कोरोना काल में जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था आईसीयू में चली गई है। अस्पताल में बेड नहीं बचे हैं। ऑक्सीजन का भी अकाल हो गया है। यहां ऑक्सीजन लगभग खत्म हो गई है। यदि सोमवार को सप्लाई नहीं होती है तो झांसी में हाहाकार मच जाएगा। 

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कोरोना वायरस की दूसरी लहर झांसी में जबरदस्त कहर बरपा रही है। मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इस कारण स्वास्थ्य व्यवस्था बेपटरी हो गई है। झांसी में प्रतिदिन 20 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की खपत है। रविवार को शाम तक मात्र दस मीट्रिक टन की उपलब्धता थी, जो कि सोमवार सुबह तड़के खत्म होने की संभावना है।

कोरोना काल के चलते जिले में ऑक्सीजन की खपत पांच गुना तक बढ़ गई है। ऑक्सीजन की कमी न हो इसके लिए अस्पताल प्रबंधन दिन में दो बार गाड़ी झांसी भेजकर सिलेंडर मंगवा रहा है। सिविल सर्जन डॉ. अमित चौधरी के अनुसार कोरोना के मरीज का ऑक्सीजन सेचुरेशन कम होने पर उसे सबसे पहले ऑक्सीजन ही दी जाती है। ऐसे में थैरेपी के लिए हाई फ्लो पर ऑक्सीजन की सप्लाई करना होती है। इसलिए कोरोना काल में रोजाना करीब 40 सिलेंडर की खपत हो रही है। उन्होंने बताया कि अगर गंभीर मरीज आ जाते हैं तो यह खपत और भी बढ़ जाती है। हालांकि कोरोना काल के पहले एसएनसीयू और ट्रामा वार्ड में ही ऑक्सीजन की जरूरत होती थी, तो दिन में 5-8 बड़े सिलेंडर लगते थे।

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 मेडिकल कॉलेज में ही उपलब्धता 
मेडिकल कॉलेज में लिक्विड प्लांट होने के कारण रोजाना हरियाणा से गाड़ी आ रही है। अस्पताल में लगभग दस हजार लीटर उपलब्ध है। जबकि, 24 घंटे में साढ़े नौ हजार लीटर खपत है। अधिकारियों का कहना है कि सोमवार को भी गाड़ी लेकर आएगी। 

कोविड-19 शुरू होने के बाद बढ़ी खपत
जिला अस्पताल में सिलेंडर की सबसे ज्यादा खपत एसएनसीयू (स्पेशल न्यू बोर्न केयर यूनिट) में होती है। इसके बाद जनरल वार्ड में भी ऑक्सीजन सिलेंडर की आवश्यकता बनी रहती है। कोरोना काल में कोविड वार्ड बनाए गए। जिले में अप्रैल महीने में कोरोना का पहला मरीज मिला, इसके बाद लगातार मरीज सामने आने के बाद इस वार्ड में भी ऑक्सीजन की खपत बड़ी। जिससे पहले 5-8 सिलेंडर लगते थे। आज यह खपत 40 सिलेंडरों तक पहुंच गई है।

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