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राजस्थान के गांव से उठ कर बॉलीवुड में हासिल किया बड़ा मुकाम, यहां जानें एक्टर इरफ़ान खान की कहानी !

पीकू, लंचबॉक्स, हिंदी मध्यम जैसी हिट मूवीज के लिए मशहूर अभिनेता इरफ़ान खान की ज़िन्दगी संघर्ष से भरी हुई थी। अभिनेता ने अपने अभिनय से सिर्फ दर्शको का ही नहीं, बल्कि हर उस इंसान का दिल जीता था जो इरफ़ान खान के साथ कभी रहे हो। इरफ़ान को किताबें पढ़ने का बहुत शौक था। वह अपना खाली वक़्त किताबों के साथ गुज़ारा करते थे। उनके लिए एक आम इंसान से बॉलीवुड के सितारे बनने का सफर आसान नहीं था। लेकिन उनकी इस प्रसिद्धि की वजह उनका संघर्ष ही रहा।

इरफ़ान खान खान का जन्म 7 जनवरी 1967, राजस्थान के जयपुर स्थित आमेरओड़ में हुआ था। वह एक साधारण मुस्लिम परिवार से ताल्लुक रखते थे। इरफ़ान खान के पिता अमीर जमींदार थे और उनका टायर का कारोबार था। वह चाहते थे कि उनका बेटा पारिवारिक व्यवसाय में लग जाये।

इरफ़ान खान हमेशा से ही क्रिकेटर बनना चाहते थे। लेकिन उनके माता-पिता को उनकी इस फैसले से संकोच था। अपनी एमए की डिग्री पूरी करते हुए ,उन्हें 1984 में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, नई दिल्ली में अध्ययन करने के लिए छात्रवृत्ति प्राप्त हुई। इसके बाद वह मुंबई चले गए. 1946 में उन्होंने “भारत एक खोज”, “सारे जहां हमारा”, “चाणक्य” जैसे कई टेलीविजन शो में अभिनय करने का मौका मिला । उन्हें “लाल घाट पर नीले घोड़े” में लेनिन की भूमिका के लिए भी बहुत प्रशंसा मिली।

इरफ़ान खान ने अपने एक्टिंग के करियर की शुरुआत 1988 में “सलाम बॉम्बे ” के साथ की। फिर 2005 में उन्हें उनकी पहली मुख्य भूमिका के लिए फिल्म “रोग” में हिस्सा लेने का मौका मिला। 2017 में उन्हें फिल्म हिंदी मीडियम के लिए बहुत प्रशंसा मिली।

इसमें कोई दो राय नहीं हैं कि इरफान खान ने अपनी मेहनत के दम पर बॉलीवुड में अपनी जगह बनाई। इरफ़ान खान को कई बड़े पुरस्कारों से भी सम्मानित किया गया। उन्हें 2017 में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए फिल्मफेयर पुरस्कार मिला। उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि टोरंटो फिल्म क्रिटिक्स एसोसिएशन अवार्ड रहा जो उन्हें “द लंचबॉक्स (2013)” के लिए मिला था। लंचबॉक्स भारत की एकमात्र ऐसी फिल्म है जिसे इस उपाधि से सम्मानित किया गया।

2015 में, उन्हें राजस्थान राज्य सरकार द्वारा पुनर्जीवित राजस्थान के लिए एक उत्पाद राजदूत के रूप में नियुक्त किया गया था। उन्हें पद्म श्री से भी सम्मानित किया गया था, जो कला के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए भारत का चौथा सर्वोच्च सामाजिक पुरस्कार है। 2012 में, उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। 2014 में, उन्होंने सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए एशियाई फिल्म पुरस्कार, तीन अंतर्राष्ट्रीय फिल्म अकादमी पुरस्कार और भी बहुत कुछ जीता।

इरफ़ान खान 29 अप्रैल, 2020 के दिन इस दुनिया को अलविदा कह गए। इरफ़ान खान भले ही अब इस दुनिया में न हो, लेकिन उनकी संघर्ष की कहानियाँ हर युवा को प्रेरणा देती हैं। इरफ़ान खान ने किसी भी मोड़ पर हार नहीं मानी, यही उनकी सफलता की वजह बनी।

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