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स्कूल छोड़ चुके बच्चों को शिक्षा मंत्रालय देगा एक और मौका

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय मौजूदा स्कूल व्यवस्था में कई बड़े बदलाव करने के पक्ष में है। वास्तव में, देश भर में लाखों बच्चे स्कूल छोड़ चुके हैं। इसका मुख्य कारण छात्रों का स्कूल छोड़ना है। फिर भी हर साल लाखों छात्र वर्तमान स्कूल प्रणाली से बाहर हो जाते हैं। ऐसे छात्रों और अन्य अशिक्षित युवाओं को शिक्षा से जोड़ने के लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय अब नई पहल कर रहा है। पढ़ाई छोड़ चुके या पढ़ाई बीच में ही छोड़ चुके छात्रों की पहचान की जा रही है।

यह कार्यक्रम प्रौढ़ शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा के माध्यम से शुरू किया गया है। इसके तहत 15 साल और उससे अधिक उम्र के ऐसे युवाओं की पहचान की जा रही है जो पढ़े-लिखे नहीं हैं। ऐसे युवाओं को नई शिक्षा प्रदान करने के लिए नई शिक्षा नीति में विशेष प्रावधान किए गए हैं।

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, भारत ऐसे युवाओं के लिए वयस्क शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा के तहत ऑनलाइन और ऑफलाइन के माध्यम से शिक्षा के लिए नए संसाधन विकसित कर रहा है। खास बात यह है कि इन युवाओं को शिक्षित करने के लिए हिंदी सहित क्षेत्रीय भाषाओं का प्रयोग किया जा रहा है। इन युवाओं के लिए न केवल भारतीय भाषा में ई-कंटेंट विकसित किया जा रहा है, बल्कि शिक्षा के दिलचस्प ऑडियो-विजुअल तरीकों का भी इस्तेमाल किया जाएगा। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय और एनसीईआरटी के मुताबिक इस पूरी पहल का मकसद इन अशिक्षित युवाओं को कौशल मुहैया कराना और उन्हें बुनियादी शिक्षा से जोड़ना है।

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