अपने विचारों को अपना सपना बनाना और उसपे काम करना तो हर कोई चाहता है मगर उस पर काम करना हर किसी को नहीं आता । ऐसी ही एक कहानी है प्रफुल्ल बिलोर की जो की MBA चायवाला ( MBA Chaiwala ) के ओनर और सी. ई. ओ. हैं । प्रफुल्ल आज पूरे देश में प्रसिद्ध हैं केवल अपने इस यूनिक नाम “MBA चायवाला”( MBA Chaiwala ) के कारण । मात्र 8000 रुपए से शुरुआत कर आज उन्होंने अपने बिजनेस के कारोबार को करोड़ों तक पहुंचाया दिया है । और यूथ के लिए एक प्रेरणा का श्रोत भी बन गए हैं । लोग इनके इस यूनिक बिजनेस नाम को काफी पसंद भी करते हैं । लक्ष्य का रास्ता जितना सरल लगता है उतना होता नही है । उस रास्ते में बहुत से उतार चढ़ाव आते हैं लेकिन जरूरत है तो बस एक आत्म अनुशासन की और सच्चाई की ।

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MBA Chaiwala

प्रारंभिक जीवन

प्रफुल्ल मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के एक मध्यवर्गीय परिवार से आते हैं । एक आम आदमी के तरह प्रफुल्ल के पिता जी भी चाहते थे की उनका बेटा CAT की परीक्षा क्लियर कर किसी अच्छे और बड़े नाम वाले कॉलेज से MBA की पढ़ाई करे । जिससे उनके बेटे को एक अच्छी तंख्या वाली नौकरी मिले । पिता जी के सपने को अपना सपना मान वे भी रोज 8–10 घंटे की पढ़ाई कर CAT की तैयारी में लगे हुए थे । लेकिन यह उनका दुर्भाग्य था की लगातार 3 साल के कड़ी मेहनत के बावजूद वे CAT की परीक्षा क्लियर नही कर पाए और पूरी तरह से टूट गए ।
इसके बाद वह कुछ करने के लिए कई शहर जैसे बैंगलोर , चेन्नई , हैदराबाद , मुंबई , गुड़गांव आदि में भटकते रहे ।

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अहमदाबाद पहुंचाने के बाद उन्हें ऐसा लगा की अब भटकने से कुछ नही होगा उन्हे कुछ काम शुरू कर देना चाहिए इसलिए वह अहमदाबाद में ही एक मैकडोनाल्ड्स में काम करने लगे जिसके उन्हें 37 रुपए प्रति घंटे के हिसाब से मिलने लगे थे ।
उन्होंने यह बात घर पर अपने पिताजी से छुपा कर रखी और उन्हे यह झूठ बोल दिया की उनका एडमिशन MBA में हो गया है और वह वहां पढ़ाई कर रहे हैं । अपने पिताजी झूठ बोलने वाली बात उन्हे अंदर ही अंदर खाने लगी थी इसलिए उन्हें अहमदाबाद के ही एक प्राइवेट कॉलेज से MBA करना शुरू कर दिया था ।
अब वह पढ़ाई के साथ साथ मैकडोनाल्ड्स में नौकरी करने लगे थे जिससे उन्हें कॉस्ट्यूम से बात करने का तरीका और बिजनेस स्किल्स अच्छी तरीके से आ गया था ।

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MBA चायवाला की शुरूआत

बिजनेस स्किल्स सीखने के बाद उनके मन में खुद का कोई बिजनेस शुरू करने का विचार आया लेकिन वह यह समझ नही पा रहे थे की वे किस चीज का बिजनेस करें । फिर उन्हें चाय का बिजनेस करने का खयाल आया क्योंकि उन्हें चाय से बहुत लगाव था और CAT की तैयारी के समय एक चाय ही थी जो उनको हिम्मत देती थी ।


पैसों की कमी के चलते उन्होंने रोड किनारे ही चाय का छोटा सा ठेला लगाना शुरू किया । उन्होंने अपने पिताजी से झूठ बोल के 15 हजार रुपए मांगे फिर बर्तन जैसी बाकी वस्तुओं को इक्कठा करना शुरू कर दिया ।

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दिक्कत उनके लिए तब आई जब उन्हें दूसरों के लिए चाय बनाना पड़ा उस समय तक उन्होंने कभी खुद के लिए भी चाय नहीं बनी थी । उनके बिजनेस का पहला दिन उनके लिए बहुत खराब बीता था । उनके पास सिर्फ एक ही कस्टमर आया था । लेकिन वे निराश होने के बजाए अपने ग्राहकों को अपने पास बुलाने के तरीके सोचने लगे और दूसरे दिन उन्होंने 150 रुपए कमाए । सुबह के 9 से 6 वह मैकडोनाल्ड्स में काम करते और रात के 7 से 11 वह सड़क किनारे चाय बेचते ।


अपने ग्राहकों को बनाए रखने के लिए वे बड़े ही विनम्र भाव से उनसे बातें करते और यहां तक की वह उनसे अंग्रेजी भी बातें करते ।
एक चाय वाले को अंग्रेजी आती है यह देख के बाकी ग्राहकों को आश्चर्य होता की वह इतना शिक्षित होने के बावजूद चाय क्यों बेच रहा है । धीरे धीरे उनके ग्राहक बढ़ने लगे और उनकी रोज़ की कमाई भी एक दिन 600 , दूसरे दिन 1200 , तीसरे दिन 4000 तो चौथे दिन 5000 रुपया बढ़ने लगी थी ।

कठिनाइयां

बिजनेस बढ़ता देख उन्हे बहुत खुशी होती और वह अपना पूरा ध्यान उसी पर लगाते थे लेकिन उनके वजह से बाकी चायवालों का धंधा खराब होने लगा था । इसलिए उन लोगों ने उन्हें वहां से भागने का फैसला किया । कड़ी मेहनत करके उन्होंने जो ज्राहक बनाए थे उन्हे छोड़ नई जगह की तलाश मे निकल पड़े ।


काफी खोजबीन के बाद उन्हें एक हॉस्पिटल के पास छोटी सी दुकान भाड़े पर मिल गई जिसके उन्हें 10,000 प्रति माह चुकाने होते थे । इस बार उन्होंने अपने दुकान का नाम “MBA चायवाला” रखा जिसका मतलब है “मिस्टर बिलोरे अहमदाबाद चायवाला” और वह MBA के छात्र भी रह चुके हैं । पिछली बार के हादसे को अपनी सिख बना कर उन्होंने इस बार एक अच्छा सा नाम रखने का फैसला किया था जो की आज तक किसी और ने ना रखा था ।
उन्होंने अपनी दुकान के एक कोने में ऐसी जगह बनाई जहां उन्होंने एक सफेद बोर्ड लगा दिया था जिसे कोई भी बेरोजाग आप नाम , पता , योग्यता और फोन नंबर छोड़ जाते थे और नौकरी देने वाले बाद में उन्हें कॉन्टैक्ट कर लेते । अपने दुकान का नाम बढ़ाने का यह सबसे अच्छा तरीका था । इसकी मदद से कई लोगों को नौकरी भी मिली और प्रफुल्ल के दुकान की मार्केटिंग भी हो जाती । कई बार लोग ऐसा अजीब नाम रखने पर उनका मजाक भी उड़ते थे लेकिन उन्होंने इन सारी बातों को नजर अंदाज कर दिया और मेहनत और लगन से अपने काम में लगे रहे ।

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कुछ सालों में MBA चायवाला इतना मशहूर हो गया था की लोग उन्हें स्थानीय कार्यक्रमों , म्यूजिकल नाइट , महिला सशक्तिकरण , उद्यमिता प्रोग्राम , साजिक कारण और प्राकृतिक आपदाएं जैसी जगहों पर निमंत्रण मिलने लगे थे । उन्होंने कई इवेंट भी करने शुरू कर दिए थे । 2 साल में उन्होंने कुल 200 इवेंट किए थे ।

अब वह बड़े बड़े कॉलेज में जा कर छात्रों से मिलते हैं और उन्हें अपनी कहानी सुना कर उनको अपने सपने को पूरा करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं ।
MBA चायवाला अब काफी फैल चुका है , एक इंसान से शुरू हुई इस बिजनेस को अब 35 लोग मिल कर चलाते हैं । “अगर आप किसी काम को पूरा करने के लिए निर्धारित हो जाते है तो आपके लिए कुछ भी असंभव नहीं होता” प्रफुल्ल बिलौर इस बात का एक उत्तम उदाहरण हैं ।

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