देहरादून जिले में बढ़ते कोरोना मरीजों की संख्या के सामने अस्पतालों में ऑक्सीजन का संकट हो गया है। इसे देखते हुए अब प्रदेश सरकार भी सक्रिय हो गई है। आक्सीजन गैस को लेकर अभी कोई समस्या नहीं है, लेकिन भविष्य की जरूरत और आपात स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने आक्सीजन का स्टाक करना शुरू कर दिया है। इसके लिए सख्ती दिखाते हुए कांच इकाइयों की दी जाने वाली आपूर्ति रोक दी गई है। आक्सीजन की बिक्री करने वाली फर्मो को पर्याप्त स्टाक रखने के आदेश दिए गए हैं।\

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कंपनियों को उद्योगों में सप्लाई पर रोक लगाने के निर्देश
महाप्रबंधक जिला उद्योग केंद्र को प्रभारी आक्सीजन मैनेजमेंट बनाया गया है। साथ ही जिले में ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली कंपनियों को उद्योगों में ऑक्सीजन की सप्लाई पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं। 

ऑक्सीजन का इस्तेमाल फार्मा उद्योगों के साथ फैब्रिकेशन से जुड़े कार्यों के साथ फूड प्रोसेसिंग यूनिटों में होता है। दून में भी बड़ी संख्या में फार्मा उद्योग है। इसके अलावा यहां फूड प्रोसेसिंग यूनिट और फैब्रिकेशन से जुड़े उद्योग भी हैं।

ऑक्सीजन संकट को देखते हुए फिलहाल उद्योगों में सप्लाई पर रोक
हालांकि फैब्रिकेशन से जुड़े बड़े उद्योगों की संख्या कम ही है। इन उद्योगों में इस्तेमाल किया जाता है। बढ़ते ऑक्सीजन संकट को देखते हुए फिलहाल उद्योगों में सप्लाई पर रोक लगा दी गई है। 

इंडस्ट्री एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड के अध्यक्ष पंकज गुप्ता ने कहा कि फिलहाल सबकी प्राथमिकता मेडिकल क्षेत्र है। लिहाज उद्योगों में सप्लाई नहीं दी जा रही है। ऑक्सीजन प्लांट संचालित करने वाले अंकुर सिंघल ने बताया कि फिलहाल उनकी प्राथमिकता अस्पताल हैं।

नोडल अधिकारी ने सेलाकुई में ऑक्सीजन प्लांटों और उद्योगों का निरीक्षण किया

इसलिए केवल अस्पतालों में ही ऑक्सीजन की सप्लाई की जा रही है। उद्योगों की सप्लाई पर रोक दी गई है। वहीं मंगलवार को महाप्रबंधक जिला उद्योग केंद्र और मैनेजमेंट के नोडल अधिकारी शिखर सक्सेना ने सेलाकुई में ऑक्सीजन प्लांटों और उद्योगों का निरीक्षण किया।

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उन्होंने बताया कि फिलहाल उद्योगों में इस्तेमाल कम ही किया जा रहा है। सप्लायरों को भी पहले अस्पतालों में ऑक्सीजन की सप्लाई के निर्देश दिए गए हैं। फिलहाल दून में पर्याप्त मात्रा में सिलिंडर हैं।

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