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शनि दोष को दूर करने के कुछ अहम उपाय,आइये पढ़े

शनि दोष को विभिन्न तरीके से हटाया जाना आसान है

शास्त्रों के मुताबिक शनि की महादशा 19 वर्ष की होती है। शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रकोप बहुत ही दुखदायी कहा जाता है। नौ ग्रहों में सबसे मन गति से चलने वाले शनि देव को न्याय और कर्म प्रधान देवता माना गया है। सभी ग्रहों से धीमी गति से चलने की वजह से शनि का प्रभाव जातकों पर ज्यादा समय तक रहता है ।

जिनकी कुंडली में शनि का शुभ फल होता है उन जातकों के सभी कार्य पूरे होते हैं तथा उन्हें फल प्रदान होते हैं। और वहीं दूसरी ओर जातक की कुंडली में शनि अशुभ है तो जातक को विभिन्न प्रकार की कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है। यानी कई प्रकार की परेशानियों से लड़ना पड़ता है। ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति के पूरे जीवनकाल में एक बार या उससे अधिक बार शनि की साढ़ेसाती लगती ही है।

इस दोष से बचाव के उपाय :
1 – हर शनिवार को पीपल के पेड़ पर जल चढ़ाना चाहिए साथ मे दीपक जलाना चाहिए।
2 – प्रत्येक शनिवार को शनि चालीसा का पाठ करना चाहिए इससे शनिदेव खुश हो जाते हैं और आपके दोष को हट जाएगा।
3 – शनि दोष से मुक्ति प्राप्त करने के लिए आपको शनि देव के 10 नामों का जाप करना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है ,यह 10 नाम कुछ इस प्रकार हैं- पिंगल, कृष्ण, सौरि, शनैश्चर, मंद, पिप्पलाश्र, रौद्रान्तक, बभ्रु, यम,कोणस्थल।

 

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