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पिता के साथ बनाए मजबूत रिश्ते, यह गलतियां कभी ना होने दें

लोग अक्सर मां और बच्चों के रिश्ते के बारे में चर्चा करते हुए दिखते हैं लेकिन पिता और बच्चों के रिश्ते के बारे में बहुत कम लोग ही लिखते और पढ़ते हैं लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं है कि पिता का दर्जा कम होता है कहा जाता है कि माता-पिता का रिश्ता भगवान से भी ऊपर होता है सुखी हो या दुख यह हमेशा हमारे साथ खड़े रहते हैं फिर चाहे परिस्थितियां किसी भी प्रकार की हो ना ऐसे में बच्चों का फर्ज बनता है कि हर परिस्थिति में अपने मां बाप के साथ खड़े हो।

relationships with father

पिता की मौजूदगी हर बच्ची के जीवन में वह सादा खास होती है उनकी मौजूदगी हमेशा यह एहसास कराती है कि हम सुरक्षित हैं हालांकि भाग दौड़ भरी जिंदगी में लोग अपने घर परिवार माता-पिता से दूर होते जा रहे हैं। और कभी पिता की व्यस्तता होती है तो कभी बच्चों के अपने काम होते हैं जैसे नौकरी या पढ़ाई की वजह से उन्हें कई बार साथ समय बिताने का मौका नहीं मिल पाता है। इससे कुछ हद तक दूरियां बनने लगती है ऐसे में यह जरूरी है कि हम खुद में कुछ बदलाव करें फिर पढ़ाई हो या काम हो या फिर कोई अन्य चीज माता-पिता से ज्यादा अनमोल कुछ नहीं हो सकता है।

साथ में बिताए वक्त

लोगों के पास इतना काम होने लगा है कि उन्हें घर परिवार के लिए वक्त ही नहीं होता है फिर चाहे वह पिता हो या बच्चे सबकी अपनी व्यस्तता होती है और समय बिताने का मौका साथ में कम ही मिल पाता है ऐसे में अगर आप चाहते हैं कि पिता के साथ थोड़ा सा ही सही लेकिन अपना कीमती वक्त बताएं तो इसके काफी फायदे हो सकते हैं सबसे पहला तो आपके पिता के साथ बातचीत करने का मौका मिलेगा और दूसरा की वॉक करने से उनकी और आपकी सेहत भी दुरुस्त रहेंगे ऐसे में अगर रोज करेंगे तो आपके रिश्ते और मजबूत होंगे और आपसी प्रेम और बढ़ेगा।

भावनाओं को ना पहुंचाएं ठेस

बच्चे जब छोटे होते हैं तो पिता की यह जिम्मेदारी होती है कि वह उनकी सेहत का ध्यान रखें और उनकी हर छोटी से बड़ी ख्वाहिशों को पूरी करें ऐसे में जब बच्चे बड़े हो जाते हैं तो उनको भी अपने परिवार की जिम्मेदारियों को समझना चाहिए कई बार चिड़चिड़ापन में हम कुछ ऐसी बातें भूल जाते हैं जो पिता की भावनाओं को ठेस पहुंचा देती हैं ऐसे में मन में दुख और खटास पैदा होने लगती है अगर पिता कोई भी छोटे या गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं तो उनकी दवाओं से लेकर उनकी कसरत तक का ध्यान रखना बेटे या फिर बच्चों की जिम्मेदारी होती है। अगर आप ऐसा करते हैं तो आपके पिता को भी अहसास होगा कि उनके बच्चे उनका बेहतर ख्याल रख रहे हैं, इससे उनकी सेहत में भी सुधार होगा।

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अपने पिता से किसी बात को लेकर मतभेद न रखें और अगर मतभेद हैं तो उसे जल्द से जल्द दूर करने का प्रयास करें। चूंकि कई बच्चों की यह आदत होती है कि वो बोलने से पहले कुछ सोचते नहीं और अपने पिता को भी कुछ भी बोल जाते हैं। इससे उनकी भावनाएं आहत हो सकती हैं। इसलिए यह जरूरी है कि अगर उनसे विनम्रता से कोई भी बात कहें और उन्हें अपनी बात समझाने का प्रयास करें, क्योंकि उग्र होने से बात और बिगड़ सकती है।

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