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हुनर से नहीं सिर्फ पैसों से गरीब थे अभिनेता मनोज बाजपाई

जो कच्चे मकानों में जन्म लेते हैं , वही ऊंची मीनारों को जन्म देते हैं । ये कहानी है फिल्म जगत में अपने वास्तविक अभिनय से सबको प्रभावित करने वाले अभिनेता मनोज बाजपाई की । मनोज बाजपाई ने अपने मेहनत और संघर्ष के दम पर यह दिखा दिया की इस दुनिया में कुछ भी नामुमकिन नहीं है । एक गरीब किसान के घर पैदा होने के बाद पूरा बचपन और जवानी परेशानियों में गुजारने वाले मनोज बाजपाई ने आज फिल्म जगत में अपनी एक अलग पहचान बना ली है । वह तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार , चार फिल्मफेयर पुरस्कार और दो एशिया प्रशांत स्क्रीन पुरस्कार प्राप्तकर्ता हैं । वर्ष 2019 में , कला में उनके योगदान के लिए उन्हे भारत के चौथे सबसे बड़े नागरिक सम्मान , पद्म श्री से भी सम्मानित किया गया था ।

प्रारंभिक जीवन
मनोज बाजपाई का जन्म 23 अप्रैल , 1969 को बिहार के बेलवा नाम के एक गांव में हुआ था । उनके पिता का नाम राधाकांत बाजपाई है , जो की अपने परिवार के पालन पोषण के लिए पूरी तरह से खेती बाड़ी पर ही निर्भर थे । मनोज का नाम एक दिग्गज अभिनेता मनोज कुमार के नाम पर रखा गया था क्योंकि उनके पिता मनोज कुमार के बहुत बड़े प्रशंसक थे । जिस तरह से मनोज बाजपाई का नाम रखा गया था उसी तरह से उन्हे अभिनय का शौख भी बचपन से ही लग गया था ।

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हालांकि मनोज का बचपन बहुत ही ज्यादा गरीबी में बीता था और यहां तक की उनके पिता के पास उन्हे पढ़ने के लिए पर्याप्त पैसे भी नहीं थे । इसलिए मनोज ने अपनी शुरुआती पढ़ाई गांव के ही एक सरकारी स्कूल से की थी । लेकिन मनोज बाजपाई के पिता यह अच्छे से जानते थे की अगर उनके बेटे को खेती बाड़ी से हट कर कुछ और काम करना है तो उसके लिए सबसे ज्यादा जरूरी चीज पढ़ाई ही है । इसलिए उन्होंने दूसरों से पैसे कर्ज ले कर मनोज की पढ़ाई को कभी रुकने नहीं दिया । मनोज ने अपनी 12 वीं की पढ़ाई महारानी जानकी कॉलेज से पूरी की । उस समय मनोज 17 वर्ष के हो गए थे और उन्होंने दिल्ली जा कर अपने कॉलेज की पढ़ाई को पूरा करने का फैसला किया ।

दिल्ली जा कर उन्होंने रामजस कॉलेज से अपनी पढ़ाई शुरू कर दी थी । कॉलेज में पढ़ाई के दौरान ही उनके अंदर छुपे अभिनेता ने पहचान बननी शुरू की और उन्हें कॉलेज थिएटर का एक एहम सदस्य बनने में ज्यादा समय भी नहीं लगा । जैसे जैसे उनका अनुभव बढ़ा , उन्हे यह पता लग गया की अगर भारतीय फिल्म जगत में काम पाना है तो उसके लिए उन्हें बहुत ही कड़ी मेहनत करनी होगी । अपने आपको फिल्म जगत के लायक बनाने के लिए मनोज ने नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा में दाखिला लेने का विचार किया ।

हालांकि वहां पर एडमिशन के लिए उन्होंने तीन बार अपना प्रार्थना पत्र दिया लेकिन इसके बावजूद उन्हे हर बार अस्वीकार कर दिया गया था । उस दौरान बार बार न कामयाबी की वजह से उनके हौसले टूटने भी लगे थे और एक बार के लिए उनके मन में आत्महत्या करने का विचार भी आ गया था । उस समय में उनके दोस्त रघुबीर यादव ने उन्हे सलाह दी की अगर उन्हें नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा में नहीं लिया जा रहा है तो वह बैरी जॉन की एक्टिंग वर्कशॉप के लिए कोशिश करें ।

दोस्त की सलाह पर जब मनोज बैरी जॉन से मिले , तब बैरी जॉन उनसे इतने ज्यादा प्रभावित हुए की उन्होंने मनोज को एक विद्यार्थी के तौर पर नहीं बल्कि दूसरे लोगों को अभिनय सिखाने में उनकी मदद के लिए रख लिया । कुछ समय तक वहां काम करने के बाद मनोज बाजपाई ने एक बार फिर नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा में प्रार्थना पत्र लिखा लेकिन इस बार यह प्रार्थना पत्र बतौर प्रत्याशी नहीं बल्कि एक अध्यापक के लिए था और तब तक नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा भी उनके हुनर के बारे में जान चुका था । इसलिए इस बार उन्होंने मनोज बाजपाई को अपने टीम में शामिल करने में थोड़ी भी देरी नहीं की ।

बॉलीवुड में एक सफल करियर की शुरुआत
ऐसे ही बहुत जल्द मनोज दिल्ली के थिएटर सर्किल का एक जाना माना चेहरा बन चुके थे । उनके शानदार प्रदर्शन के देखते हुए ही उस समय के एक कास्टिंग निर्देशक तिग्मांशु धुलिया ने शेखर कपूर की फिल्म “बैंडेड क्वीन” के लिए मनोज की सिफारिश की । इस फिल्म में काम करते हुए मनोज बाजपाई ने मान सिंह नाम के डाकू का किरदार निभाया था । एक बार फिल्म जगत में काम मिलने के बाद वर्ष 1994 में मनोज पूरी तरह से मुंबई जा कर बस गए । वहां बस जाने के बाद उन्होंने कई सारे टेलीविजन शोज और फिल्मों में बहुत ही छोटे छोटे किरदार निभाए , लेकिन वह किरदार उनके प्रतिभा के हिसाब से सही नहीं थे ।

फिल्म इंडस्ट्री में आने के बाद भी उन्हें बहुत ही संघर्ष भरे दिन देखने पड़े थे । हालांकि जल्द ही मनोज बाजपाई के दिन बदलने वाले थे क्योंकि राम गोपाल वर्मा ने वर्ष 1998 की फिल्म “सत्या” के लिए उन्हे चुन लिए था । यह फिल्म इतनी बड़ी हिट साबित हुई की उसके बाद मनोज बॉलीवुड के बड़े बड़े फिल्म निर्देशकों के नजरों में आने लगे थे ।
ये फिल्म मनोज के जीवन का टर्निंग प्वाइंट बन कर सामने आया था क्योंकि इसके बाद से उन्हे लगातार “अक्स” , “पिंजर” , “एलओसी कारगिल” , “राजनीति” , “आरक्षण” , “गैंग्स ऑफ वासेपुर” , “स्पेशल 26” , “अलीगढ़” और “सत्यमेव जयते” की तरह ही और भी बहुत सारी फिल्मों में काम मिलता गया । बीतते समय के साथ मनोज बाजपाई ने हमारे बीच अपने आपको एक वास्तविक किरदार निभाने वाले अभिनेता के तौर पर साबित कर दिया । मनोज बाजपाई ने वर्ष 2006 में सबाना रजा नाम की अभिनेत्री से शादी की , जिन्हे हम नेहा के नाम से भी जानते हैं और नेहा से मनोज बाजपाई को एक बेटी भी है ।

सम्मान
“सत्या” फिल्म में किए गए शानदार अभिनय के लिए मनोज बाजपाई को नेशनल फिल्म अवार्ड फॉर बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर और फिल्मफेयर क्रिटिक्स अवार्ड फॉर बेस्ट एक्टर का सम्मान मिला था । मनोज बाजपेयी ने “पिंजर” फिल्म के लिए विशेष जूरी राष्ट्रीय पुरस्कार जीता था ।

वर्ष 2016 में , उन्होंने हंसल मेहता की जीवनी नाटक “अलीगढ़” में प्रोफेसर रामचंद्र सिरस को चित्रित किया था , जिसके लिए उन्होंने एशिया पैसिफिक स्क्रीन अवार्ड्स में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए अपना तीसरा फिल्मफेयर क्रिटिक्स अवार्ड और सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार जीता था । उन्होंने फिल्म “भोंसले” में अपने प्रदर्शन के लिए 67 वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीता था । मनोज बाजपाई ने अभी तक अपनी जिंदगी में जो भी मुकाम पाया है वह अपने और अपने परिवार के सहयोग के बलबूते पर ही पाया है । उनका एक गरीब किसान के घर पैदा होने से लेकर फिल्म जगत में एक अलग पहचान बनाने तक का सफर काफी प्रेरणा दायक है ।

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