जहीर बख्तियार खान का जन्म 7 अक्टूबर 1978 में श्रीरामपर,अहमदनगर,महाराष्ट्र के एक मुस्लिम मराठी परिवार में हुआ था. zaheer khan family– मैं उनके पिताजी बख्तियार खान,माताजी राखिया खान,और दो भाई है जीशान खान और अनीश खान है.

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जहीर खान ने अपनी शुरुआती शिक्षा “न्यू मराठी प्राइमरी स्कूल” से ली. बाद में के. जे. सौमया सेकेंडरी स्कूल से अपनी शिक्षा पूरी की. ज़हीर खान वैसे तो कोई अमीर परिवार से नहीं थे. उनका बचपन काफ़ी गरीबी में गुजरा.पर जहीर खान बचपन से ही काफी मेहनती थे और कुछ कर गुजरने की चाहत रखते थे.

बचपन में उन्हें भी क्रिकेट खेलने का बहुत शौक था.पर खेलते खेलते जहीर की क्रिकेट खेल में रुचि बढ़ती गई.और कभ यह उनका जुनून और पागलपन बन गया.यह उन्हें भी पता नहीं चला.और तब उन्हें क्रिकेटर बनने की ठान ली.और उनके पिताजी ने भी उन्हें सपोर्ट किया.

पर उनके पिताजी की इच्छा थी कि वह अपनी पढ़ाई पूरी करें.जहीर ने जैसे ही अपनी पढ़ाई पूरी की.वह क्रिकेट का प्रशिक्षण लेने के लिए मुंबई आ गए और मुंबई आकर उन्होंने “मुंबई नेशनल क्रिकेट क्लब”जॉइन कर ली. पैसे तंगी होने के कारण जहीर अपने मुंबई के अपने रिश्तेदार के यहां रहने लगे. पर उस छोटे से घर में कम जगह होने के कारण ज़हीर को जमीन पर ही सोना पड़ता था.

”मुंबई नेशनल क्रिकेट क्लब” में ज़हीर के कोच सुधीर नाईक उन्हें बहुत सहयोग करते हुए. जहीर को एक निजी कंपनी में जॉब लगवा दी.और वहां उन्हें सिर्फ 5000 रूपये तनखा मिलती थी.उस में ज़हीर खान का उन पैसों में अच्छा/खासा गुजारा हो जाता था.

उन्होंने”नेशनल क्रिकेट क्लब” की तरफ से खेलते हुए काफी अच्छा प्रदर्शन किया.और कई टूर्नामेंट जीत में अहम योगदान दिया.उनका यह प्रदर्शन देखकर उनके कोच सुधीर नाईक ने उन्हें चेन्नई के “एम.आर.एफ पेस फाउंडेशन” में भेजा. वहां जब ऑस्ट्रेलिया के महान तेज गेंदबाज “डेनिस लिली” ने उन्हें पहली बार देखा तभी उन्होंने जहीर खान के अंदर के हुनर को पहचाना.और भारतीय क्रिकेट में उनका भविष्य काफी उज्जवल रहेगा यह कहा.

यही बात “एम.आर.एफ पेस फाउंडेशन” डी शेखर को भी लगी.और उन्होंने वक्त जाया न करते हुए जहीर खान को फर्स्ट क्लास क्रिकेट खेलने के लिए वडोदरा गुजरात भेज दिया. मिले हुए मौके का ज़हीर खान ने भी भरपूर फायदा उठाया.और बड़ोदरा की तरफ से शानदार गेंदबाजी की और अपने हुनर का सबको परिचय दिया.

ज़हीर खान के इस शानदार प्रदर्शन के कारण “बड़ोदरा टीम” ने रेलवे टीम को हराकर 43 साल बाद “रणजी ट्रॉफी” जीती.और इस मैच में जहीर खान ने 145 रन देकर 8 महत्वपूर्ण विकेट निकाले थे.

ज़हीर खान. स्विंग बॉलिंग के उस्ताद. गेंद जिसका कहना मानती थी. जिसके इशारों पर ठीक वहीं पहुंचती, जहां उसे भेजा जाता था. एक जमाना था, जब जहीर की गेंदों के सामने दुनिया के सबसे बेहतरीन बल्लेबाज भी चकरा जाते थे. लेकिन इस महारत को हासिल करने के पीछे जहीर के जज्बे की कहानी खासी दिलचस्प है. आइए, आज जहीर खान के जन्मदिन पर उनके दो ऐसे किस्से बताते हैं, जिन्होंने 8 साल के अंदर उनकी पूरी इमेज ही बदल दी थी.

2 अप्रैल 2011. वानखेड़े स्टेडियम, मुंबई. पूरा देश टीवी से चिपका हुआ था. स्टेडियम में शोर चरम पर. बॉलर, बॉल फेंकने को दौड़ता है. उसका चौथा ओवर. पहले तीन ओवर मेडेन जा चुके हैं. एक भी रन नहीं. इनिंग्स का सातवां ओवर. इसकी फेंकी हुई 18 गेंदें और सामने वाली टीम एक भी रन बनाने में नाकाम रही. लेफ़्ट आर्म ओवर द विकेट. पहली गेंद. लेंथ बॉल, ऑफ स्टम्प की लाइन में टप्पा खाती हुई. बैट्समैन तक पहुंचते-पहुंचते अच्छा बाउंस पा चुकी थी.

साथ ही बाहर की ओर जाने लगी. बैट्समैन न चाहते हुए भी अपना बल्ला छुआ बैठा. सहवाग अपने साइड में डाइव मार के आगे की कार्रवाई पूरी करते हैं. वानखेड़े में शोर और भी बढ़ जाता है. टीवी देखते हुए लोग तालियां पीटने लगते हैं. बैट्समैन पवेलियन की ओर, और बॉलर अपने दोनों हाथ उठाये टीम की ओर चलने लगता है. इंडिया को पहला विकेट मिल चुका था. शेर के मुंह में खून लग चुका था. इसी शेर ने उस शाम एक शिकार और किया. कुछ घंटे बाद इंडिया वर्ल्ड कप जीत चुका था. सफ़लता! जश्न! प्यार! और ज़हीर खान!

  जहीर खान और सागरिका घाटगे की लव स्टोरी   

जहीर खान और सागरिका घाटगे की लव स्टोरी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। खुद सागरिका और जहीर खान ने नहीं सोचा था कि वो कभी एक-दूसरे के हमसफर बनेंगे।

तो फिर कैसे जहीर खान सागरिका के मन के मीत बने, जानते हैं आप ? क्या आप जानते हैं कि सागरिका के पेरेंट्स को पटाने के लिए जहीर खान ने क्या तरकीब अपनाई ? नहीं ? चलिए हम बताते हैं।

कुछ वक्त पहले मीडिया के साथ बातचीत में सागरिका ने खुलासा किया था कि जहीर ने कैसे उनके पेरेंट्स को पटाया। इस बारे में सागरिका ने कहा था कि उनके परिवार का हर सदस्य सिर्फ क्रिकेट ही नहीं बल्कि हर खेल के फैन हैं। इसके अलावा जहीर खान मराठी भी अच्छी बोल लेते हैं।

चूंकि सागरिका की फैमिली मराठी बैकग्राउंड से है और जहीर भी मराठी बोल लेते हैं, तो यह खूबी जहीर खान के फेवर में काम कर गई। क्रिकेट और मराठी हुनर घाटगे परिवार को जहीर में एक साथ मिले और बस बिना मौका गंवाए दोनों के रिश्ते को रजामंदी मिल गई…और अब सागरिका और जहीर खान हमेशा-हमेशा के लिए एक-दूसरे के हो गए हैं।

फिल्मी कहानी से कम नहीं यह रोमांस

दोनों की लव स्टोरी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है, खासकर सागरिका की फिल्म ‘चक दे इंडिया’ से सागरिका की लव स्टोरी काफी मेल खाती है। उस फिल्म में भी सागरिका को एक क्रिकेटर से प्यार हुआ था और रियल लाइफ में भी सागरिका की जिंदगी में एक क्रिकेटर की ही एंट्री हुई।

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युवराज और हेजल की शादी से मिला Hint

सागरिका घाटगे और जहीर खान के अफेयर के बारे में किसी को कुछ पता नहीं था, लेकिन क्रिकेटर युवराज सिंह की शादी में सबकुछ खुलकर सामने आ गया। युवराज और हेजल कीच की शादी में सागरिका घाटगे और जहीर खान एक-दूसरे के हाथों में हाथ डाले पहुंचे और साथ में मीडिया को पोज भी दिए।

इसके बाद तो अक्सर दोनों साथ में नजर आने लगे। कई जगहों पर जहीर खान और सागरिका साथ घूमने गए। इंस्टाग्राम पर भी सागरिका घाटगे अक्सर जहीर के साथ अपनी फोटोज शेयर करती रहती थीं।

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