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डिजिटल इंडिया मिशन, 2G से 5G तक बीइंग डिजिटल

Digital India Mission : भारत में सरकारी लोगों के लिए काम किया करती हैं और इसीलिए कई नई–नई योजनाएं सामने लाया करती हैं। सभी योजनाओं का क्रियान्वयन पेपर पर लिखित तौर पर होता है और किसी को कम करने के लिए भारत सरकार के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक और नई पहल शुरू की।इसका नाम है, डिजिटल इंडिया मिशन (Digital India Mission ) ।

Digital India Mission


डिजिटल इंडिया (Digital India) भारत सरकार की एक पहल है जिसके तहत सरकारी विभागों को देश की जनता से जोड़ना है। देश में हर सरकारी विभाग के बारे में जनता को नहीं पता होता है ऐसा इसलिए क्योंकि कई बार ऐसा होता है कि यह सरकारी विभागों का सारा क्रियान्वयन पेपर पर होता है। और इसीलिए इस चीज को हटाकर अब डिजिटलाइज किया जा रहा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बिना कागज के इस्तेमाल के सरकारी सेवाएँ जनता तक पहुँच सकें। और यह इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से पूर्ण होगा। इसी के साथ योजना का एक उद्देश्य ग्रामीण इलाकों को उच्च गति का इंटरनेट (Internet) से जोड़ना भी है।

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डिजिटल इंडिया की भारत को डिजिटल रूप से सशक्‍त समाज बनने के लिए किया गया है । इसी के साथ भारत की अर्थव्यवस्था को ज्ञानपूर्ण अर्थव्‍यवस्‍था में परिवर्तित करने के लिए एक महत्‍वाकांक्षी कार्यक्रम के रूप में एक नई सोच की कल्पना की गई है।डिजिटल इंडिया प्रोग्राम एक एस प्रोग्राम है जिससे भारत सरकार का एक मात्र लक्ष्य यह हैं की कैसे पुरे भारतवर्ष को एक डिजिटल सशक्त बनाया जा सके।

कब है योजना और कब हुई शुरुवात?


वैसे टेक्नोलॉजी के प्रोग्राम भारत में नए नहीं हैं। भारत में 1990 से ही इंटरनेट की मदद से काफी सारा काम चल रहा है और इसे बहुत से क्षेत्रों में इस्तमाल किया जा रहा है जैसे कि रेलवे का कंप्यूटराइजेशन करना।
डिजिटल योजना की शुरुआत 1 जुलाई 2015 यानी की 6 वर्ष पहले शुरू हुई थी। भारत सरकार ने 2006 में राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस योजना (NeGP) की शुरुआत की। विभिन्न डोमेन को कवर करने वाले 31 मिशन मोड प्रोजेक्ट शुरू किए गए। देश भर में कई ई-गवर्नेंस परियोजनाओं के सफल कार्यान्वयन के बावजूद, ई-गवर्नेंस एक पूरे के रूप में वांछित प्रभाव बनाने और अपने सभी उद्देश्यों को पूरा करने में सक्षम नहीं है।


भारत सरकार ने 2006 में राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस योजना (NeGP) की शुरुआत की थी जिसमे विभिन्न प्रोजेक्ट शुरू किए गए। देश भर में कई ई-गवर्नेंस परियोजनाएं हुईं थी पर इसके बावजूद, ई-गवर्नेंस एक पूरे के रूप में अपना अच्छा खासा प्रभाव बनाने और अपने सभी उद्देश्यों को पूरा करने में सक्षम नहीं रहा है।इसी वजह से एक बार फिर से डिजिटल इंडिया का प्रोग्राम शुरू हुआ।

यह एक ऐसा कार्यक्रम है जिसके लिए सरकार ने 1,13,000 करोड़ का बजट रखा है। इस कार्यक्रम में ब्रॉडबैंड के ऊपर जोर दिया गया है।इसके तहत 2.5 लाख पंचायतों समेत छ: लाख गांवों को ब्रॉडबैंड से जोड़ने का लक्ष्य है ।सरकार इस योजना को 2017 तक पूर्ण करना चाहती थी।
बजट में मात्रा पंचायतों को ही ब्रॉडबैंड से जोड़ने पर 70 हजार करोड़ रुपए के बजट का प्रस्ताव रखा गया है।

यह काम इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और वित्त मंत्रालय के अंतर्गत आता है।डिजिटल इंडिया के तीन मुख्य काम होते हैं-

–डिजिटल ढाँचे का निर्माण करना ।
इसका अर्थ यह है कि भारत में हो रहे कई कामों को डिजिटली करना यानी कि उनकी वेबसाइट बनाना या फिर उनको कंप्यूटर पर स्टोर करना या फिर और भी कई साधन हो सकते हैं लेकिन वह डिजिटली हो।
– इलेक्ट्रॉनिक रूप से सेवाओं को देश की जनता तक पहुंचाना।
भारत देश में कई ऐसे लोग है जो कि भारत की कई योजनाओं और प्रदान की गई सेवाओं का पूर्ण रूप से लाभ नहीं उठा पाते हैं और ऐसा इसलिए होता है क्योंकि उन्हें इनके बारे में पता नहीं चल पाता। पता न चलने का मुख्य कारण यह हो सकता है यह सब बातें या तो टीवी पर आती है या फिर अखबारों में अन्यथा रेडियो पर भी कभी-कभी आते हैं। भारत में हर इंसान तीनों चीजों को मुहैया नहीं करवा सकता है लेकिन एक चीज है जो कि आजकल तकरीबन हर भारतीय के घर पर मिल सकती है। वह है मोबाइल फोन इसीलिए मोबाइल फोन की मदद से भारत में कई लोगों को सारी सेवाओं के बारे में पता चल सकता है।
–डिजिटल साक्षरता।
डिजिटल साक्षरता का यहां पर अर्थ है कि लोगों को डिजिटल चीजों के बारे में जानकारी हो। देश की काफी जनता ऐसी है जो कि इंटरनेट और इलेक्ट्रॉनिक सेवाओं से वाकिफ नहीं है। अब जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डिजिटल इंडिया की शुरुआत की है तो लोगों को डिजिटल प्रणाली के बारे में पता चलना भी बहुत ही महत्वपूर्ण हो गया है। ऐसा इसलिए क्योंकि लोगों को सारी जानकारी उनके फोन पर से ही मिल सकती है जिससे कि उनको काफी ज्यादा फायदा हो सकता है।

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क्या है उद्देश्य?


डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के प्रमुख उद्देश्य इस प्रकार हैं :

  1. ब्रॉडबैंड हाइवेज का उद्घाटन
    ब्रॉडबैंड का मतलब दूरसंचार से है।
    इसमें सूचना को बैंड्स के द्वारा भेजा जाता है क्योंकि वेवलेंथ से होती है। ब्रॉडबैंड की मदद से आप सूचना को बहुत ही आराम से एक जगह से दूसरी जगह पर भेज सकते हैं जिससे कि है और भी सुलभ हो जाती है और हर कोई इसे जान सकता है।
  2. मोबाइल कनेक्टिविटी सभी के लिए उपलब्ध करवाना।
    आजकल भारत में किसी के पास टेलिविजन ,रेडियो जैसा कुछ हो या ना हो लेकिन फोन होना हर किसी के लिए आम बात हो गई है। देशभर में तकरीबन सवा अरब की आबादी में मोबाइल फोन कनेक्शन की संख्या करीब 80 करोड़ थी।यह आंकड़े जून 2014 के हैं। बाजार में निजी कंपनियों के कारण इसकी सुविधा में पिछले एक दशक में काफी बढ़ोतरी हुई है। लेकिन महंगाई के कारण यह सभी के पास उपलब्ध नहीं हो पा रहा है और इस योजना का यही मुख्य बिंदु है की हर कोई मोबाइल इस्तेमाल करना सीख जाए ताकि सारी जानकारी उन तक आसानी से पहुंच सके।
  3. इंटरनेट एक्सेस प्रोग्राम।
    भविष्य में सभी सरकारी विभागों तक आम आदमी की पहुंच बढ़ने के लिए सभी को इंटरनेट की सुविधा के बारे में अवगत कराना और उनको इस सुविधा को प्रदान करना भी इसका एक लक्ष्य है।
  4. ई-गवर्नेस।
    प्रौद्योगिकी के जरिए सरकार को सुधारना इसका मतलब है। इसके साथ ही कई बार ऐसा होता है कि योजनाओं का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन भी किया जाता है और इसीलिए ई गवर्नेंस इसका एक महत्वपूर्ण पहलू हो जाता है। स्कूल प्रमाण पत्रों, वोटर आइडी कार्डस आदि की जहां जरूरत पड़े, वहां इसका ऑनलाइन इस्तेमाल किया जा सकता है।
  5. ई– क्रांति।
    ई– क्रांति का अर्थ है कि जितने भी सरकार द्वारा चलाई गई योजनाएं हैं उनको इंटरनेट के द्वारा ही संचालित करना। जैसे कि स्वास्थ्य ,किसान आदि जैसी चीजों को इंटरनेट के द्वारा ही संचालित करना ई– क्रांति का अर्थ है।
  6. इनफॉर्मेशन फॉर ऑल।
    इसका अर्थ यह है कि हम सब डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए सारी इनफार्मेशन यानी की सूचना ग्रहण कर सकते हैं जो कि हमारे काम को और भी अधिक आसान बना देगा।
    7.इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में आत्मनिर्भर भरता बनना।
    इलेक्ट्रॉनिक्स की कई चीजें ऐसी होती है जो कि विदेश से बनकर भारत में मंगाई जाती है लेकिन इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनना भी इसका एक उद्देश्य है। इसका मतलब यह है कि अब जितने भी इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे टीवी, मोबाइल वह सब भी भारत में निर्मित हो।यानी की इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र से जुड़ी तमाम चीजों का निर्माण देश में ही किया जाएगा। सेट टॉप बॉक्स, वीसेट, मोबाइल, उपभोक्ता और मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स, आदि को बढ़ावा दिया जाएगा।
  7. नौकरियों के लिए आईटी।
    यह मुख्य तौर पर युवाओं के लिए आईटी की शिक्षा देना है ताकि वह नौकरियां कमा सकें।
    9.अर्ली हार्वेस्ट प्रोग्राम।
    इसके तहत कई छोटे प्रोग्राम हुआ करते हैं।जैसे कि ईमेल, ई बुक्स ,आदि।

क्या हैं चुनौतियां?


डिजिटल इंडिया की शुरुआत तो बहुत ही जोरों शोरों से हुई थी लेकिन कई जगहों पर धीमी पड़ गई। ध्यान से देखा जाए तो धीमी इंटरनेट और योजना की क्रियान्वन की स्पीड हो गई ,और इसी वजह से डिजिटल इंडिया कई जगहों पर धीमा हो गया।

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