सिडकुल के निर्माण कार्य में अधिकारियों ने कमीशन का खेल खेला था। यूपी की निर्माण इकाई को काम देने के एवज में 12 प्रतिशत कमीशन अधिकारियों को देने की बात सामने आई है। एसआईटी और तकनीकी कमेटी की जांच में यह खुलासा हुआ है। कमीशन लेने वाले अधिकारियों के नाम उजागर किए बिना टीम ने इनके खिलाफ गोपनीय जांच शुरू कर दी है।

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वर्ष 2012 से 2017 तक पंतनगर सिडकुल में बनाए गए सिटी पार्क में यूपी निर्माण निगम की ओर से कई निर्माण कार्य किए गए थे। सरकार की ओर से कराए गए ऑडिट में निर्माण कार्यों के साथ ही कर्मचारियों की नियुक्ति और वेतन निर्धारण में अनियमितताएं मिलीं थीं। जांच के लिए शासन के आदेश पर एसआईटी का गठन कर दिया गया था।

एसआईटी को सिडकुल में स्थापित सिटी पार्क की जांच में पार्क के मुख्य द्वार, शौचालय, फव्वारे, सीसी मार्ग व चहारदीवारी निर्माण में वित्तीय अनियमितताएं मिली थीं। इसके अलावा काशीपुर एस्कार्ट फार्म स्थित सिडकुल इंडस्ट्रियल एरिया में विभिन्न सेक्टरों को जाने वाली सड़कों के किनारे बरसाती पानी की निकासी के लिए बनाए स्ट्रांग वाटर ड्रेन में भी वित्तीय अनियमितताएं उजागर हुईं। 

एसआईटी और तकनीकी दोनों टीमों ने निर्माण कार्य की जांच शुरू कर दी है। जांच में खुलासा हुआ है कि यूपी निर्माण निगम को काम देने की एवज में अधिकारियों ने 12 प्रतिशत कमीशन लिया। सीसी मार्ग, चहारदीवारी, पार्क का मुख्य द्वार बनाने में गुणवत्ता में भी कमी पाई गई है। इन्हीं कामों के लिए कमीशन सबसे अधिक लिया। 

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112 फाइलों की होनी है जांच 

सिडकुल घोटाले की जांच को लेकर एसआईटी ने 112 फाइलें बनाई हैं। एसआईटी सूत्रों के अनुसार अब तक 24 फाइलों की जांच पूरी कर ली गई है। लोनिवि व जल संस्थान की तकनीकी कमेटी ने अपनी रिपोर्ट बनाकर एसआईटी को सौंप दी थी। इसके बाद इन सभी फाइलों को पुलिस मुख्यालय भेज दिया गया है। तकनीकी जांच में निर्माण कार्यों में अनियमितताएं मिली हैं।

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