केरल के कोझिकोड एयरपोर्ट पर हुए विमान हादसे में पायलट समेत 18 लोगों की जान चली गई है।

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दिल्ली लाया जाएगा कॉकपिट 

विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) की  जानकारी के मुताबिक विमान से डिजिटल फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर बरामद किए, आगे की जांच के लिए कॉकपिट दिल्ली लाया जाएगा।

पहले ही रनवे को लेकर जताई थी चेतावनी

सेफ्टी एडवाइजरी कमेटी के एक सदस्य ने एयरपोर्ट के रनवे को लेकर पहले ही चेतावनी जताई थी। लेकिन इसे नजरअंदाज कर दिया गया था। इस कमेटी का गठन नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने किया था।

कमेटी के सदस्य  मोहन रंगनाथन ने बड़े मीडिया हाउस से बातचीत के दौरान बताया कि “करिपुर एयरपोर्ट सुरक्षित नहीं है। यहां लैंडिंग नहीं होनी चाहिए, खासकर तब जब तेज बारिश हो रही हो।” मेंगलोर क्रैश के बाद ही चेतावनी दी थी लेकिन इसे नजरअंदाज कर दिया गया। करिपुर एयरपोर्ट एक टेबल टॉप रनवे है। जिसमें ढलान है, साथ ही रनवे का बफर जोन भी छोटा है।

क्या होता है टेबल टॉप ? 

मोहन रंगनाथन ने बताया कि कोझिकोड एक टेबल टॉप रनवे है, बता दें की केरल के चार एयरपोर्ट्स में कोझिकोड रनवे  सबसे छोटा रनवे है। टेबल टॉप यानी कि जो एयरपोर्ट पहाड़ी इलाके में बना हो और रनवे का एक या दोनों सिरे ढलान पर हों। ऐसे रनवे पर बारिश के समय खतरा बढ़ जाता है।

बफर जोन होना चाहिए बड़ा

कमेटी के सदस्य ने बताया की टोपोग्राफी के हिसाब से रनवे के बाद बफर जोन 240 मीटर का होना चाहिए। जबकि यह 90 मीटर का है। इसके अलावा रनवे के साइड में 75 मीटर जगह है,जबकि इसे 100 मीटर की अनिवार्यता जरूरी है।

गाइडलाइन पर उठ रहे सवाल

मोहन रंगनाथन के मुताबिक बारिश के मौसम में रनवे पर लैंडिंग होनी चाहिए या नहीं इस बात को लेकर भी कोई गाइडलाइन नहीं आई। इस बात के लिए मैंने जून 2011 को सिविल एविएशन सेफ्टी एडवाइजरी कमेटी के चेयरमैन को चिट्ठी भी लिखी थी। साथ ही इसकी एक कॉपी सिविल एविएशन सेक्रेटरी और डीजीसीए को भी भेजी थी। इस चिट्ठी में उन्होंने सेफ्टी एरिया RESA को 240 मीटर तक करने की बात कही थी।

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