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Taapsee Pannu ने कविता के जरिए बयां किया प्रवासियों का दर्द. कहा यह भारत के लिए वायरस इंफेक्शन नहीं बल्कि इससे बदतर है.

न चाहिए भीख न दान, बस मत छीनो आत्मसम्मान

लॉकडाउन में कोई न कोई फिल्म स्टार प्रवासियों की मदद के लिए सामने आया है. और मदद करते भी तो क्यों न, देश में इस तरह की परिस्थिति शायद कभी नहीं देखी थी. जब मजदूर नंगे पैर तपती धूप में मीलों का सफर तय कर रहे थे, भूखे प्यासे बस मंजिक के आने का इंतेजार कर रहे थे. इस सब स्थितियों को देख बॉलीवुड अभिनेत्री तापसी पन्नू  ने एक कविता के माध्यम से प्रवासी मजदूरों के दर्द को अपने शब्द दिए हैं.

तापसी का कहना है, कि यह कोरोना भारत के लिए  एक वायरस या इंफेक्शन नहीं है, बल्कि इससे बदतर है. इस लॉकडाउन की वीडियो में उन तमाम मजदूरों की तस्वीरें हैं जिसे देख कर हर देश भावुक हो गया था. इन तस्वीरों को  एनीमेशन के जरिए वीडियो में ऐड किया गया है. कविता की शुरुआत में, “हम तो बस प्रवासी है क्या इस देश के वासी हैं” कुछ इन शब्दों से शुरुआत की गई है.

तापसी ने एनीमेशन के जरिए तस्वीरे डाल वीडियो को और भी इमोशनल कर दिया है. साथ ही बैकग्राउंड में म्यूजिक और तापसी के वॉइस ओवर ने इस कविता में जान डाल दी है. प्रवासियों का रहना परेशानियों का झेलना सुन यह भावोत्तेजक शब्द आपके दिल को झकझोर के रख देंगे. तापसी इस कविता को पोस्ट करते हुए लिखती हैं, कि तस्वीरों की यह श्रृंखला हमारे दिमाग से कभी नहीं मिट पाएगी, यह पंक्तियां लंबे समय तक हमारे दिमाग में गूंजेंगी. यह महामारी भारत के लिए वायरस इंफेक्शन से बदतर है.

Instagram video by Tapsee

बता दें, की तापसी पर्दे पर छा गई हैं, उनकी फिल्म थप्पड़ ने लोगों के दिलों में, खास तौर पर मांहिलाओं के दिलों में एक जगह बना ली है. आज तापसी एक सफल अभिनेत्रियों में गिनी जाती हैं. तापसी पन्नू की फिल्मों ने पिछले 1 साल में करीब 352 करोड़ रुपये की कमाई की है. आश्चर्य की बात यह है, कि तापसी को जब इस बात का पता चला तो वे खुशी के मारे फुले नहीं समाईं थीं. इसके बाद उन्हें ट्वीटर और मैसेज पर खूब बधाइयां मिलीं. तापसी ने मिशन मंगल, गेम ओवर, बिल्ला, सांड की आंख, थप्पड़ में बेहतरीन काम किया है. थप्पड़ मूवी को छोड़ बाकी सभी फिल्में 2019 में रिलीज हुई थीं.

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