ रुपए जमा किए थे । उनके 1,200 कर्मचारियों ने अपने 15 दिन या कुछ महीनो के वेतन का भी इस कोष में योगदान दिया है ।

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