Success Story

कैलाश काटकर का कैलकुलेटर रिपेयरिंग से लेकर “क्विक हील टेक्नोलॉजी लिमिटेड” की स्थापना का सफर

जीत अगर निश्चित हो तो कायर भी लड़ सकते हैं लेकिन बहादुर वो कहलाते हैं जो हार के निश्चित होने पर भी मैदान नहीं छोड़ते । यह कहानी है कैलाश काटकर की , जो “क्विक हील टेक्नोलॉजी लिमिटेड” के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं । उन्होंने वर्ष 1991 में छोटे से एक कमरे वाले बूट स्ट्रैप्ड इलेक्ट्रिकल डिवाइस रिपेयर स्टेशन , कैट कंप्यूटर सर्विसेज से शुरुआत की और आज दुनिया भर के 60 देशों में फैले एक आईटी सुरक्षा समाधान साम्राज्य में काम कर रहे हैं । क्विक हील टेक्नोलॉजी की स्थापना वर्ष 1993 में हुई थी । यह भारत में आईटी सुरक्षा समाधानों के अनुसंधान और विकास के अग्रदूतों में से एक है , इसके भारत में 31 शाखा कार्यालय और जापान , अमेरिका , केन्या और दुबई में वैश्विक कार्यालय हैं ।

Kailash Katkar journey


10–11 वर्ष की उम्र में पढ़ाई के साथ साथ कैलाश काटकर ने अपने परिवार की आर्थिक मदद के लिए स्क्रीन प्रिंटिंग का काम करना शुरू कर दिया था । उन्होंने केवल 350 रुपए में दुकान की सफाई से लेकर चाय लाने तक के काम केवल इसलिए किए थे क्योंकि वह उस दुकान से कैलकुलेटर रिपेयरिंग के टेक्नोलॉजी को सीखना चाहते थे । आगे चल कर केवल 15,000 रुपया से उन्होंने अपनी पहली रेडियो और कैलकुलेटर रिपेयरिंग की दुकान खोली थी । वह अपने दूर दृष्टि , मजबूत इरादे और सूझ बूझ की बदौलत स्वयं इतने सक्षम हो गए थे की उनकी कंपनी आज हजारों लोगों को कोरोजगार के अवसर प्रदान करती है ।

प्रारंभिक जीवन

कैलाश काटकर का जन्म 1 नवंबर , 1966 को महाराष्ट्र के रहीमपुर के छोटे से गांव के एक मराठी परिवार में हुआ था । उनके घर की आर्थिक स्थिति बहुत कमजोर थी । कैलाश की शुरू से ही पढ़ाई में कुछ खास दिलचस्पी नहीं थी लेकिन उन्होंने जैसे तैसे 10 वीं तक की पढ़ाई पूरी की और इसके बाद पढ़ाई छोड़ दी । परिवार की आर्थिक मदद के लिए 10–11 वर्ष की आयु में 5 वीं कक्षा की पढ़ाई के साथ वे स्क्रीन प्रिंटिंग का काम भी किया करते थे । बाद में टेक्निकल कामों में रुचि होने के कारण उन्होंने रेडियो रिपेयरिंग का काम सीखा और फिर अपने ही घर से लोगों के रेडियो रिपेयर करने का काम शुरू कर दिया । उस काम से वह 1,500 से 2,000 रुपए तक कमा लेते थे ।


10 वीं कक्षा की परीक्षा के बाद उन्होंने पढ़ाई को पूरी तरह से छोड़ने का मन बना लिया था और कुछ नई टेक्नोलॉजी सीखने के इरादे से एक लोकल रेडियो और कैलकुलेटर रिपेयरिंग की दुकान पर नौकरी करनी शुरू कर दी थी । वहां उन्हे मात्र 350 रुपए तनख्वाह मिलती थी और कम उम्र होने के कारण शुरुआत में दुकान की सफाई से लेकर चाय लाने तक के काम भी उन्ही से करवाए जाते थे । उन्होंने यह सब कैलकुलेटर और अन्य ऑफिस उपकरणों की रिपेयर टेक्नोलॉजी को सीखने के लिए किया था । 24–25 वर्ष की उम्र तक कैलाश ने उसी दुकान पर काम किया था । काम के दौरान दुकान की एक अन्य मुंबई ब्रांच में उनकी ट्रेनिंग भी हुई । कुछ वर्षों में उन्होंने कैलकुलेटर और रेडियो की रिपेयरिंग में मास्टरी के अलावा व्यवसाय करने का अनुभव भी हासिल कर लिया था ।


वर्ष 1990 में कैलाश ने किराए के एक छोटी सी दुकान में अपनी बचत के 15,000 रुपया से खुद की कैलकुलेटर रिपेयरिंग की दुकान खोली । पहले वर्ष में ही उन्हें 45,000 की कमाई हुई । बदलते समय के साथ साथ उन्होंने कंप्यूटर जैसी नई टेक्नोलॉजी में खुद को उन्नयन करना भी शुरू कर दिया था । वर्ष 1993 में कैट कंप्यूटर सर्विसेज नाम से उन्होंने कंप्यूटर रिपेयर और मेंटेनेंस का काम भी शुरू कर दिया था । कंप्यूटर मेंटेनेंस में शुरुआत में थोड़ी सी दिक्कतें आईं लेकिन धीरे धीरे उन्होंने अपनी मेहनत और परिश्रम से न्यू इंडिया इंश्योरेंस जैसे कुछ कॉर्पोरेट्स की एनुअल मेंटेनेंस का काम लेने में कामयाबी हासिल की । जिसके बाद साल भर में ही उनका टर्नओवर 1 लाख से ऊपर जा पहुंचा था ।

“क्विक हील टेक्नोलॉजी लिमिटेड” की स्थापना

\धीरे धीरे कंप्यूटर का प्रचलन और लोकप्रियता बढ़ने लगी थी और इसके साथ ही बढ़ने लगी थी कंप्यूटर में फ्लॉपी वायरस की समस्या । इस दौर में कैलाश के पास अपने ग्राहकों के लिए वायरस की समस्या से निपटने के लिए कोई खास उपाय नहीं था , एक ही मानक समाधान और वह था फॉर्मेटिंग या रीइंस्टालिंग । उसी दौरान धीरे धीरे इंटरनेट की लोकप्रियता भी बढ़ने लगी थी और उसके साथ इंटरनेट वायरस की समस्या भी । बाजार में उपलब्ध एंटी वायरस सॉफ्टवेयर बहुत ही महंगे थे और इस समस्या से निपटने के लिए वह एक सस्ता समाधान ढूंढने लगे थे । उन्होंने पुणे में बैचलर ऑफ कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई कर रहे अपने छोटे भाई संजीव काटकर से वायरस की समस्या के लिए कुछ टूल्स बनाने के लिए कहा और अपने बड़े भाई की मदद के लिए संजय ने कड़ी मेहनत कर के कैट कंप्यूटर सर्विसेज के लिए एंटी वायरस सॉफ्टवेयर का एक सामान्य मॉडल तैयार कर दिया । वह टूल काफी अच्छा काम करता था ।

कैलाश ने शुरुआत में अपने ग्राहकों और प्रतियोगियों को यह टूल बिना पैसे के देना शुरू किया और सभी को यह एंटी वायरस टूल बहुत पसंद भी आया । उनके ग्राहकों ने उनसे कहा की उनके वह एंटी वायरस टूल एंटी वायरस सॉफ्टवेयर से भी अच्छा काम करते हैं और उन्हें खुद का एक एंटी वायरस सॉफ्टवेयर भी बनाना चाहिए । लोगों और उनके प्रोत्साहन से कैलाश के छोटे भाई संजय ने एक उचित एंटी वायरस सॉफ्टवेयर बनाना शुरू किया । वर्ष 1995 में उन्होंने “क्विक हील” नाम से एंटी वायरस सॉफ्टवेयर का पहला संस्करण मार्केट में उतारा । उसका मूल्य बाजार में उपलब्ध कई एंटी वायरस सॉफ्टवेयर से काफी कम था ।

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शुरुआत में सॉफ्टवेयर को मार्केट में बेचने में कुछ समस्याएं आईं लेकिन धीरे धीरे सभी समस्याओं का हाल निकालते हुए कैलाश आगे बढ़ते रहे । वर्ष 1996–1997 में उनका टर्नओवर लगभग 12,19,000 रुपया तक जा पहुंचा था ।अपने एंटी वायरस सॉफ्टवेयर के अच्छे होने के बावजूद मार्केट में इस पर लोगों का विश्वास बनाना और बेचना कैलाश के लिए इतना आसान नहीं था । उस दौरान एक दौर ऐसा भी आया था जब वित्तीय समस्याओं के चलते एक बार तो उन्होंने कंपनी को बंद करने की भी सोच ली थी लेकिन छोटे भाई संजय के सलाह पर कंपनी में कुछ मार्केटिंग पेशेवरों को जोड़ा किया गया । उसके बाद उन्हें आज तक कभी ऐसा कुछ सोचना नहीं पड़ा ।

कैलाश काटकर अपने बुरे दिनों में कभी हाथ पर हाथ रख के नहीं बैठे । उन्हे अच्छे से मालूम था की अगर उन्हें अपनी गरीबी से निजाद पाना है तो उन्हें उसी वक्त कुछ करना चाहिए जो उन्होंने किया भी । कैलाश काटकर आज के यूथ के लिए एक प्रेरणा बन गए हैं ।

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