Success Story

 मजदूर से अभिनेता बने दिलीप आर्या

खेतों में काम करने से लेकर अभिनय की दुनिया में उन्होंने लगाता खूब सराहना पाई

जनपद फतेहपुर के अमोली ब्लाक के गांव बिजौली से मजदूरी करने से लेकर अभिनेता की दुनिया में अपनी एक अलग पहचान बनाने वाले दिलीप आर्य ने ग्रामीण परिवेश में रहते हुए भी लोगों को एक नई पहचान दी है।आपको बता दें कि खेतों में काम करने से लेकर अभिनय की दुनिया में उन्होंने लगाता खूब सराहना पाई है। इसी के चलते आज के समय में वाह फर्श से अर्श तक की इस कहानी के नायक बन गए हैं। बिहड नेता के नाम से मशहूर हुए दिलीप आर्य ने एक नई बनाई है।
आपको बता दें कि परिवार में अधिक जनसंख्या होने के चलते दिलीप आर्य अपने पिता के साथ खेतों में मजदूरी करते थे जिन के निधन के बाद उन्होंने खुद यहां जिम्मेदारी संभाली और इस मुकाम तक पहुंचे।

इस स्तर तक पहुंचने के बाद भी दिलीप आर्य ने बताया कि मुझे गर्व है कि किस हालात में हमारे परिवार के हर सदस्य को मजदूरी करने के लिए विवश किया परंतु कभी भी परिवार के सदस्यों ने अपने आत्मसम्मान पर कभी आंच नहीं आने दी।

फिल्मी दुनिया के सफर तय करने को लेकर उन्होंने बताया कि कि मजदूरी के साथ साथ पढ़ाई भी चलती रही क्योंकि मुझे इस बात पर विश्वास था कि शिक्षा ही वह जरिया है जिससे सम्मान और आमदनी दोनों साथ में हो सकती है उन्होंने बताया कि उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्हें अभिनय के क्षेत्र में उनकी रूचि हो गई।

राजधानी लखनऊ के भारतेंदु नाट्य अकादमी में प्रवेश लेकर मैंने अभिनव की कला की बारीकी सीखी और संस्थान ने निरंतर प्रयास से मुझ में छिपे अभिनव को खोजा जिसके बाद लगाता देश के विभिन्न विभिन्न क्षेत्रों में कार्य करने का अवसर प्राप्त हुआ और एक दिन मेरी किस्मत चमकी और मुझे बांदा के कुख्यात डकैत ददुआ के जीवन पर बनी वेब सीरीज बिहार का बागी में मुख्य रोल करने का मौका मिला मैं उन सभी का आभारी हूं जिन्होंने मेरे काम को पसंद किया मेरे लिए यहां अनुभव एक सच होने जैसा है।

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