27 साल के रितेश अग्रवाल का जन्म 16 नवंबर 1993 को बिस्साम कटक , रायगढ़ , ओडिशा में एक मडवारी परिवार में हुआ था । उन्होंने अपने जिले के ही स्कर्ड हार्ट स्कूल से अपनी इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई पूरी की , इसके बाद वह आगे की पढ़ाई पूरी करने के लिए दिल्ली चले गए । दिल्ली में उन्होंने इंडिया स्कूल ऑफ बिजनेस अकादमी में एडमिशन ले लिया । लेकिन उन्होंने अपने बिजनेस को बढ़ाने के लिए पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी थी ताकि वह अपना पूरा समय अपने बिजनेस में लगा सके ।रितेश एक ड्रॉप आउट हैं लेकिन वह इतने काबिल बन चुके हैं की आज आई. आई. टी. और आई. आई. एम. जैसी बड़ी शिक्षा संस्थान में पढ़ने वाले छात्र उनके नेतृत्व में काम करते हैं ।

 Ritesh Agarwal

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बिल गेट्स , स्टीव जॉब्स और मार्क जुकरबर्ग से प्रेरति हो कर रितेश अग्रवाल ने 18 साल की उम्र में ही कर दी थी अपने बिजनेस के शुरुआत कर दी थी और 21 साल की उम्र में ही Oyo रूम्स के फाउंडर और सी. ई. ओ. बन उन्होंने अपने इस सपने को पूरा कर दिखाया और दूसरे युवाओं के लिए एक प्रेरणा बना गए ।
24 साल की उम्र में ही रितेश 7,800 करोड़ रुपए की प्रॉपर्टी के मालिक बन चुके थे , जिसके बाद वह दुनिया के सबसे युवा अरबपति बन चुके हैं । और 2020 में oyo rooms के फाउंडर रितेश अग्रवाल हुरून ग्लोबल रिच लिस्ट में शामिल हो चुके हैं ।

Oyo रूम्स की शुरुआत
रितेश के दिमाग में oyo रूम्स का खयाल तब आया जब वह जगह जगह घूमने जाते थे लेकिन उन्हें रहने के लिए अच्छे होटल की व्यवस्था नहीं मिल पाती थी ।
उन्हें शुरुआत से ही घूमने का बहुत शौक रहा है लेकिन कभी उन्हें अच्छे रूम के लिए ज्यादा पैसे देने पड़ते थे तो कभी उन्हें रूम्स में अच्छी सुविधाएं नहीं मिल पाती थी ।
अपने ख़ुद के अनुभवों को याद मे रख कर उन्होंने oyo रूम्स की शुरुआत की जो की काम पैसों में थोड़ी देर के लिए भी अच्छी सुविधा उपलब्ध कराती है ।

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2012 में जब उन्होंने Oyo रूम्स की शुरुआत की तब वह “oreval stays” के नाम से जाना जाता था । Oreval stays का काम भी टूरिस्ट्स को कम समय के लिए थोड़े पैसों में रहने के लिए कमरों को उपलब्ध कराना था । उस समय में oreval में ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा उपलब्ध थी जिससे लोग उस जगह पे पहुंचने से पहले से ही रूम बुक कर सकते थे ।

उनके इस बेहतरीन विचार को देख के “वेंचर नर्सरी” ने उन्हें तीस लाख रुपए का फंड भी उपलब्ध कर दिया था । इसके बाद उन्होंने “पे पल” नाम की कंपनी के सह संस्थापक पीटर थील द्वारा आयोजित वैश्विक प्रतियोगिता में भाग लेकर दसवां स्थान प्राप्त किए । जहां उन्होंने अपने इस oreval stays का विचार रखा और 65,000 लाख रुपए का सहयोग प्राप्त हुआ ।

बहुत कम उम्र में ही इतनी बड़ी सफलता प्राप्त करने पर उनकी खुशी सातवें आसमान पर थी लेकिन जीवन में सूख और दुख का आना जाना लगा ही रहता है ।
कुछ ही समय में उनकी overal stays कंपनी घाटे ने जाने लगी । उन्होंने बहुत कोशिश की कि उन्हें कहीं न कहीं से किसी भी प्रकार का सहयोग मिल जाए लेकिन उनके सारे प्रयास असफल साबित होते जा रहे थे और कुछ ही समय में उन्हें इस कंपनी को बंद करना पड़ गया ।

अच्छी बात तो यह थी की अपने इस असफलता के कारण वह निराश हो कर बैठने के बजाए अपने इस योजना पर दुबारा से विचार कर काम करने का प्रयास किया । तब उन्हें ये समझ आया की भारत देश में कम पैसों में सस्ते होटल हर जगह उपलब्ध हैं , लेकिन सबसे बड़ी बात यह थी की लोगों को काम पैसों में अच्छी फाइव स्टार होटल जैसी सुविधा उपलब्ध नहीं थी । इसलिए 2013 में उन्होंने दुबारा से अपने इसी योजना को और थोड़ा और बेहतर कर कम पैसों में लोगों को अच्छी सुविधाएं भी उपलब्ध करानी शुरू कर दी । और अब उन्होंने अपनी कम्पनी का नाम oreval stays से हटा के oyo rooms रखा ।

इसके बाद वह पिछली बार से भी ज्यादा सफल हुए जिसे देख 2014 में दो बड़ी कंपनियां “लाइटसपीड वेंचर पार्टनर्स” और “डी. एस. जी. कंज्यूमर पार्टनर्स” ने oyo rooms में चार करोड़ रुपए का निवेश भी किया । और 2016 में एक जापानी कम्पनी “सॉफ्ट बैंक” ने भी उसमे सात अरब रुपए का निवेश किया । 2018 में उन्होंने oyo rooms में 1 अरब डॉलर का निवेश जुटाया है । आयो rooms ने अब अपनी शुरुआती दौर के समय से खुद को तीन गुना ज्यादा बढ़ा लिए है और आज पूरे देश में फैल गया है । आज सब oyo rooms को जानते और पहचानते हैं । ये लोगों को काम दामों में बाकी बड़ी बड़ी फाइव स्टार होटल जैसी अच्छी सुविधाएं उपलब्ध करा रही है और लोग इसे काफी पसंद भी कर रहे हैं ।

विवाद

विवादों से तो आज तक कोई बच नहीं पाया , रितेश अग्रवाल भी नहीं । 2020 में रितेश अग्रवाल के खिलाफ चंडीगढ़ के डेरा बस्सी में एक बिजनेस मैन ने उनके ऊपर धोखाधड़ी 120 बी और आई. पी. सी. की धारा 420 के तहत साजिश रचने का मामल दर्ज किया था। रितेश ने यू. एस. में होटल मालिकों के साथ अपनी कम्पनी oyo के मध्यम से समझौतों पर हस्ताक्षर किए , जिसमे मैलिकों को मुआवजे और गारंटी राजस्व के बदले में oyo के तहत वापस भेजा जाएगा लेकिन यह जानकारी छोड़ दी की क्लिफोर्निया राज्य में oyo फ्रेंचाइजी व्यवसाय संचालित करने के लिए अधिकृत नही है । जिसके कारण 2019 में कैलिफोर्निया के नियामकों द्वारा oyo पर 200,000 डॉलर का जुर्माना लगाया गया था । कंपनियों ने वॉशिंगटन से एक संघर्ष विराम और आदेश भी प्राप्त किया , क्योंकि नियामकों को ऐसा पता चला की oyo द्वारा कई होटल मालिकों और प्रतिबंधों को उचित पंजीकरण के बिना भी ऑफर दिए गए थे ।

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यही नहीं oyo को भारत में 10,000 होटल के मालिकों से बैकलैश का सामना भी करना पड़ा था । उनके मुताबिक oyo फेस के जरिए राजस्व का आधा या उससे अधिक हिस्सा लेता है , जिसका बार में उन्हें उस समय नहीं मालूम चल पाता जब oyo होटल के साथ शामिल होता है इसका खुलासा बाद में होता है । वहीं 2019 में रितेश के ऊपर धोखाधड़ी का मामला लगाते हुए बैंगलोर , चिकमगलूर और कर्नाटक के अन्य शहरों में होटल ने संचालकों ने oyo के खिलाफ पुलिस में मामल दर्ज करवाया था ।

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