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कश्मीरी पंडित महिलाओं का मुसलमानों ने कराया अंतिम संस्कार

चंद रानी 80 और कौशली देवी 83 की मौत हो गई थी। इसके बाद मुसलमानों ने दोनों का हिंदू रीति-रिवाज के साथ अंतिम संस्कार किया।

भारत का स्वर्ग कहे जाने वाले कश्मीर पर हमेशा आतंकवादियों की नजर रही है। कश्मीर की फिजाओं में जो अमन और सुकून है। वह कहीं और नहीं है। कभी राजनीति तो कभी आतंकवाद ने कश्मीर के लोगों के दिलों में जहर घोलने की कोशिश की, लेकिन कामयाब नहीं हो पाए। क्योंकि इंसानियत हर मुश्किल में लोगों की मदद करने का तरीका तलाश ही लेती है। ऐसी ही उम्मीद की किरण बने हैं कश्मीर के कुलगाम के मुसलमान। कश्मीरी पंडित महिलाओं का अंतिम संस्कार किया।

पेश की इंसानियत की मिसाल

हिंदू-मुस्लिम की लड़ाई में नेताओं और आतंकवादियों ने अपनी रोटियां सेंकी हैं, लेकिन इंसानियत के जज्बे ने इस भेद को भुला दिया है। कुलगाम जिले में मुसलमानों ने दो कश्मीरी पंडित महिलाओं का अंतिम संस्कार का सामाजिकता और इंसानियत की मिसाल पेश की है। बता दें कि यह महिलाएं उन कश्मीरी पंडितों के परिवार की थीं, जिन्होंने 1990 में कश्मीर नहीं छोड़ा था।

खबरों के मुताबिक, चंद रानी 80 और कौशली देवी 83 की मौत हो गई थी। इसके बाद मुसलमानों ने दोनों का हिंदू रीति-रिवाज के साथ अंतिम संस्कार किया। स्थानीय निवासी गुलाम मोहुद्दीन शाह ने के मुताबिक, सभी क्रियाकर्म मुसलमानों ने ही संपन्न कराए। कश्मीरी पंडित महिलाओं के शव को दाह संस्कार के लिए ले जाने और आखिरी वक्त तक उनका ख्याल रखा गया।

रमेश कुमार नाम के कश्मीरी पंडित ने कहा कि कश्मीरी मुसलमान और पंडित एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। दोनों के बीच भाईचारा और सांप्रदायिक सद्भाव कभी खत्म नहीं होगा। वहीं अन्य लोगों के अनुसार, दोनों महिलाओं का अंतिम संस्कार उनके रिश्तेदारों ने किया। इस दौरान मुस्लिमों ने उन्हें सभी तरह की मदद की। वहीं कई लोगों का कहना है कि महिलाओं के रिश्तेदारों ने अंतिम संस्कार किया। हालांकि, स्थानीय मुस्लिम समुदाय द्वारा हर संभव मदद की गई।

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