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क्या आज का युवा स्वामी विवेकानंद के विचारों से प्रेरित है ?

भारत ही नहीं दुनिया के युवाओं को स्वामी विवेकानंद के विचारों ने प्रभावित किया है स्वामी विवेकानंद के विचारों ने कई युवाओं की सोच बदली है। स्वामी विवेकानंद भारत के महापुरुषों में से एक है। लेकिन क्या आज का युवा स्वामी विवेकानंद के विचारों से अवगत है ? क्या आज का युवा स्वामी विवेकानंद के विचारों को समझना और उनके विचारों को खुद पर उतारना चाहता है? क्या आज का युवा स्वामी विवेकानंद के बारे में जानना चाहता है ?

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भारत में स्वामी विवेकानंद का नाम तो हर युवा ने सुना होगा लेकिन उनके विचारों को हर युवा जानता होगा इस बात का दावा नहीं किया जा सकता है क्योंकि आज के इस बदलते समाज में युवाओं की सोच आधुनिकता से परे होती जा रही है आपको बता दें स्वामी विवेकानंद ने शिकागो में साल 1893 में एक भाषण दिया था जिसके बाद उन्हें भारतीय दर्शन और अध्यात्म का अग्रदूत बना दिया गया था।

1893 से लेकर आज तक स्वामी विवेकानंद उनके विचार युवाओं को प्रभावित करते आ रहे हैं, स्वामी विवेकानंद के विचार उन्हीं युवाओं को प्रभावित करते हैं जो विवेकानंद के बारे में जानना समझना और पढ़ना पसंद करते हैं. देखा जाए तो आज के दौर में युवा अलग-अलग समस्याओं का सामना करता है नए लक्ष्य को पाने के लिए या फिर नए लक्ष्य का रास्ता तय करने के लिए अपने सपनों के लिए बेहतर भविष्य की आकांक्षा रख रहे हैं तो सामी विवेकानंद के विचार और भी प्रासंगिक हो जाते हैं.

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स्वामी विवेकानंद का मानना था कि एक युवा का जीवन सफल होने के साथ-साथ सार्थक भी होना बहुत जरूरी होता है जिससे उसका मस्तिष्क हृदय और आत्मा का संतोषम भी होता है . स्वामी विवेकानंद का मानना था कि सार्थक जीवन के विषय को 4 बिंदुओं मैं समझा जा सकता है। शारीरिक, सामाजिक, बौद्धिक और अध्यात्मिक साधन।

स्वामी विवेकानंद का मानना था कि ज्यादातर युवा सफल और आयुष पूर्ण जीवन तो जीना चाहते हैं लेकिन अपना लक्ष्य प्राप्त करने के लिए वह शारीरिक रूप से तैयार नहीं होते हैं इसलिए उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे निर्भर बने और अपने आप को शारीरिक रूप से स्वस्थ बनाएं। विवेकानंद का कहना था कि किसी भी तरीके का है भय नहीं करना चाहिए निर्भर बनो सारी शक्ति तुम्हारे अंदर ही है,कभी भी यह मत सोचो कि तुम कमजोर हो उठो जागो और तब तक ना रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त ना हो जाए।

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स्वामी विवेकानंद हमेशा मानसिक रूप से स्वस्थ होने के साथ-साथ शारीरिक रूप से मजबूत होने की भी बात करते थे लेकिन जब यह बात आज के युवाओं पर लागू होती है तो थोड़ा अलग नतीजा देखने को मिलता है युवाओं में शारीरिक कमजोरी और मानसिक तनाव बढ़ता जा रहा है। कई शोध में यह पाया गया है कि सबसे ज्यादा मानसिक तनाव युवाओं के अंदर होता है। बढ़ती तकनीकी के कारण युवाओं ने अपने आपको समाज से दूर करना कर दिया है।

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स्वामी विवेकानंद हमेशा कहते थे कि युवाओं को अधिक से अधिक संख्या में सामाजिक गतिविधियों में शामिल होना चाहिए जिससे ना केवल समाज बेहतर बनेगा बल्कि इससे व्यक्तिगत विकास भी, उन्होंने सामाजिक सेवा के साथ-साथ आध्यात्मिकता को भी जोड़ा है और मनुष्य में मौजूद ईश्वर की सेवा करने की बात कही है उनके अनुसार सेवा से चित्त शुद्धि भी होती है स्वामी विवेकानंद ने समाज के सबसे कमजोर तबके के लोगों की सेवा करके एक नए समाज के निर्माण करने की बात कही है।

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कहते हैं कि किसी भी समाज को आगे बढ़ाने के लिए युवा पीढ़ी को ही अपना कदम आगे बढ़ाना पड़ता है ऐसे में अगर आज का युवा स्वामी विवेकानंद के विचारों को अपनाकर अपना कदम समाज की ओर बढ़ाएं तो समाज उन्नति की ओर बनेगा। और देश नई ऊंचाइयों पर पहुंचेगा जिससे देश का नाम सर्वप्रथम रहेगा।

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