घड़ी की रफ्तार से तेज भागने वाली जिंदगी में आज हर कोई जल्दी से बन जाने वाला खाना बनाना चाहते हैं और उन लोगों की इस चाहत को “हल्दीराम” ( Haldiram ) ने पूरा किया है । हल्दीराम अपने नमकीन , मिठाई और रेडी टू ईट फूड जैसे कई खाने के पदार्थ बनाने के लिए मशहूर है । हल्दीराम की कहानी असाधारण करतब हासिल करने वाले आम लोगों की ही है । हल्दीराम साल 1918 में अतिरिक्त आय के लिए एक अंशकालिक शौक का रूप में शुरू हुआ था और आज इसका वार्षिक राजस्व 5,000 करोड़ के करीब है । एक छोटी सी दुकान में शुरू हुआ व्यापार अब न केवल देश के सभी क्षेत्रों में फैला है , बल्कि विश्व स्तर पर भी जबरदस्त फैल चुका है ।

Haldiram

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“हल्दीराम” की शुरुआत

हल्दीराम की शुरुआत राजस्थान के बीकानेर जिले में तनसुख दस भीसेन नाम के एक सख्स ने की । उन्होंने अपनी बहन से नमकीन भुजिया बनाने के तरीके को सिखा और फिर वहीं एक छोटी सी दुकान में खुद बना कर बेचने लगे । तभी तनसुख दस भीसेन के बेटे गंगा भीसेन अग्रवाल ने इस नमकीन को अलग अलग रूप देना चालू कर दिया जिससे वह भुजिया पहले से कई ज्यादा टेस्टी बन गई थी ।

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12 वर्ष की आयु में , जब अधिकांश बच्चे स्कूल जाया करते थे तब गंगा भीसेन अग्रवाल बीकानेर में सर्वव्यापी नाश्ते का आविष्कार किया करते थे जिसे आज हल्दीराम की भुजिया के रूप में जाना जाता है । सबसे बड़ा आविष्कार उन्होंने यह किया की भुजिया को बेसन के बजाए मोठ की दाल से बनाना शुरू किया उसके बाद उन्होंने इसे पतला किया जिससे यह क्रिस्पी बन गया ।


जैसे जैसे लोग उनके नमकीनों को पसंद करने लगे थे उन्होंने इसके दाम 2 पैसे प्रति किलो से 5 पैसे प्रति किलो के हिसाब से बढ़ा दिए थे । वहीं कुछ सालों में इसकी कीमत 25 पैसे प्रति किलो हो गई थी , जिससे यह पूरे परिवार के लिए एक सफल व्यवसाय बन गया था । दूसरे दूसरे राज्य में जाने वाले लोग अपने परिवार और दोस्तों के लिए इसे खरीदने के लिए रुक जाते थे ।

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1950 के दशक की शुरुआत में , गंगा भीसेन ने अपने पुत्रों मूलचंद और रामेश्वर लाल के साथ अपने इस व्यवसाय को उन्होंने “हल्दीराम भुजियावाला” के नाम से कोलकाता में खोला जो बाद में “हल्दीराम प्रभुजी” और “हल्दीराम” में विभाजित हो गई । कुछ ही वषों में उन्हें बहुत बड़ी सफलता मिली । उसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नही देखा और अगले तीन दशकों में उन्होंने व्यवसाय को नागपुर और फिर देश की राजधानी दिल्ली में भी खोल दिया ।

विवाद

हम चाहे किसी भी रास्ते पर चले , उसमे बीच बीच में हर्डेल्स का आना तय है । वो हर्डेल्स कैसे भी हो सकते हैं लेकिन उनसे कैसे बच के पार होना है यह आपके और हमारे ऊपर होता है । कुछ ऐसे ही हर्डेल्स का सामना हल्दीराम को भी करना पड़ा लेकिन उन्हें पार करते हुए यह ब्रांड उसी रफ्तार से आगे बढ़ गया । हल्दीराम पर यह आरोप लगा था की वह अपने खाद्य पदार्थों में कीटनाशक का मिश्रण करते हैं । इस आरोप के अधीन होने के बाद , हल्दीराम के स्नैक्स को 2015 में देश के खाद्य और औषधि प्रशासन (एफ. डी. ए.) द्वारा संयुक्त राज्य अमेरिका में प्रवेश से मना कर दिया गया था । बाद में एम. एफ. डी. ए. द्वारा आधिकारिक बयान में पता चला की हल्दीराम की भुजिया सेव , नवरतन मिश्रण , आलू चिप्स , सोनपापड़ी , मूंग दाल आदि के नमूनों का परीक्षण किया गया और यह सभी अपने सीमा के भीतर मिले । इनमे किसी भी प्रकार की कोई मिलावट नहीं थी ।

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अधिकांश पारिवारिक व्यवसायों की तरह हल्दीराम भी परिवार विस्तार के विवादों से मुक्त नहीं था। परिवार की यात्रा के आरंभ में , गंगा भीसेन ने परिवार के झगड़े को क्षेत्रिया‌ प्रभाग की एक अनूठी प्रणाली के माध्यम से रखा , जिसमे परिवार का प्रत्येक खंड केवल उन्हें सौंपे गए क्षेत्रों में व्यापार करने में सक्षम होगा । इस समझौते के साथ , गंगा भीसेन के बेटे रामेश्वर लाल और उनके बेटों को केवल पश्चिमी बंगाल में व्यापार करने की अनुमति थी । शुरू में जब बिक्री बहुत अच्छी थी इस समझौते ने वर्षों तक काम किया , लेकिन जब अन्य पारिवारिक शाखाओं ने राजधानी और देश भर में कारोबार बढ़ाना शुरू किया तो यह व्यवस्था उन्हें खट्टे अंगूर की तरह लगने लगी ।

इसके बाद कोलकाता परिवार ने दिल्ली में प्रवेश किया , जिससे उन्हें अपने दिल्ली ब्रांड से अलग होने के लिए एक अलग ब्रांड नाम रखने को कहा गया जिसे उन्होंने इंकार कर दिया जिसके वजह से अदालत में मामला चला । लगभग 15 वर्षों तक मामला चला जिसने न केवल परिवार के संसाधनों को खाने से बल्कि भावनात्मक संबंधों को भी प्रभावित किया । 2013 के अंत में , दिल्ली का हल्दीराम ट्रेडमार्क “हल्दीराम भुजियावाला” का एकमात्र मालिक बन गया । हालांकि , कोलकाता परिवार की दिल्ली में कुछ दुकानें हैं , दिल्ली साम्राज्य और उनके वफादार ग्राहकों की ताकत के साथ हल्दीराम को इन्हे अनदेखा करना पड़ा ।

आज हल्दीराम के 400 से अधिक उत्पाद हैं । इसकी उत्पाद श्रृंखला में पारंपरिक नमकीन , पश्चिमी नमकीन , भारतीय मिठाइयां , कुकीज , शर्बत और अचार , गुलाब जामुन और बीकानेरी भुजिया और पापड़ शामिल हैं । कंपनी रेडी टू ईट फूड उत्पादों का भी उत्पादन करती है । हल्दीराम के उत्पादों का विपणन विभिन्न खुदरा स्थानों जैसे बेकरी , कंफेशनरी स्टोर और विभिन्न व्यवसायिक वेबसाइटों पर भी किया जाता है ।

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अन्य कंपनियों द्वारा बनाए गए समान उत्पादों की तुलना में हल्दीराम उत्पादों का निर्धारित मूल्य आमतौर पर सस्ता है । संयुक्त राज्य अमेरिका के बाजार में अगस्त 2003 तक कंपनी के उत्पाद आलू के चिप्स तक सीमित थे। हल्दीराम के उत्पादों को कुछ भारतीय सुपरमार्केट यू. एस. में ले जाते हैं । अमेरिका में भी इसके उत्पाद भारतीय प्रवासी के लोकप्रिय हैं ।

हल्दीराम विज्ञापन और प्रचार के मामले में बहुत पारंपरिक है । हालांकि , मौजूद समय के साथ तालमेल बनाने के लिए हल्दीराम ने “प्रेम रतन धन पायो” फिल्म के साथ करार किया और 1.5 करोड़ से अधिक हल्दीराम के स्नैक्स पैकेट फिल्म के लोगों के साथ मुद्रित किए गए । और अब यह श्रृंखला सक्रिय रूप से अपने फ्रेंचाइजी का विस्तार कर रही है ।

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ब्रांड ट्रस्ट के अनुसार हल्दीराम भारत के सबसे भरोसेमंद ब्रांड में 55 वें स्थान पर आता है यह ट्रस्ट रिसर्च एडवाइजरी द्वारा आयोजित एक अध्ययन था । कंपनी ने पिछले कुछ वर्षों में जबरदस्त गति से विकास किया है और 2017 में देश की अन्य सभी घरेलू और अंतराष्ट्रीय प्रतिद्वंद्वियों को पीछे छोड़ते हुए , सबसे बड़ी स्नैक्स कंपनी के रूप में सामने आया । हल्दीराम के उत्पाद 80 से अधिक देशों में उपलब्ध है ।

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