कठिन संघर्षों और मुस्किलों का सामना करने के बाद ही कोई भी इंसान आसमान की ऊंचाइयों को छू सकता है । मुश्किलों का सामना करने के लिए इंसान के पास सच्ची लगन , मेहनत और मन के विश्वास होना चाहिए । यह कहानी एक ऐसे ही व्यक्ति की है जिन्होंने अपनी सच्ची लगन से अपने सपने को पूरा कर दिखाया और किसी भी तरह की कठिनाइयों को अपने रह में बाधा नहीं बनने दिया । मुकेश मिकी जगतियनी ( Mickey Gajtiani ) दुबई में स्थित एक भारतीय मूल के बिजनेस टायकून हैं ।

वह अपनी छोटी सी दुकान को रिटेल आउटलेट की विशाल श्रृंखला में बदलकर एक अरबपति बन गए हैं । एक कॉलेज ड्रॉपआउट मुकेश ने अपने लैंडमार्क ग्रुप की स्थापना की , वर्तमान में जिसका मुख्यालय दुबई में है । अपनी मेहनत से मुकेश अब दुनिया के सबसे धनी व्यक्तियों में से एक हैं और फोर्ब्स की सूची में अपना नाम बना रहे हैं । दुबई के बेस्ट रिटेल चेन लैंडमार्क के ओनर और चेयरमैन मुकेश मिकी गजतियानी ( Mickey Gajtiani ) भले ही आज हजारों करोड़ों की कंपनी चलाते हों , लेकिन एक समय ऐसा भी था जब उन्हें टैक्सी चालक के रूप में काम करना पड़ा था । जीवन में आने वाली इन मुश्किलों से उन्होंने हार नहीं मानी , बल्कि उन्हें अपनी ताकत बनाते हुए खुद की अलग पहचान बनाई है ।

Mickey Gajtiani

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प्रारंभिक जीवन

15 अगस्त 1952 को मुकेश का जन्म कुवैत में हुआ । उनके पिता जी एक छोटे व्यवसायी थे । उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा मद्रास , मुंबई और बेरुत से पूरी की थी । बाद में वह लंदन चले गए जहां उन्होंने अकाउंटिंग स्कूल से पढ़ाई की । मुकेश का मन अपना स्टार्ट अप शुरू करने का था इसलिए उन्होंने पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी । लेकिन आत्म संदेह और चिंताओं में अनुभव की कमी से त्रस्त मुकेश ने अपने शुरुआती दिनों में बहुत संघर्ष किया , और यहां तक की जीवित रहने के लिए टैक्सी ड्राइवर और होटल में क्लीनर के रूप में भी काम किया । इतना कुछ करने के बाद जब उन्हें कुछ हासिल नहीं हुआ तो वह वापस घर लौट गए लेकिन कुछ ही समय बाद बीमारी के कारण उनके माता पिता की मृत्यु हो गई ।

लैंडमार्क ग्रुप की शुरुआत

21 साल की उम्र में ही मुकेश बिना किसे माता पिता , नौकरी , और डिग्री के एकदम अकेले पड़ गए थे । 1972 में अपने करियर की शुरुआत करने के लिए वे अपने पारिवारिक व्यवसाय में ही लग गए । वह बच्चों के कपड़े , खिलौने आदि बेचने का काम करते थे । धीरे धीरे उनकी मेहनत और लगन से उनका कारोबार बढ़ने लगा था और 1973 में उन्होंने एक स्टोर खरीदा जिसका नाम उन्होंने “बेबी शॉप” रखा । 1992 तक उनकी इस स्टोर के 6 और ब्रांच खुल गए थे और 400 कर्मचारियों के साथ एक लैंडमार्क ग्रुप बन गया था । जब खाड़ी युद्ध शुरू हुआ , तो उन्होंने अपने खुदरा व्यापार को दुबई में स्थानांतरित करने की योजना बनाई और अपने परिवार मतलब अपनी बीवी और बच्चों के साथ वहां रहने लगे । दुबई में मुकेश ने अपने लैंडमार्क समूह की स्थापना की , जो बाद में मध्य पूर्व अफ्रीका और भारत में फैल गया । बच्चों के लिए कपड़े और खिलौने बेचने से मुकेश ने फैशन , इलेक्ट्रॉनिक्स , फर्नीचर और होटल उद्योग में भी काम शुरू किया । मुकेश ने सस्ती फैशन लाइन स्प्लैश भी शुरू किया जो की उनकी पत्नी रेणुका द्वारा संभाला जाता है ।

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उनके निगम के अंतर्गत अब 2,200 से अधिक आउटलेट हैं जिसमे हजारों कर्मचारी काम करते हैं । उनकी कंपनी अब और बड़ी होती जा रही है बहुत जल्द ही वह अबूधाबी के आलीशान रिम मॉल और ओमान के मस्कट ग्रैंड मॉल में भी अपने स्टोर की स्थापना करने वाले हैं । उनकी पत्नी लैंडमार्क इंटरनेशनल की प्रभारी हैं , जो विशेष उद्यमों का प्रभार लेती हैं । उन्होंने यू. के. के न्यू लुक रीस , आफ्टरशॉक और तुर्की के फैशन ब्रांड कोटोन के रूप में अंतराष्ट्रीय फैशन ब्रांडों के लिए अधिकार खरीद कर निगम के विकास में एक प्रमुख भूमिका निभाती हैं ।


हाल ही में फोर्ब्स के आंकड़ों के अनुसार मुकेश की कुल संपत्ति 4.4 बिलियन डॉलर थी जो उन्हें दुनिया के अरबपतियों की सूची में 200 वें स्थान पर रखती है 2008 में मुकेश एक मॉल डेवलपर और अध्यक्ष , लैंडमार्क इंटरनेशनल दुबई स्थित खुदरा समूह ने ब्रिटेन की उच्च सड़क रिटेलर डेबेनहैम्स में 6% की हिस्सेदारी खरीदी और अरबपतियों की सूची में प्रवेश कर भारत के 10 वें सबसे अमीर भारतीय बने । मुकेश एक ऐसे अरबपति हैं जो अपने व्यापारिक साम्राज्य का विस्तार पर्शियन की खाड़ी से चीन तक कर रहे हैं ।तीसरे वार्षिक खुदरा मध्य पूर्व 2007 पुरस्कारों में मुकेश मिकी जगतियानी को रिटेल पर्सनेलिटी ऑफ द ईयर से सम्मानित किया जा चुका है ।

मुकेश न केवल पैसों से अमीर हैं , बल्कि दिल से भी उतने ही समृद्ध हैं । साल 2000 में उन्होंने लाइफ जिसका पूरा मतलब लैंडमार्क इंटरनेशनल फाउंडेशन फॉर एंपावरमेंट है , से एक धर्मार्थ संगठन का गठन किया । यह संगठन भारत में एक लाख से अधिक वंचित बच्चों को शैक्षिक और चिकित्सा आवस्यकताओं की देखभाल कर रहा है । गैर लाभकारी पहल उन्हें व्यवसायिक प्रशिक्षण और गैर औपचारिक स्कूली शिक्षा भी प्रदान करती है । लाइफ संगठन चेन्नई में झुग्गी झोपड़ी और वृद्धाश्रम के लिए कई सामुदायिक क्लिनिक चलती है ।

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जीवन हमेशा कठिनाइयों और चुनौतियों से भरा होता है । आप जीवन की इन कठिनाइयों तले दब सकते हैं या मुकेश जगतियानी जैसी स्थिति को जन्म दे सकते हैं यह आप पर निर्भर करता है । मुकेश ने न केवल खुद के लिए बल्कि अपने आसपास के लोगों के लिए और अपने देश के लिए भी बहुत कुछ बनाया है । एक व्यक्ति की यह यात्रा जो एक बार दैनिक आवयकताओं के लिए संघर्ष करती है और वहां से एक व्यापारिक साम्राज्य का निर्माण करने के लिए चली गई , हमे बहुत ही आश्चर्य चकित करने वाली है । मुकेश ने एक सरल प्रक्रिया का पालन किया है , उन्होंने वहीं से शुरू किया जहां वह थे । अपने निपटान में उनके पास जो भी संसाधन थे उनका उन्होंने दोहन किया और वह सब कुछ किया जो वह कर सकते थे । यह सफलता का एक सरल दर्शन है । हमें छोटे लक्ष्य बनाने चाहिए और समय के साथ वे स्वयं बड़ी चीजों में विकसित हो जायेंगे । जब तक चीज़ें आपकी चाह के अनुसार न हो , तब तक उसे करते रहना चाहिए ।

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