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जानें खो-खो खेल के नियम और जानकारी 

खो-खो भारत का लोकप्रिय खेल है प्राचीन समय में यह खेल महाराष्ट्र में रथ (Chariot) पर खेला जाता था, जिस कारण इसको ‘रथेडा’ के नाम से जाना जाता था। खो-खो खेल के नियम बीसवीं शताब्दी के आरंभ में बनाए गए थे। भारत में खो – खो की प्रथम स्पर्धा सन 1914 में आयोजित की गई थी।

भारत में खो – खो को नियंत्रित करने वाली संस्था ‘खो-खो फेडरेशन आफ इंडिया’ है। ये एक टैग टीम गेम है। इस खेल का आविष्कार भारत में हुआ है। खो -खो एक पारम्परिक खेल जो स्कूलों का काफी पसंदिता खेल है। पहले बार इस खेल को 1949 को स्वीडन और डेनमार्क में प्रदशित किया गया।

भारत में पहली बार खो – खो फेडरेशन ऑफ़ इंडिया (K.K.F.I.) की स्थापना 1956 में की गई। तथा फेडरेशन की स्थपना के पश्चात पहली नैशनल खो -खो चैम्पयनशिप का आयोजन 1959 -60 में आन्ध्रप्रदेश में किया गया।

तथा 1982 में पहले बार खो – खो को पहली बार एशियाई खेलो में डेमो के रूप में शामिल किया गया। इसे समय खो -खो फेडरेशन ऑफ़ इंडिया (K.K.F.I.) ने फेडरेशन कप के रूप में एक चैंपियनशिप का आयोजन किया। इस खेल को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर लाने के लिय ‘अंतर्राष्ट्रीय खो -खो फेडरेशन का निर्माण किया गया।

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खो-खो खेल के  नियम 

पहले खो-खो में कोई नियम नहीं थे, सबसे पहला नियम पुणे के डेक्कन जिमखाना के संस्थापक लोकमान्य तिलक द्वारा बनाया गया था। जिसमें मैदान में खेल को खेलने की सीमा को निश्चित किया गया था। वर्ष 1919 में खो-खो को 44 गज लंबी मध्य रेखा और 17 गज चौड़ाई में दीर्घवृत्तीय क्षेत्र में परिवर्तित किया गया। वहीं 1923-24 में इंटर स्कूल स्पोर्ट्स ऑर्गेनाइजेशन की नींव रखी गई थी और खो-खो को पेश किया गया था।

पिछ्ले कई वर्षों में खेल के नियमों में कई बदलाव आए हैं। 1914 में प्रारंभिक प्रणाली में प्रत्येक प्रतिदुंदी को बाहर निकलने के लिए 10 अंक मिलते थे तथा समय निर्धारित होता था। वहीं 1919 में 5 अंक कर दिए गए और खेल को आठ मिनट तक कर दिया गया। यदि पूरी टीम समय से पहले ही रन बना लेती है, तो पीछे भागने वाले को हर उस मिनट के लिए 5 अंक का बोनस आवंटित किया जाता है। अन्य बदलाव खेल के मैदान में किए गए थे जैसे इसे दीर्घ वृत्ताकार से आयताकार में बदल दिया गया था। वहीं दो खंबों के बीच की दूरी को 27 गज तक छोटा कर दिया गया था और प्रत्येक खंबो से बाहर 27 गज x 5 गज की दूरी पर ‘डी’ जोन को बनाया गया था।

  • इसमें 17 खिलाडी भाग ले सकते है।
  • जिनमे से 9 खिलाडी मैदान में उतारते है।
  • जो अपने घुट्नु के बल शिधि पंक्ति में बैठते है।
  • तथा दूसरी टीम के तीन खिलाडी उनसे बचने के लिय जो सीधी लाइन में बैठे खिलाडी की पंक्ति में से ज़िक -जैक रन करते है।
  • इस खेल दो परियो में खेला जाता है।
  • इस में एक समय में तीन धावक भाग लेते है तथा जो टीम सबसे कम समय लेती वो हे वह विजेता टीम होती है।
  • मैदान के कार्नर पर दोनों तरफ एक खम्बा होता है।
  • धावक को सीधी कतार में बैठे खिलाड़ी के बिच से जाने की अनुमति नहीं होती है, पीछे मुड़ने की लकिन दूसरे पक्ष के खिलाडी बिच में से निकल सकते है। और पीछे गुमके दूसरी तरफ जा सकते है।
  • दोनों टीमों का निरन्य टॉस के द्वारा किया जाता है, जो टीम टॉस विजयता होती है।
  • और अपना पक्ष चुनती है उसे बचाव दल में भाग लेना है या धावक पक्ष में।
  • एक पारी का समय 9 मिनट का होता है।
  • जिस पक्ष के ज्यादा स्कोर होता है, वो विजयता होता है।\

खो-खो का मैदान / Playground of Kho-Kho

खो-खो के मैदान की लंबाई 29 मीटर और चौड़ाई 16 मीटर होती है। मैदान के अंत में 16 मीटर × 2.75 मीटर के दो आयताकार होते हैं। मैदान के बीच में 23.50 मीटर लंबी और 30 सेंटीमीटर चौड़ी पट्टी होती है पार्टी के प्रत्येक सिरे पर लकड़ी का पोल होता है  इसमें 30 C.M. × 30 C.M. के 8 वर्ग होते हैं।

स्तंभ या पोस्ट 

मध्य रेखा के अंत में दो स्तंभ गाड़े जाते है। इनकी जमीन से ऊंचाई 1.20 मीटर होती है। स्तंभ का घेरा नीचे से 40 सेंटीमीटर ओर ऊपर की ओर कम होकर 30 सेंटीमीटर रह  जाता है।

क्रॉस – लेन / Cross-Lane

प्रत्येक आयताकार की लंबाई 16 मीटर चौड़ाई 30 सेंटीमीटर होती है। यह केंद्र रेखा को समकोण अथार्त 90 डिग्री पर काटती है। यह स्वंय भी दो अध्दर्क में बंटा होता है। क्रॉस – लेन के काटने पर बने 30 सेंटीमीटर × 30 सेंटीमीटर के क्षेत्र को वर्ग कहा जाता है।

अनुधावक या चेजर / Chaser

वर्गों में बैठे खिलाड़ी अनुधावक या चेजर कहलाते हैं। विरोधी खिलाड़ियों को छूने के लिए दौड़ने वाले को Active Chaser कहा जाता है।

रनर / Runner

चेजर के विरोधी खिलाड़ी को रनर कहा जाता है।

खो देना  / To Give Kho

अच्छी ‘खो’ देने के लिए एक्टिव चेजर को बैठे हुए चेजर को पीछे से हाथ से छूकर ‘खो’ शब्द ऊँची आवाज में कहना चाहिए। हाथ लगाने और ‘खो’ कहने का काम एक साथ होना चाहिए।

फाउल / Foul

यदि बैठा हुआ चेजर अथवा एक्टिव चेजर किसी तरह का उल्लंघन करते हैं तो यह  फाउल होता है।

दिशा ग्रहण करना  / Taking Direction

जब एक्टिव चेजर एक पोस्ट से दूसरी पोस्ट तक जाता है तो इसे दिशा ग्रहण कहते हैं।

मुंह मोड़ना / To Turn the Face

यदि एक्टिव चेजर एक विशेष दिशा की ओर जाते हुए अपने कंधे की रेखा 90 डिग्री के कोण से अधिक दिशा में मोड़ लेता है तो इसे मुंह मोड़ना कहते हैं यह फाउल है।

पाँव-बाहर / Foot-Out

यदि रनर के दोनों पाँव सीमा रेखा से बाहर छू जाए तो उसे पाँव-बाहर माना जाता है, उसे आउट माना जाता है।

लोना / Lona

जब सभी रनर 9 मिनट में आउट हो जाए तो chasers द्वारा runners के विरुद्ध लोना अंकित किया जाता है, परंतु लोना का कोई अंक नहीं होता है।

अधिकारी / Officials

मैच के प्रबंध के लिए निम्न अधिकारी नियुक्त किए जाते हैं।

  • दो अंपायर
  • एक  रेफ़री
  • एक टाइम – कीपर
  • एक स्कोरर
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