भारतीय क्रिकेट टीम में प्रवेश करने के कई रास्ते हैं और ये रास्ते घरलु क्रिकेट में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के बाद तय होते हैं। घरेलु क्रिकेट में सबसे प्रमुख हैं रणजी ट्रॉफी। टीम इंडिया के कई सूरमा खिलाड़ी इसी मार्ग से टीम में आए हैं। 

भारतीय क्रिकेट टीम ने अंग्रेजों के वक्त 1933 में टेस्ट क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया था। टीम के खिलाड़ी अपने हुनर को और निखारे लिहाजा रणजीत सिंह विभाजी जडेजा के नाम से ही ‘रणजी’ ट्रॉफी की शुरुआत हुई थी।

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भारतीय क्रिकेट के इतिहास में रणजीत सिंह देश के ऐसे पहले ऐसे खिलाड़ी थे, जिन्हें इंग्लैंड की क्रिकेट टीम में खेलने का मौका मिला था। उस समय पटियाला महाराज ने इंग्लैंड के लिए 15 टेस्ट मैचों में 45 के औसत से 989 रन बनाए थे।

यही नहीं, रणजीत सिंह का बल्ला प्रथम श्रेणी क्रिकेट में खूब चला और उन्होंने 72 शतक के अलावा 109 अर्धशतक भी जड़े। उन्होंने 300 से ज्यादा प्रथम श्रेणी मैच खेले, जिसमें 24 हजार 692 रन बनाए।

जीवन परिचय : रणजीत सिंह विभाजी जडेजा का जन्म 10 सितम्बर 1872 सदोदर, काठियावाड़ में हुआ। 1907 में वे नवानगर में महाराजा जाम साहेब बने। उनका शासन 1933 तक चला। रणजीत सिंह की 10-11 वर्ष की उम्र से ही क्रिकेट में रुची थी। 1883 में पहली बार स्कूल ने क्रिकेट में क्रिकेट खेला। जब वे इंग्लैंड गए, उन्होंने कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में अध्ययन किया। 1884 में वे टीम के कप्तान बने और 1888 तक रहे।

1896 में खेल के उत्कृष्ट प्रदर्शन के कारण उन्हें क्रिकेट की बाइबिल विस्डन ने ‘विस्डन क्रिकेटर ऑफ द ईयर’ वर्ष 1897 के लिए नामांकित किया था। 1915 में शिकार के वक्त जख्मी हो गए और दायीं आंख की रोशनी खो बैठे थे। रणजीत सिंह का निधन 60 बरस की उम्र में 2 अप्रैल 1933 को हो गया। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने 1934 से ही उनके नाम पर रणजी ट्रॉफी (रंजी ट्रॉफी) की शुरुआत की।

रणजी ट्रॉफी भारत का सबसे पॉपुलर घरेलु क्रिकेट टूर्नामेंट है. नेशनल टीम में एंट्री की राह में सबसे अहम मुकाम. इंडियन टीम में कितने ही खिलाड़ी बारास्ता रणजी ट्रॉफी पहुंचे हैं. हर साल बिना नागा ये टूर्नामेंट आयोजित होता है. आइए इसके बारे में कुछ दिलचस्प बातें जानते हैं.

1. रणजी ट्रॉफी का पहला मैच 4 नवंबर 1934 को खेला गया. चेन्नई के चेपक स्टेडियम पर. मद्रास और मैसूर की टीम के बीच.

2. पहली गेंद मद्रास के एम. जे. गोपालन ने मैसूर के एन. कर्टिस को फेंकी.

3. रणजी की पहली सेंचुरी हैदराबाद के खिलाड़ी एस. एम. हादी के नाम है. उन्होंने पहले ही सीज़न में मुंबई के खिलाफ़ सिकंदराबाद में 132 रन बनाए थे.

4. रणजी ट्रॉफी का शुरूआती नाम ‘क्रिकेट चैंपियनशिप ऑफ़ इंडिया’ हुआ करता था.

5. बाद में इसका नाम महाराजा रणजीत सिंहजी के नाम पर रख दिया गया जो भारत की नवानगर रियासत के राजा थे. हालांकि रणजीत सिंहजी ने इंडिया के लिए कभी क्रिकेट ही नहीं खेला.

6. उनकी मौत रणजी ट्रॉफी शुरू होने से एक साल पहले ही हो गई थी.

7. रणजी ट्रॉफी खेलनेवाली ज़्यादातर टीमें भारत की राज्य टीमें हैं.

8. रेलवेज़ और सर्विसेज़ (आर्मी) की टीमें भी रणजी में खेलती हैं. 

9. आज़ादी से पहले रणजी ट्रॉफी खेलने वाली टीमें ज़्यादातर रियासतें हुआ करती थी.

10. रणजी ट्रॉफी के 83 साल के इतिहास में मुंबई सबसे ज़्यादा कामयाब टीम रही है. मुंबई ने कुल 41 बार ट्रॉफी जीती है.

11. एक दौर तो ऐसा था कि मुंबई को हराना लगभग नामुमकिन था. 1958 से 1973 तक उन्होंने लगातार 15 बार ट्रॉफी पर कब्ज़ा किया.

12. इस टूर्नामेंट में सबसे ज़्यादा रन वसीम जाफर के नाम हैं. उन्होंने 10,000 से ज़्यादा रन बनाए हैं. इसके अलावा मुंबई के अमोल मजूमदार भी रणजी में बल्लेबाजी के बड़े नाम हैं.

भारतीय क्रिकेट में रणजी ट्रॉफी का महत्व

भारतीय क्रिकेट में रणजी ट्रॉफी का महत्व वैसा ही है, जैसा किसी कॉलेज स्टूडेंट के जीवन में स्कूल का होता है। जिस तरह बिना स्कूल पास किए कोई कॉलेज नहीं जा सकता, ठीक उसी तरह भारतीय क्रिकेट टीम में जगह बनाने के लिए रणजी ट्रॉफी में खेलना होता है।

हालांकि, भारतीय क्रिकेट टीम में कुछ खिलाड़ी ऐसे भी रहें हैं, जिन्होंने बिना रणजी ट्रॉफी खेले ही राष्ट्रीय टीम का प्रतिनिधित्व किया है। लेकिन इन खिलाड़ियों की संख्या काफी कम है।

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इन खिलाड़ियों ने बिना रणजी खेले भारतीय क्रिकेट टीम मेें बनाई जगह

रणजी की शुरुआत 1934 में हुई थी, लेकिन भारत ने पहला टेस्ट 1932 में खेल लिया था। इसका मतलब है कि उस दौर के खिलाड़ियों ने बिना रणजी खेले भारत का प्रतिनिधित्व किया था।

रणजी के आगाज़ के बाद की बात करें, तो पार्थिव पटेल और जयदेव उनादकट ने बिना रणजी खेले भारत का प्रतिनिधित्व किया है।

पार्थिव को अंडर-19 विश्व कप और उनादकट को IPL और इंडिया-ए में अच्छे प्रदर्शन के बाद भारत के लिए खेलने का मौका मिला।

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