खेल एक कला है और इस कला में शिल्पकारों की भूमिका बहुत अहम है. क्रिकेट में ऐसे कई महान खिलाड़ी हैं जिन्होंने इस खेल को सफलता की बुलंदी पर पहुंचाया है. पर असल मायनों में क्रिकेट का एक ऐसा खिलाड़ी भी है जिसे अगर क्रिकेट का देवता कहा जाए तो कोई दो राय नहीं. नाम जिनका है सचिन तेंदुलकर।

सचिन तेंदुलकर (Sachin Tendulkar) विश्व क्रिकेट का वह चेहरा है जिसे पिछले बीस सालों से करोड़ों खेल-प्रेमी अपनी आंखों का तारा बनाए हुए हैं. बल्लेबाजी का शायद ही कोई ऐसा रिकॉर्ड हो जो इस महानायक की पहुंच से दूर हो. सचिन तेंदुलकर (Sachin Tendulkar) का नाम भारत में इस कदर लोकप्रिय है कि एक समय लोग सचिन तेंदुलकर (Sachin Tendulkar) को ही क्रिकेट का दूसरा नाम मानते थे. इस अकेले खिलाड़ी के पास इतने रन हैं जितना इस समय पूरी एक टीम के पास भी नहीं है.

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सचिन तेंदुलकर (Sachin Tendulkar) ने अपने स्कूल मुंबई के शारदाश्रम विद्यामंदिर (Sharadashram Vidyamandir) से ही अपने क्रिकेट कॅरियर की शुरुआत कर दी थी. रमाकांत आचेरकर की छत्रछाया में उन्होंने प्रारंभिक क्रिकेट सीखना शुरु किया. इसके बाद एमआरएफ फाउंडेशन (MRF Foundation) की तरफ से आस्ट्रेलिया के तेज गेंदबाज डेनिस लिली ने सचिन को तेज गेंदबाजी करते देखा तो कहा कि गेंदबाजी से बेहतर है तुम बल्लेबाजी पर ध्यान दो. इस एक कथन ने क्रिकेट के भगवान की तकदीर बदल दी.

सचिन शुरुआत मे तेज गेंदबाज बनने के लिये एम.आर.एफ० पेस फाउण्डेशन के अभ्यास कार्यक्रम में शिरकत की पर वहाँ तेज गेंदबाजी के कोच डेनिस लिली ने उन्हें पूर्ण रूप से अपनी बल्लेबाजी पर ध्यान केन्द्रित करने को कहा। जिसके बाद उन्होने बल्लेबाजी मे ध्यान देने लगे। सचिन तेंदुलकर सुरवात में लाल टेनिस खेला करते थे. उन्होंने जॉन मैकनेरो को अपना गुरु बना लिया था.

सचिन सुरवात में अच्छा गेंदबाज बनना चाहते थे. लेकिन वो एम आर एफ पेस फाउंडेशन के पास गए वहा पर सचिन को ऑस्ट्रेलिया की तेज गेंदबान डेनिस लिली ने गाइड किया की आप अपने बल्लेबाजी पर ध्यान दो इधर-उधर अपना मन मत भटकाओं इस तरह क्या करना चाहिए, उसका करिअर कहा बन सकता है  और उसकी रूचि कहा है, क्या कर सकता है यह उसके बड़े बाई अजित ने पहचान लिया और उसको 1984 में क्रिकेट में सफलता पाने के लिए रमाकांत अचरेकर से मुंबई में मुलाखात करवा के दिया. आचरेकर जी ने सचिन का क्रिकेट के प्रति लगाव देख कर उन्हें दादर के शारदा श्रम विद्यामंदिर हास्कूल से स्कुल की पढ़ाई पूरी करने को कहा यह स्कुल सचिन के चाची के घर के पास था इसलिए अपने चाची के घर रहने लगा और स्कुल जाने लगा. सचिन ने शिवाजी पार्क में क्रिकेट का अभ्यास चालू कर दिया था आचरेकरजी बिच के स्टंप पर एक सिक्का रखते थे. यह सिक्का उसीका होगा जो बॉलर सचिन को आउट करेगा. सचिन धीरे-धीरे शारदाश्रम विद्यामंदिर मंदिर में फेमस होने लगे. वहा पर विनोद कांबली सचिन के अच्छे दोस्त बन गए.

इसके बाद 15 साल की उम्र में उन्होंने विनोद काम्बली के साथ मिलकर हारेस शील्ड मुकाबले में 664 रन की पार्टनरशिप की जिसमे सचिन ने अपनी अदभुत प्रतिभा के दम पर 320 रनों की पारी खेली, इस प्रदर्शन से वो बहुत प्रसिद्ध हो चुके थे जिस कारण 16 वर्ष की छोटी उम्र में ही उनको टीम इंडिया में जगह मिल गयी और इन्होने सन 1989 में पाकिस्तान के खिलाफ अपने अन्तराष्ट्रीय क्रिकेट की शुरुआत कर की। उन्होंने अपने लाजबाब क्रिकेट से क्रिकेट प्रेमियों का दिल जीत लिया था।

सन 1990 में इंग्लैंड दौरे में अपने टेस्ट क्रिकेट का पहला शतक लगाया जिसमे उन्होंने नाबाद 119 रन बनाये इसके बाद ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका के टेस्ट मुकाबलों में भी सचिन का प्रदर्शन यही रहा और उन्होंने कई टेस्ट शतक जड़े। सचिन ने 1992-93 में अपना पहला घरेलु टेस्ट मैच इंग्लैंड के खिलाफ भारत में खेला जो उनका टेस्ट कैरियर का 22वा टेस्ट मैच था।

सचिन की प्रतिभा और क्रिकेट तकनीक को देखते हुए क्रिकेट इंटरनॅशनल पत्रिका ने उन्हें डॉन ब्रेडमैन की उपाधि दी जिसे बाद में डॉन ब्रेडमैन ने भी खुद इस बात को स्वीकारा, सचिन के शानदार प्रदर्शन को देखते हुए उन्हे टीम इंडिया की कप्तानी भी दी गई लेकिन वे एक कप्तान के रूप मे सफल नहीं हो सके और उनका अपना खेल भी इससे बहुत प्रभावित हुआ, जिस कारण उन्होंने स्वतः ही कप्तानी का पद छोड़ दिया। इसके बाद इन्होने अपना पूरा ध्यान खेल पर लगाया।

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सचिन इतने महान क्रिकेट प्लेयर होते हुए भी ज़मीन से जुड़े व्यक्ति हैं, आज वे हर साल 200 बच्चों के पालन पोषण की जिम्मेदारी हेतु अपनालय नाम का एक गैर सरकारी संगठन मध्यम से करते हैं। आज दुनिया के बच्चा से लेकर बडो के ज़ुबान मे क्रिकेट मतलब तेंदुलकर हैं। क्रिकेट के अलावा वे अपने ही नाम के एक सफल रेस्टोरेंट के मालिक भी हैं। दायं हाथ के इस महान बल्लेबाज ने ना सिर्फ बल्लेबाजी बल्कि कई अहम मौकों पर अपनी कलाई का जादू दिखाकर मैच भी जिताया है. एक मैच विनर बल्लेबाज होने के साथ ही वह एक मैच विनर गेंदबाज भी हैं. हमेशा शांत रहने वाले सचिन को शायद ही आपने कभी कैमरे के सामने अधिक देखा हो. अपनी निजी जिंदगी को दूसरों से छुपाने वाले सचिन समाज सेवा का कोई मौका नहीं छोड़ते लेकिन जब वह चैरिटी करते हैं तो किसी को दिखाते नहीं है. सचिन अपने आलोचकों को कभी भी मुंह से जवाब नहीं देते. सचिन अपनी दोस्ती निभाने के लिए भी जाने जाते हैं.

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