Success Story

महज 13 वर्ष की उम्र में तिलक मेहता ने कैसे खड़ी कर दी 100 करोड़ की कंपनी

जीतने वाले कुछ अलग चीज़ नहीं करते , वो बस उन्ही चीजों को अलग तरीके से करते हैं । ये कहानी है एक 15 वर्षीय तिलक मेहता की जिन्होंने केवल 13 वर्ष की उम्र में ही अपना खुद का एक स्टार्टअप शुरू कर दिया था । इतनी कम उम्र में ही तिलक ने अपनी सोच से लाखों लोगों को प्रभावित किया है । साथ ही वह उन बच्चों के लिए भी एक प्रेरणा बन गए हैं जो जिंदगी में कुछ बड़ा करने का सपना देखते हैं ।

उन्होंने इस बात को बखूबी सच साबित कर के दिखाया है की उम्र कभी भी प्रतिभा की मोहताज नहीं होती है । जहां आज कल तिलक मेहता की उम्र के ज्यादातर बच्चे गेम्स खेलने में व्यस्त होते हैं वहीं एक सफल व्यवसाय शुरू कर के तिलक ने दिखा दिया की लोगों की परेशानियों को सुलझा कर कोई भी सफल हो सकता है । तिलक मेहता की कंपनी “पेपर–एन–पार्सल” पूरी तरह से एक ऐप आधारित लॉजिस्टिक सेवा है , जिसमें 300 से अधिक डब्बे वाले भागीदारों के साथ 200 से अधिक कर्मचारी काम करते हैं ।

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अध्ययन के अनुसार , यह वर्तमान में प्रति दिन 1250 से अधिक प्रसव का ख्याल रख रहा है । कोई भी ग्राहक प्ले स्टोर से इस ऐप को डाउनलोड कर सकता है और डिलीवरी के लिए ऑर्डर दे सकता है । इसमें डब्बा वालों का एक तेज नेटवर्क है , जो अपने दैनिक दिनचर्या के काम को पूरा करने के बाद सामान पहुंचाते हैं । वर्तमान में , ग्राहक 40 से 180 रुपए के बीच के शुल्क के साथ 3 किलो वजन वाली कोई भी चीज़ की डिलीवरी का ऑर्डर दे सकते हैं ।

प्रारंभिक जीवन
तिलक मेहता का जन्म वर्ष 2006 में गुजरात , भारत में हुआ था । हालांकि अब वह मुंबई में रहते हैं । उनके पिता का नाम विशाल मेहता है जो बतौर बैंक प्रबंधक काम करते थे , वहीं उनकी माता का नाम काजल मेहता है जो एक गृहणी हैं । तिलक के अलावा उनकी एक जुड़वा बहन तन्वी मेहता भी हैं ।

“पेपर–एन–पार्सल” कंपनी की स्थापना एवं सफलता
तिलक मेहता के इस व्यवसाय की शुरुआत हुई थी वर्ष 2017 में , जब किसी आम बच्चे की तरह ही वह गरोडिया इंटरनेशनल स्कूल के 8 वीं कक्षा में पढ़ाई करते थे । एक दिन तिलक को अपने अंकल के घर से एक किताब लाने की जरूरत पड़ गई थी , उनके अंकल मुंबई के ही दूसरे छोर पर रहा करते थे । उस किताब को लाने के लिए जब उन्होंने अपने पिता को कहा तो वह ऑफिस के काम में फसे रहने की वजह से तिलक की बात पर ध्यान नहीं दे सके । इस घटना के बाद से तिलक मेहता को आगे कोई और रास्ता नहीं दिखाई दे रहा था ।

उन्होंने एक बार कुरियर से उस किताब को मंगवाने की सोची थी लेकिन उसी दिन की डिलीवरी के लिए एक आम कुरियर वाला भी 300 रुपए मांग रहा था और इतने पैसे उस बुक के दाम के लगभग बराबर ही थे । तिलक ने सोचा की इसी तरह की शिकायतों से मुंबई के अंदर लाखों लोग परेशान रहते होंगे क्योंकि जहां एक जगह से दूसरी जगह समान पहुंचने के लिए कुरियर कंपनी काफी समय लेती हैं , वहीं अगर किसी समान को उसी दिन पहुंचाना हो तो कुरियर वाले सर्विस तो देते हैं लेकिन उनके दाम बहुत ही ज्यादा होते हैं ।

लोगों को कम से कम पैसा खर्च कर के जल्दी से जल्दी उनका पार्सल मिले , इसी विचार के साथ तिलक मेहता ने खुद का स्टार्टअप शुरू करने का सोचा । फिर इस व्यवसाय को प्लान करते समय तिलक मेहता के दिमाग में सबसे पहले आए मुंबई के डिब्बे वाले , जिन्हे मुंबई का लाइफलाइन भी कहा जाता है । मुंबई में कुछ भी देर हो सकता है लेकिन उनके डब्बे वाले समय के बहुत ही ज्यादा पक्के होते हैं । साथ ही उनका नेटवर्क भी पूरी मुंबई में फैला होता है । डब्बे वालों को देख कर ही तिलक मेहता के दिमाग में यह विचार आया की वह इस नेटवर्क का उपयोग खाने के आइटम्स के अलावा भी चीजों को डिलीवर करने के लिए कर सकते हैं । इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू करने के बाद से तिलक ने डिब्बे वालों के नेटवर्क को बेहतर ढंग से समझने के लिए उनके साथ समय बिताया । अपने बेटे के लगन को देख कर तिलक के पिता विशाल ने भी उनका बखूबी साथ दिया ।

सब कुछ समझने के बाद से तिलक ने “पेपर–एन–पार्सल” नाम से एक एप्लीकेशन को डेवलप करवा कर अपने स्टार्टअप की शुरुआत कर दी । इस एप्लीकेशन को बनने में दिन रात की मेहनत के बावजूद भी उन्हे करीब 8 महीने का समय लग गया था । लेकिन एक बार इस एप्लीकेशन के मार्केट में आने के बाद से यह हर जगह छाने लगा क्योंकि जिस पार्सल के लिए एक आम आदमी को 300 रुपए तक खर्च करने पड़ते थे वहां आज पेपर–एन–पार्सल की मदद से महज 40 रुपए में ही उसे भेजा जा सकता है । पेपर–एन–पार्सल एप्लीकेशन की सुविधा यह है की इस ऐप को डाउनलोड करने के बाद से आप 3 किलो तक के वजनी चीजों को उसी दिन मुंबई में कहीं से भी कहीं तक भेज सकते हैं । वर्ष 2018 के जुलाई महीने में शुरू होने वाले इस कंपनी ने अब तक 1,30,000 से भी ज्यादा पार्सल सफलता पूर्वक डिलीवर कर दिया है । साथ ही इस 15 वर्ष के बच्चे ने सैकड़ों लोगों को रोजगार भी प्रदान किया है ।

तिलक की आय का मुख्य और एकमात्र श्रोत उनकी स्टार्टअप कंपनी पेपर–एन–पार्सल ही है । वर्ष 2021 में , उनकी कंपनी का शुद्ध मूल्यांकन लगभग 100 करोड़ रुपए था , जिसका अपने आप में ही एक महत्व है । तिलक मेहता ने हाल ही में वर्ष 2018 में इंडिया मैरीटाइम अवार्ड्स में युवा उद्यमी का खिताब जीता था । तिलक मेहता भारत के सबसे युवा उद्यमियों में से एक हैं । उनकी स्टार्टअप कंपनी पेपर्स-एन-पार्सल्स या पीएनपी , डोर टू डोर कूरियर पिकअप और डिलीवरी सेवाओं के क्षेत्र में एक डिजिटल व्यवधान लाने के लिए तैयार है । तिलक मेहता का कहना है की वह इस सर्विस को मुंबई के अलावा पूरे भारत में भी लॉन्च करने की तैयारी में हैं । जिस तरह से इतनी छोटी उम्र में तिलक ने एक सफल कंपनी की शुरुआत की है वह काबिले तारीफ है । वह सिर्फ अपनी उम्र के बच्चों के लिए ही नहीं बल्कि हम सभी के लिए भी एक प्रेरणा बन कर सामने आए हैं ।

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