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जानिए कैसे बनी “चाचा चौधरी” एक सफल कॉमिक सीरीज और कौन हैं इसके निर्माता

जब दूसरों को समझाना मुस्किल हो जाता है , तब खुद को समझना ज्यादा बेहतर होता है । छोटे बच्चों को सुपर हिरोज काफी पसंद होते हैं । हालांकि असल जिंदगी में ऐसे सुपर हीरोज तो नहीं होते हैं , लेकिन आपने उन्हे टीवी या कॉमिक्स में अच्छे काम करते हुए और बुराई को खत्म कर के दुनिया की रक्षा करते हुए जरूर देखा होगा ।
आम तौर पर हम सभी के दिमाग में किसी भी सुपर हीरो की छवि एक ताकतवर , हट्टे कट्टे और लंबे इंसान की ही होती है । चाचा चौधरी

सुपर हीरो बहुत सारे अद्भुत कामों को करने में माहिर होते है , जो की आम आदमी से नहीं हो सकते । यह कहानी एक ऐसे कॉमिक सुपर हीरो की है जो शरीर से बाकी सुपर हीरोज की तरह बिलकुल भी नहीं है लेकिन फिर भी वह अपनी तेज बुद्धि के दम पर बहुत से कारनामे कर दिखाता है । “चाचा चौधरी” भारतीय बच्चों के बीच सबसे लोकप्रिय कॉमिक चरित्र है , जो हमारे बचपन का भी एक हिस्सा हुआ करता था । चाचा चौधरी के चरित्र को प्राण कुमार शर्मा ने बनाया था और पहली बार इस चरित्र को वर्ष 1971 में “लोटपोट” पत्रिका में देखा गया था ।

शुरुआत के बाद से इसकी लोकप्रियता बच्चों के साथ साथ बड़ों के बीच भी इतनी बढ़ गई थी की आज के समय में चाचा चौधरी की कॉमिक बुक हिंदी और अंग्रेजी के अलावा 10 और अलग अलग भाषाओं में प्रकाशित की जाती हैं । इस चरित्र की लोकप्रियता को देखते हुए इस पर एक टेलीविजन सीरीज भी बनाई जा चुकी है । भारत देश में कॉमिक्स दूसरे देशों की तुलना में कम लोकप्रिय होती हैं , लेकिन फिर भी चाचा चौधरी कॉमिक लोगों के बीच अपनी एक अलग पहचान बनाने में कामयाब रही है ।

प्रारंभिक जीवन
प्राण कुमार शर्मा का जन्म 15 अगस्त , 1932 को ब्रिटिश भारत के कसूर में हुआ था , जो विभाजन के बाद से पाकिस्तान में है । प्राण ने ग्वालियर से बीए और ईवनिंग कैंप कॉलेज , दिल्ली से राजनीति विज्ञान में मास्टर ऑफ आर्ट्स की डिग्री हासिल की थी । इसके बाद उन्होंने दिल्ली में रहते हुए एक निजी छात्र के रूप में दूरी के माध्यम से सर जे जे स्कूल ऑफ आर्ट , मुंबई से ललित कला में पांच साल का कोर्स किया ताकि वे स्कूलों में ड्राइंग शिक्षक के रूप में आवेदन ले सकें , लेकिन किसी अज्ञात कारण से उन्होंने पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी थी ।

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“चाचा चौधरी” कॉमिक की सफलता
चाचा चौधरी के चरित्र को बनाने का श्रेय प्राण कुमार शर्मा को जाता है । उन्होंने अपने कैरियर की शुरुआत 60 के दशक में “मिलाप” नाम के अखबार के लिए बतौर कार्टूनिस्ट किया था । जब उन्होंने इस क्षेत्र में कदम रखा था तब भारत में इसका बहुत ही कम विस्तार हुआ करता था और भारतीय कॉमिक इंडस्ट्री भी लगभग ना के बराबर ही होती थी ।
इसी तरह से संघर्ष के साथ वर्ष 1969 के प्राण कुमार ने “लोटपोट” पत्रिका के लिए चाचा चौधरी नाम के चरित्र को बनाना शुरू किया और फिर वर्ष 1971 में चाचा चौधरी के चरित्र को पहली बार लोगों के सामने लाया गया था । अपने शुरुआत के तुरंत बाद से ही यह भारतीय बच्चों के बीच सबसे ज्यादा पहचाने जाने वाला कॉमिक कैरेक्टर बन गया था । इसके अलावा भी प्राण ने “श्रीमती जी” , “पिंकी” , “बिल्लो” , “रमन” और “चन्नी चाची” जैसे अलग अलग कई सारे चरित्र बनाए लेकिन चाचा चौधरी जितनी लोकप्रियता किसी दूसरे चरित्र को नहीं मिल सकी ।

चाचा चौधरी का किरदार कुछ ऐसा है की लोग उसे देखते ही पहचान जाते हैं । वह सिर पर लाल पगड़ी बांधे हुए एक बूढ़े से व्यक्ति हैं जो की हमेशा एक लकड़ी की छड़ी हाथ में लिए रहते हैं और उनका दिमाग किसी कंप्यूटर से भी तेज काम करता है । इस कॉमिक में चाचा चौधरी की पत्नी “बिनी” , जुपिटर ग्रह से आया हुआ एक विशालकाय एलिन “साबू” और “रॉकेट” नाम के एक कुत्ते के साथ बहुत से अलग अलग किरदार हैं । कभी कभार इस कॉमिक में बताया गया है की चाचा चौधरी अपने जवानी के दिनों में एक ताकतवर बॉक्सर थे जो कभी नहीं हारे ।

प्राण ने बताया की चाचा चौधरी के चरित्र को बनाने में जो उनकी सोच थी वह किसी भी घर के साधारण बूढ़े व्यक्ति से लिया गया था । बूढ़े व्यक्ति घर की बड़ी बड़ी परेशानियों को अपने दिमाग और अनुभव से चुटकियों में सुलझा देते हैं । चाचा चौधरी , कॉमिक्स की ज्यादातर कहानियों में साबू के साथ मिल कर घूसखोर ऑफिसर और गुंडे बदमाशों से लड़ते हुए नजर आते हैं । उनके मुख्य दुश्मन का नाम “राका” है ।
जब इस कॉमिक की लोकप्रियता शिखर पर पहुंच गई तब चाचा चौधरी के ऊपर एक टेलीविजन सीरीज भी बनाई गई थी , जिसमे चाचा का किरदार रघुबीर यादव ने निभाया था । भारतीय कॉमिक्स की दुनिया में राज करने वाले चाचा चौधरी ने टेलीविजन जगत में भी खूब नाम कमाया था ।

सम्मान
चाचा चौधरी के चरित्र की वजह से “विश्व एनसाइक्लोपीडिया ऑफ़ कॉमिक्स” नाम की किताब में प्राण कुमार शर्मा को “वाल्ट डिज्नी ऑफ इंडिया” भी कहा गया है ।
प्राण कुमार शर्मा को मरणोपरांत वर्ष 2015 में भारत के चौथे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पद्म श्री से भी सम्मानित किया गया था ।
चाचा चौधरी की पट्टियों को इंटरनेशनल म्यूज़ियम ऑफ़ कार्टून आर्ट , संयुक्त राज्य अमेरिका में स्थायी स्थान भी मिल गया है ।
भारत में कॉमिक्स को लोकप्रिय बनाने के लिए प्राण कुमार शर्मा को लिम्का बुक ऑफ़ रिकॉर्ड्स द्वारा वर्ष 1995 के पीपल ऑफ़ द ईयर में शामिल किया गया था ।
प्राण कुमार शर्मा को इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ कार्टूनिस्ट्स से वर्ष 2001 का लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड भी मिला था ।
वर्ष 1983 में , भारत की तत्कालीन प्रधान मंत्री , श्रीमती इंदिरा गांधी ने प्राण की कॉमिक्स “रमन – हम एक हैं” जारी की थी , जिसने राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा दिया था । प्राण कुमार ने अपने बेटे निखिल द्वारा चलाए जा रहे “प्राण मीडिया संस्थान” में कार्टूनिंग की शिक्षा भी दी थी ।

प्राण कुमार शर्मा पेट के कैंसर से पीड़ित थे । समस्या के बढ़ने पर उन्हें गुड़गांव के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था , जहां 5 अगस्त , 2014 को स्थानीय समय अनुसार रात के लगभग 9:30 बजे उनकी मृत्यु हो गई थी ।

चाचा चौधरी कॉमिक्स के कामयाबी के पीछे जो मुख्य वजह रही है वह है चाचा चौधरी किरदार का हमारी असल जिंदगी से काफी मेल खाना । वर्ष 1971 से आज भी यह कॉमिक प्रकाशित की जाती है ।

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