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“मजहब नहीं सिखाता आपस मे बैर रखना” श्री वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने इस कहावत को सच कर दिखाया है

देश भर में जहां लोग एक तरफ धर्म को लेकर अपनी धारण बना रहे हैं. वहीं दूसरी तरह एक ऐसी कहानी सामने आती है जो पूरे देश को एक धागे में पिरोने का काम करती दिख रही है.

जिस तरह “रोटी का कोई धर्म नहीं होता, पानी की कोई जात नहीं होती अगर इंसानियत जिंदा है, तो मज़हब जाती की बात नहीं होती”

हिन्दू श्राइन यानी कि श्री वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने धर्म, जाती से ऊपर उठ कर रमजान के पवित्र माह में न केवल कटड़ा भवन में अलग – अलग क्षत्रों से लौटे लोगों को पनाह दे क्वारंटाइन केंद्र बनाया. जैसे ही श्राइन बोर्ड को पता चला कि क्वारंटाइन केंद्र में मुस्लिमों की संख्या ज्यादा है. तो बोर्ड  रमजान जैसे पवित्र माह में उनके सहरी, इफ्तार का इंतज़ाम करने में लग गए. बोर्ड ने पूरे रमजान करीब 500 मुस्लिम समुदाय के इफ्तार के  लिए स्वादिष्ट भोजन का इंतज़ाम किया. इतना ही नहीं श्राइन बोर्ड ने ईद पर भी विशेष तैयारियां कर रखी हैं.

कहां रुके है सभी लोग

मंगल भवन धर्मशाला, रेलवे गेस्ट हाउस को क्वारंटाइन केंद्र बनाया गया है. 25 अप्रैल से रमजान के पवित्र पर्व पर लोगों ने रोजा रखा है. श्राइन बोर्ड ने कहा, कि सभी लोग अलग- अलग क्षत्रों से आए हैं. और ऐसी मुश्किल घड़ी में हमे साथ मिलकर चलना है. इफ्तार के प्रबंध पर खास ध्यान दिया गया है.

रात 1 बजे से शुरू कर देते हैं इफ्तार की तैयारियां
रात एक बजे से रसोई घर में सभी बोर्ड के कर्मचारी इफ्तार के लिए खाना बनाने की तैयारियां करने लगते हैं. जिससे कि सुबह 4 बजे तक खाना बन जाए.

जरूरतमंदों को करते हैं मदद
श्राइन बोर्ड न केवल इफ्तार की तैयारियां करता है, बल्कि झोपड़ियों में रहने वाले जरूरतमंद  लोगों को भी खाना और राशन  पहुंचाते हैं. श्राइन बोर्ड ने कहा है, कि जब तक लॉकडाउन रहेगा वे इसी तरह लोगों की मदद करते रहेंगे.

श्राइन बोर्ड के सी ई ओ कहा

श्राइन बोर्ड के CEO राकेश कुमार ने कहा है, कि हमे ये सूचना मिली थी, कि क्वारंटाइन केंद्र में रह रहे मुस्लिम समुदाय को खाना जल्दी चाहिए होता है. इसलिए बाकी कर्मचारियों के शेड्यूल में कुछ परिवर्तन किए हैं.  ईद पर खास खाना रख सकते हैं लेकिन अभी हल्वा पूड़ी चना खीर, सिवइयां दी जा रहीं हैं

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