Indinomics

कोरोना के बीच जारी GDP के आंकड़ों पर सभी की नजरे थीं, लेकिन ये आंकड़े निकलते कैसे हैं ? जानें पूरी डिटेल आसान भाषा में 

 

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कोरोना संकट के चहते पहली बार GDP के आंकड़े जारी किए गए हैं। GDP में इस बार काफी गिरावट देखी गई है। केंद्र सरकार के सांख्यिकी मंत्रालय के अनुसार 2020-21 वित्त वर्ष की पहली तिमाही यानी अप्रैल से जून के बीच विकास दर में 23.9 फीसदी गिरावट देखी गई है। GDP के आंकड़ों में लगातार गिरावट आने का मतलब है देश के लिए खतरे की घंटी बजना।

 

कहा यह भी जा रहा है कि कोरोना वायरस महामारी और देशव्यापी लॉकडाउन की वजह से GDP की दर 18 फीसदी तक गिर सकती है। जबकि सरकारी बैंक SBI के अनुसार यह दर 16.5 फीसदी तक गिर सकती है।

 

कैसे GDP बनी और हमारे देश में इसकी गणना कब से  की जाती है ? 

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अगर GDP  की पुरानी अवधारणा पर बात करे तो 1654 और 1676 के बीच चले डच और अंग्रेजों के बीच टैक्स को लेकर चल रही लड़ाई के दौरान विलियम पेट्टी ने GDP को पेश किया था, लेकिन वहीं बात मॉडर्न अवधारणा की करें तो दूसरे विश्व युद्ध के दौरान अर्थव्यवस्था को लेकर चिंता जताई जाने लगी थी। इस परेशानी को देखते हुए अर्थशास्त्री साइमन कुजनेत्स ने 1934 में अमरीकी कांग्रेस में एक मॉडल अवधारणा वाली रिपोर्ट पेश की  इसमें  पहली बार GDP यानि सकल घरेलू उत्पाद का विचार किया गया। साइमन कुजनेत्स ने यह भी कहा था कि इसे कल्याणकारी कार्यों के मापन के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

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1944 में ब्रेटन वुडस सम्मेलन के बाद ब्रेटन वुडस ट्विन्स के रुप में मशहूर विश्व बैंक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के द्वारा अर्थव्यवस्था के आकार और इसकी सालाना बढ़ोत्तरी की दर पता लगाने के लिए दिए गए जीडीपी के विचार ने ख्याति पायी और इसके बाद से ही GDP की गणना हमारे देश में होने लगी।

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GDP आखिर होती क्या है इसकी गणना कैसे की जाती है ?

किसी भी देश की सीमा में एक निर्धारित समय पर तैयार की गई सेवाओं के कुल मौद्रिक, उत्पादों के बाजार मूल्य को सकल घरेलू उत्पाद यानी GDP (Gross Domestic Product)  कहते हैं। इस गणना से देश की आर्थिक सेहत का अंदाजा लगाया जाता है। इसकी गणना आमतौर पर सालाना की जाती है, लेकिन भारत में हर तीन महीने में इसकी गणना की जाती है पिछले कुछ साल में स्वास्थ्य, बैंक, कंप्यूटर और अलग अलग सेक्टर भी इसमें जोड़ दिए गए हैं। GDP हमें बताती है कि किस सेक्टर में तेजी आ रही है और किस में गिरावट।

 

साल में चार बार जारी होते हैं GDP के आंकड़े

देश में 4 बार GDP का आकलन केंद्र सरकार के सांख्यिकी मंत्रालय करता है। यह तिमाही के आंकड़ों के साथ सालाना GDP के आंकड़े भी जारी करता है।

 

 कैसे मापी जाती है GDP ? 

GDP दो तरह की होती है

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1 –  Nominal GDP        2- Real GDP

 

नॉमिनल में सभी आंकड़ों की मौजूदा कीमत पर योग होता है और रियल में महंगाई को भी मापा जाता है। जैसे किसी भी वस्तु के उत्पादन में 10 रुपए की बढ़ोतरी हुई है और महंगाई 4 % बढ़ी है तो उस वस्तु में 6% बढ़ोतरी होगी और हमारे देश में GDP के तिमाही आंकड़े रियल GDP के होते हैं। भारत में रियल GDP 2011-12 में स्थिर कीमत पर 140.78 लाख करोड़ रुपए था।

 

कैसे की जाती है GDP की गणना

GDP को मापने के लिए 1993 में अंतरराष्ट्रीय मानक बुक सिस्टम ऑफ नेशनल अकाउंट्स तय किया गया था। जिसे SNA93 कहा जाता है। इसे अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष IMF यूरोपीय संघ, आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन,संयुक्त  राष्ट्र और वर्ल्ड बैंक के प्रतिनिधियों ने मिलकर तैयार किया है।

भारत में खासतौर पर भारत में GDP गणना में अहम हिस्से कृषि, उद्योग और सेवा हैं। (इससे पहले देश में रहने वाले भारतीय और बाहर रहने वाले सभी भारतीयों की आय को एक साथ जोड़ा जाता था)  जिसके आधार पर GDP तय की जाती है। इसमें कुल प्रोड्यूक्श, व्यक्तिगत उपभोग, व्यवसाय में कितना निवेश किया। सरकार ने देश में विकास कार्यों पर जितने रुपए खर्च किए हैं। उन सभी पैसों को साथ में जोड़ा जाता है। इसके साथ ही कुल निर्यात यानी कितना एक्सपोर्ट करते हैं उसे जोड़ा जाता है इसके अलावा कितना भी समान इंपोर्ट करते हैं (यानी कि जितनी चीजें विदेश से मंगवाई जाती है ) उसे घटा दिया जाता है। इन सब के बाद जो आंकड़ा सामने आया है उसे भी ऊपर किए गए खर्च में जोड़ा जाता है। यही GDP होता है।

 

जब GDP को राष्ट्र जनसंख्या से भाग किया जाता है तो प्रति व्यक्ति GDP निकलती है। GDP का आंकलन देश के अंदर ही होता है यानी कि देश में जिन भी चीजों का उत्पादन हुआ वो, साथ ही इंपोर्ट की गई चीजें इसमें शामिल नहीं होती हैं। और इसका असर भी GDP पर नहीं पड़ता है।

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