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शिव शंकर के शिवलिंग रूप का रुद्राभिषेक करने से बन जाते हैं हर बिगड़े काम

शिव है श्रद्धा के ही भूखे, भोग लगें चाहे रूखे सूखे

शिव शंकर देवों के देव महादेव की पूजा बेहद ही सरल मानी गई है। शिव शंकर बड़े ही भोले स्वभाव के माने जाते हैं, उनका नाम मात्र लेने से ही वह अपने भक्तों से प्रसन्न हो जाते हैं। शिव दिन दुनिया से परे वैरागी जीवन शैली प्रिय भगवान है। परंतु स्त्रियां शिव शक्ति पाने की मनोकामनाएं करती हैं और सोलह सोमवार के व्रत पूजन भी करती हैं।

महादेव के अनंत स्वरूप विद्यमान हैं, कभी शिव रौद्र रूप धारण कर महाकाल बन जाते हैं, तो कभी कैलाश शिखर पर बैठ भोले हो जाते हैं। शिव का सामान्य स्वरूप भी अद्भुत है। जिसमें वह भस्म से समय शरीर के साथ गले में सर्प व मुंडमाला लपेटे सिर पर अर्धचंद्र को धारण किए जटा से गंगा की धारा बहाते तन पर बाघ की खाल लपेटे हुए हैं।

शिव तीन नेत्र धारी त्रिलोचन भी हैं। जो अपना नेत्र यदि खोल दें तो संपूर्ण सृष्टि का सर्वनाश हो जाए। शिव सृष्टि के चालक भी हैं और कारक भी एवं शिव ही संहारक भी हैं। भगवान शिव के 108 नाम है और हर नाम का अर्थ व कारण अलग-अलग है।

शिव है श्रद्धा के ही भूखे, भोग लगें चाहे रूखे सूखे

भोले नाथ की पूजा इतनी सरल है कि उनके प्रिय भक्तों द्वारा शिवलिंग पर मात्र एक लोटा जल चढ़ाने से ही सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं शिवलिंग का जलाभिषेक करने वाला परम सुखों की प्राप्ति करता है रुद्राभिषेक भी एक बहुत ही प्राचीन वाह मान्यता पूर्ण पूजा है मान्यता यह भी है कि प्राचीन काल में रूद्र अभिषेक मंत्र का जाप करने से अकाशीय ध्वनि उत्पन्न होती थी जब प्राचीन काल में ऋषि मुनि ध्यान करते समय इस मंत्र का जाप करते थे और इसके लाभ को लोगों तक पहुंचाने में सफल होते थे रुद्र रुद्र अभिषेक के प्रभाव से सकारात्मक ऊर्जा भी उत्पन्न होती है एवं नकारात्मक ऊर्जा नष्ट हो जाती है रुद्राभिषेक प्रकृति के लिए भी लाभदायक होती है सावन मास में जब शिव भक्त रुद्राभिषेक व जलाभिषेक करते हैं तो प्रकृति हरित व हर्षित हो उठती है

मंत्रोच्चारण करते समय हम भले ही हर मंत्र का अर्थ ना समझ पाते हो परंतु इससे उत्पन्न होने वाले कंपन से हमारा मन और हमारे आसपास के वातावरण में शुद्ध लहर का प्रभाव होना शुरू हो जाता है

शिव का रुद्राभिषेक करते समय आपको भी ऐसी ही ऊर्जा का आभास हो सकता है रुद्राभिषेक करने के कई लाभ होते हैं जिसमें शिव का आशीर्वाद सर्वोपरि है रुद्राभिषेक करने का कोई संकल्प या निश्चित उद्देश्य होने की आवश्यकता नहीं होती फिर भी रुद्राभिषेक घर में करने पर घर में हो रही समस्याएं मनचाहा जीवनसाथी पाने की इच्छा जमीन जायदाद के चल रहे विवादों और शत्रु पर विजय सहित अन्य प्रकार के लाभों की प्राप्ति हो सकती है।

शिव के रुद्राभिषेक से लाभ

1. यह परिवार में धन और सद्भाव लाता है।

2. नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है और बुरे विचारों को हटाकर मन को शुद्ध करता है।

3. तमाम बुराइयों से बचाता है और मुश्किलों से निपटने की शक्ति देता है।

4. यह किसी की कुंडली में विभिन्न ग्रह दोष जैसे राहु दोष, श्रापित दोष आदि के बुरे प्रभावों को खत्म करता है।

रुद्राभिषेक के प्रकार

शिवलिंग पर जल चढ़ाने को अभिषेक कहा जाता है वेद मंत्रोच्चारण के साथ निरंतर जलधारा का प्रवाह करने की विधि को रुद्राभिषेक कहते हैं रुद्राभिषेक के कई अन्य प्रकार भी हैं रुद्राभिषेक के प्रकारों के बारे में विस्तार से जाने

रुद्राभिषेक – जल
पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, जलाभिषेक से भगवान शिव के आशीर्वाद के साथ ही हर मनोकामना की पूर्ति होती हैं।

रुद्राभिषेक – दूध
दूध से भगवान शिव का अभिषेक करने से व्यक्ति को दीर्घायु प्राप्त होती है।

रुद्राभिषेक – शहद
शहद से शिवलिंग का अभिषेक करने से भक्त को अपना जीवन पूर्ण आनंद और स्वतंत्रता के साथ जीने का आशीर्वाद प्राप्त होता है। शिव का शहद से अभिषेक करने से जीवन की सभी परेशानियों से मुक्ति मिलती है।

रुद्राभिषेक -पंचामृत
पंचामृत में 5 अलग-अलग पदार्थ जैसे दूध, दही, मिश्री, शहद और घी को एक साथ मिलाया जाता है। ये 5 पदार्थ मिलकर पंचामृत बनाते हैं। पंचामृत से शिवलिंग का अभिषेक करने पर भक्त को धन और सफलता प्राप्त होती है।

रुद्राभिषेक – घी
घी से रुद्राभिषेक करने पर आपको बीमारी या शारीरिक समस्याओं से मुक्ति व स्फूर्ति मिलती है।

रुद्राभिषेक – दही
दही से रुद्राभिषेक उन लोगों के लिए उपयोगी होता है, जो संतान प्राप्ति ​की चाह रखते हैं।

कैसे करें रुद्राभिषेक

शिवलिंग का पहले वैदिक मंत्र रुद्र सूक्तम के निरंतर जाप के साथ जल से अभिषेक करें, जिसे शिव रुद्राभिषेक मंत्र के रूप में जाना जाता है। गाय का दूध, नारियल पानी, चावल, पिसी चीनी, घी, दही, शहद, गन्ने का रस आदि अन्य वस्तुओं को एक साथ मिलाकर शिवलिंग का अभिषेक करें। वैदिक रीति के अनुसार रुद्राभिषेक करते समय प्रातः लक्ष्मी-गणेश पूजा की जाती है। इसके बाद रुद्राभिषेक मंत्र का जाप करते हुए उपरोक्त वस्तुओं का प्रयोग कर पूरे दिन शिवलिंग का अभिषेक किया जाता है। बाद में, शिवलिंग को सजाने के लिए विशेष रूप से कमल के फूलों का उपयोग किया जाता है और फूलों के अलावा, बिल्व पत्र को भी सजावट के लिए उपयोग किया जाता है। इन सभी अनुष्ठानों के बाद, अंत में 108 दीप प्रज्वलित करके आरती की जाती है और पूजा में शामिल होने वाले भक्तों के बीच प्रसाद वितरित किया जाता है।

रुद्राभिषेक की सामग्री

आइए रुद्राभिषेक में उपयोग होने वाली सामग्री के बारे में जानें।

हल्दी पाउडर – 1 पैकेट
कुमकुम – 1 पैकेट
कपूर -1 पैकेट
चंदन पेस्ट -1 पैकेट
एक पैकेट धूप
2 फूल माला
25 बेताल नट या पत्तियां
4 फूलों के गुच्छा
10 नारियल
12 केले या 5 अन्य प्रकार के फल
तौलिया या 2 गज कपड़ा
2 माला
शहद – 1 छोटी बोतल
2 कप दही
2 लीटर दूध

शिव
रुद्राभिषेक कब करें

हिंदू धर्म में किसी भी धार्मिक या मांगलिक कार्यक्रम से पहले शुभ मुहूर्त देखा जाता है। मान्यता है कि शुभ मुहूर्त में किए गए किसी भी कार्यों के सिद्ध होने की संभावना अधिक होती है। चलिए जानते हैं शिव का रुद्राभिषेक करने की सबसे अच्छी तिथि कब होती है।

– रुद्राभिषेक करने से पहले आपको शिवजी की उपस्थिति देखना चाहिए।

– शिवजी का निवास देखे बिना रुद्राभिषेक न करें।

– शिवजी का निवास तभी देखें जब मनोकामना पूर्ति के लिए अभिषेक किया जा रहा हो।

– हर महीने के शुक्ल पक्ष की द्वितीया और नवमी तिथि को भगवान शिव मां गौरी के साथ रहते हैं।

– हर माह की कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा, अष्टमी और अमावस्या के दिन भी भगवान शिव मां गौरी के साथ रहते हैं।

– कृष्ण पक्ष की चतुर्थी और एकादशी को महादेव कैलाश पर निवास करते हैं।

– शुक्ल पक्ष की पंचमी और द्वादशी तिथि को महादेव कैलाश पर ही रहते हैं।

– कृष्ण पक्ष की पंचमी और द्वादशी को शिवजी नंदी पर सवार होकर पूरा विश्व भ्रमण करते हैं।

– शुक्ल पक्ष की षष्ठी को भी शिव जी विश्व भ्रमण पर होते हैं।

– रुद्राभिषेक के लिए इन तिथियों में महादेव का निवास मंगलकारी होता है।

रुद्राभिषेक से ग्रह दोष निवारण

भगवान शिव के नाम का जाप करने से ही नवग्रह दोष निवारण हो जाता है। किसी ज्योतिषी विशेषज्ञ की सलाह से अपनी कुंडली के अनुसार और राशि को देखते हुए ग्रह दोष निवारण पूजा बेहद कारगर और फल दायक मानी जाती है।

– कुंडली में सूर्य दोष की स्थिति में शिवरात्रि के दिन शिवजी का किसी पवित्र नदी के जल से अभिषेक करें।

– चंद्र दोष की स्थिति में शिवरात्रि के दिन कच्चे दूध में काले तिल डालकर भगवान का दुग्धाभिषेक करें।

– मंगल दोष की स्थिति में गिलोय बूटी के रस से शिवलिंग का अभिषेक करें।

– बुध दोष होने पर आपको शिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर दही और मिश्री अर्पित करनी चाहिए।

– गुरू की स्थिति में कच्चे दूध में हल्दी मिलाकर भगवान का दुग्धाभिषेक करें।

– शुक्र दोष होने पर पंचामृत से भगवान शिव का अभिषेक करें।

– शनि दोष की स्थिति में शिवरात्रि पर भगवान शिव का गन्ने के रस से अभिषेक करें।

रुद्राभिषेक के मंत्र

रुद्राभिषेक भगवान शिव की सबसे प्रभावी पूजा अनुष्ठानों में से एक है। रुद्राभिषेक के दौरान शिवलिंग का पवित्र जल, दूध, रस, दही, शहद या पंचामृत जैसे पदार्थों से अभिषेक किया जाता है। जब शिवलिंग का अभिषेक किया जा रहा होता है तब मंत्रों का उच्च स्वर में जाप किया जाता है। शिवलिंग का अभिषेक करने के साथ ही साथ इन मंत्रों का जाप वातावरण में मौजूद सभी प्रकार की नकारात्मकताओं को नष्ट कर सकारात्मक ऊर्जा का आह्वान करता है। आइए रुद्राभिषेक के दौरान पढ़े जाने वाले कुछ मंत्रों के बारे में जानें।

महामृत्युंजय मंत्र

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

इसके अलावा शिव पंचाक्षर स्तोत्र के जरिए भी आप भगवान शिव का विशेष अभिषेक कर सकते हैं।

रुद्राष्टक पाठ के अलावा कई विशेष वैदिक मंत्रों के साथ भी रुद्राभिषेक पूरा किया जाता है।

यह भी पढ़े: श्रावण मास में करें यह उपाय, अवश्य लाभ देंगे शिव शंकर | THE INDIA RISE |

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