ओला कैब्स ( Ola Cabs ) एक भारतीय बहुराष्ट्रीय राइड शेयरिंग कंपनी है । यह बेंगलुरु , कर्नाटक में स्थित है । इसकी शुरुआत 3 दिसंबर 2010 को भाविश अग्रवाल और अंकित भाटी द्वारा किया गया था । छोटे स्तर से शुरुआत कर आज ओला कैब्स का मूल्य लगभग 6.5 बिलियन डॉलर हो गया है । केवल दस सालों में ओला कैब्स ने इतनी तरक्की कर ली है की इसका नाम भारत के सबसे सफल और सबसे तेज स्टार्टअप्स‌ में आता है । ओला एक ऑनलाइन टैक्सी बुकिंग कम्पनी है जिसे लोग पहले ही दिए गए ऑनलाइन प्लैटफॉर्म के माध्यम से बुक कर सकते हैं । अपने कम दाम और अच्छी सुविधा उपलब्ध कराने की वजह से यह पूरे देश में छाया हुआ है ।

Ola Cabs

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भाविश अग्रवाल और अंकित भाटी का प्रारंभिक जीवन


भाविश अग्रवाल का जन्म पंजाब के लुधियाना में हुआ था । उन्होंने कंप्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग की डिग्री के साथ आई. आई. टी. बॉम्बे से स्नातक की उपाधि प्राप्त की थी । बाद में उन्होंने बैंगलोर के माइक्रोसॉफ्ट अनुसंधान में काम भी किया था लेकिन 2 वर्षो के बाद ही उन्होंने काम छोड़ दिया जिससे उनके माता पिता काफी निराश हुए थे । वह हमेशा से अपना खुद का कुछ शुरू करना चाहते थे इसलिए उन्होंने एक ऑनलाइन अवकाश और टूर प्लैनिंग सेवा शुरू की लेकिन वह कुछ ही समय तक चल पाई । वहीं अंकित भाटी ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक और आई. आई. टी. बॉम्बे से सी. ए. डी. और ऑटोमेशन में स्नातकोत्तर किया था । ओला कैब्स में शामिल होने से पहले उन्होंने कई स्टार्टअप कंपनियों जैसे क्यू. ई. डी. 42 , मेक सेंस और विलकॉम में काम किया था ।

ओला कैब्स की शुरुआत


ओला कैब्स जैसी सुविधा देश में लाने का विचार भाविश को तब आया जब वह 2010 में एक टैक्सी बुक कर बैंगलोर से बांदीपुर जा रहे थे । कुछ दूर निकल जाने के बाद टैक्सी ड्राइवर ने टैक्सी बीच रास्ते में ही रोक दी और तय किए गए भाड़े से और अधिक मांगने लगा । लेकिन , जब भाविश ने उसे अधिक पैसे देने से साफ इंकार कर दिया तब वह उन्हें बीच रास्ते में ही उतार कर चला गया ।

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इस अनुभव के बाद भाविश काफी परेशान हो गए थे और यह उनका सबसे ज्यादा खराब अनुभव था । तभी उन्हें इस बात का ख्याल आया की जैसे उन्हें टैक्सी से कहीं जाने में तकलीफ उठानी पड़ी वैसे ही और भी लोगों को ऐसी मुश्किलों का सामना करना पड़ता होगा । और यहीं से भाविश के मन में ओला कैब्स का विचार आया ताकि वह लोगों को ऐसी परेशानियों से बचा सकें ।
और जो चीज समाज के हित के लिए हो उसे लोग जरूर अपनाना पसंद करते हैं । उन्होंने अपने दोस्त अंकित भाटी को भी इस विचार के बारे में बताते हुए मदद मांगी और दोनो ने मिलकर कड़ी मेहनत से इसे शुरू किया । कुछ ही दिनों में उन्हें स्नैप डील के फाउंडर कुनाल बहल से सबसे पहला फंड्स द्वार मदद मिल गई । उन्होंने सर्विस उपलब्ध कराने का काम जीरो मॉडल गाड़ियों से की , वे खुद की नई गाड़ियां खरीद कर लगाने के बजाए थर्ड पार्टी गाड़ियों का इस्तेमाल करने लगे ।


और कोई भी व्यक्ति जिसकी गाड़ी को ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी से वैलिड परमिट मिली हो वह भी अपनी गाड़ी इसमें लगा सकता था ।
कैब को ऑनलाइन बुक कर सकने के लिए उन्होंने एक मोबाइल एप्लीकेशन को लॉन्च किया जिसका नाम “ओला कैब्स” रखा । इसकी मदद से लोग अपनी वर्तमान लोकेशन से ही जहां तक भी वह जाना चाहें वहां तक के लिए कैब बुक कर सकते हैं । इसमें ज्यादा पैसे मांगने का भी कोई चांस नहीं होता क्योंकि जो निर्धारित मूल्य होता है वह ड्राइवर और सवारी दोनो के मोबाइल पर दिखता है । जिससे की सवारी के साथ किसी भी प्रकार की धोखा धडी न हो । ऐसी ही कई सारी सुविधाएं ओला लोगो को उपलब्ध करवा रही है ।

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2017 में ओला ने फूड टेक कंपनी “फूड पांडा” को भी अधिग्रहीत किया जो अपने बिजनेस को बढ़ाने में पूरी तरह से असफल हो चुकी थी । आने वाले समय में ज़ोमैटो और स्विगी के तरह ओला भी फूड डिलीवरी में अपना कदम रख सकती है ।
भारत में कैब सर्विस का 60% हिस्सा ओला ने जमा लिया है । ओला ने ऑटो ट्रांसपोर्टेशन में भी अपना कारोबार बढ़ाया है । 2014 में बेंगलुरु में ट्रायल के आधार पर ऑटो सेवाओं की शुरुआत की । आज ओला ऑटो ने दिल्ली , पुणे , चेन्नई जैसे शहरों में अपनी सेवाओं का विस्तार किया है । मार्च 2015 में कम्पनी ने लगभग 200 मिलियन डॉलर में “टैक्सी फॉर स्यौर” को खरीदा ।
ओला कैब्स को टाइगर ग्लोबल मैनेजमेंट , मैट्रिक्स पार्टनर्स , स्टेडव्यू कैपिटल और सॉफ्ट बैंक इंटरनेट जैसी कम्पनियों से भी फंड्स उपलब्ध हो चुके हैं ।

भाविश अग्रवाल और अंकित भाटी भारतीय इंटरनेट उद्योग के प्रियों और सबसे काम उम्र के भारतीय अमीरों में से हैं । 2015 में उनकी व्यक्तिगत संपत्ति 2,385 करोड़ रुपए थी। भाविश अग्रवाल और अंकित भाटी लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा हैं। भाविश ओला कैब्स का सार्वजनिक चेहरा हैं जो ग्राहक और साझेदार संबंधों का प्रबंध करते हैं जबकि अंकित कंपनी के तकनीकी पहलुओं की देखभाल करते हैं ।
इन दोनो का मानना है की ओला कैब्स न केवल ग्राहकों को विश्वसनीय और प्रौद्योगिकी आधारित कैब सेवाएं प्रदान कर रही है , बल्कि उद्यमी बनने में भारत के शहरों में हजारों ड्राइवरों की मदद भी कर रही है ।
ओला कैब ने अपने ग्राहकों के साथ साथ अपने चालकों का भी ध्यान रखा है । जो चालक ओला कैब से जुड़े हैं वे अपने बच्चों को कक्षा 9 वीं और 10 वीं में अध्ययन केंद्रों में पढ़ा सकते हैं वह भी मुफ्त में । शीर्ष प्रदर्शन करने वाले छात्रों को मुफ्त स्टेशनरी , किताबें और अन्य आवश्यक चीज़ें प्रदान करने के लिए ओला गुरुकुल मुंबई में एक बैच की शुरुआत करेगा ।

सम्मान

  1. इन्हे “म्बिलियंथ अवार्ड साउथ एशिया 2013” से सम्मानित भी किया गया है ।
  2. आई. ए. एम. ए. आई. द्वारा “वर्ष का सर्वश्रेष्ठ स्टार्टअप” के रूप में भी सम्मानित किया गया ।
  3. उन्हें हिंदुस्तान टाइम्स और फोर्ब्स के तरफ से अंडर 30 लिस्ट में “एच. ए. टी. टी. अवार्ड” से सम्मानित किया जा चुका है ।

भाविश का कहना है की सिर्फ अच्छे विचार होने से ही आप कुछ हासिल नहीं कर सकते जब तक आपको उस विचार को अच्छे से एक्जीक्यूट करना न आए ।

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