तीन बार लखनऊ के महापौर और एक बार एमएलसी रहे दाऊजी गुप्ता का रविवार को निधन हो गया। स्वतंत्रता सेनानी दाऊजी गुप्ता ने कोरोना वैक्सीन की दूसरी डोज तीन अप्रैल को लगवाई थी। लेकिन टीके लगवाने के बाद वह कोरोना संक्रमित हो गए थे, लेकिन उसके बाद उनकी रिपोर्ट निगेटिव आई थी। हालांकि कमजोरी और शुगर का स्तर बढ़ गया। इसके बाद रविवार को उन्हें केजीएमयू ले जाया गया जहां करीब पौने तीन बजे उनका निधन हो गया।

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अटल के सखा दाऊ भी छोड़ गए लखनऊ का साथ
पिछले वर्ष लालजी टंडन गए। पिछले महीने योगेश प्रवीन गए और अब राजधानी के तीन बार मेयर रहे राजनेता और समाजसेवी डॉ. दाऊजी गुप्ता भी लखनऊ का साथ छोड़ गए। रविवार अपराह्न लगभग पौने तीन बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। इसी के साथ लखनऊ वालों से हमेशा के लिए छिन गया छोटे कद लेकिन विराट व्यक्तित्व वाला चलता फिरता ज्ञानकोष, जिसकी उपलब्धियों को शब्दों में समेटना बहुत मुश्किल है।  

शालीन और शिष्ट तथा सौम्य सियासी किरदार। विदेशों में हिंदी पर काम। बौद्ध दर्शन के विद्वान। कई भाषाओं के जानकार। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, लोकतंत्र सेनानी, पूर्व एमएलसी, कवि और राजनेता के साथ सामाजिक कार्यकर्ता तथा गोवा मुक्ति संग्राम में भागीदारी तथा अमेरिका की ‘यूनिवर्सिटी ऑफ न्यूयार्क’ तथा ‘यूनिवर्सिटी ऑफ मेरीलैंड’ में अध्यापन।

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पिछड़ों को अधिकार दिलाने के लिए संघर्ष करने वाले सामाजिक योद्धा और भी बहुत कुछ। कांग्रेस के साथ राजनीतिक यात्रा शुरू की। इंदिरा गांधी से मतभेद हुआ तो चंद्रभानु गुप्त के साथ कांग्रेस से अलग हो गए। कांग्रेस में लौटे लेकिन आपातकाल विरोधी आंदोलन में जेल भेज दिए गए। कुछ वक्त के लिए बसपा में भी रहे। लेकिन दलों में रहते हुए भी उनकी शख्सियत कभी दलगत सीमा में बंधी नहीं रही।

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