उत्तराखंड में कोरोना कहर तेजी से बढ़ता जा रहा है। अधिकतर संक्रमित मरीज डर और तनाव से दम तोड़ रहे हैं। मिली जानकारी के अनुसार  विशेषज्ञ डॉक्टरों के अनुसार डर और तनाव से शरीर की इम्यूनिटी (रोग प्रतिरोधक क्षमता) घटने के अलावा ऑक्सीजन स्तर भी असंतुलित हो जाता है। इच्छा शक्ति कमजोर होने से दवाओं का अपेक्षाकृत प्रभाव कम हो जाता है। यही कारण है कि कई लोगों के कोरोना संक्रमित होते ही कई अंगों के काम न करने की शिकायतें सामने आ रही हैं। 

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बुखार और थकावट जैसे लक्षण दिखें तो तत्काल विशेषज्ञ को दिखाएं
प्रदेश के मुख्यमंत्री के चिकित्सक एवं राजकीय जिला कोरोनेशन अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. एनएस बिष्ट ने बताया कि कोरोना से बचाव के सबसे महत्वपूर्ण दो बिंदु हैं। एक तो जैसे ही बुखार और थकावट जैसे लक्षण दिखें तो तत्काल विशेषज्ञ को दिखाएं।

डॉक्टर शुरुआत में सामान्य बुखार की और अन्य सामान्य दवाएं देते हैं। उसके बाद भी बुखार नहीं उतरता है और इन्फेक्शन बढ़ता है तो स्टेरॉयड दवाइयां देने की भी जरूरत पड़ती है। आजकल कुछ लोग गूगल पर देख कर दवाओं के साइड इफेक्ट और तमाम चीजों को लेकर भ्रांति पाल लेते हैं। इस तरह से कोई भी व्यक्ति अपने आप डॉक्टर न बने।

राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल के असिस्टेंट प्रोफेसर एवं फिजीशियन डॉ. कुमार जी. कॉल और वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. जनेंद्र कुमार ने बताया कि गंभीर बीमारी में मन में अगर डर घर कर जाए तो हार्ट अटैक, किडनी फेल्योर समेत मल्टी ऑर्गन खराब होने की समस्या बढ़ जाती है।

इससे मुख्य बीमारी को कंट्रोल करने में भी समस्या के साथ दूसरे कारणों से जान की जाने की स्थिति बन जाती है। किसी भी बीमारी की रिकवरी के लिए मरीज की इच्छा शक्ति बहुत महत्वपूर्ण योगदान निभाती है।

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डॉक्टर स्थिति ठीक न होने पर खून की जांच, एक्सरे और अन्य जांच करने के बाद ही स्टेरॉयड और अन्य दवाएं देते हैं। साथ ही उन दवाओं के साइड इफेक्ट कम करने के लिए भी दूसरी दवाएं दी जाती हैं। ऐसे में डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाएं और अन्य उपचार कराएं। 

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