सक्सेस स्टोरी

टांगा चलाने वाले धर्मपाल गुलाटी , कैसे बन गए “मसाला राजा”

दुनिया में आज कई सारे ब्रांड हैं लेकिन हम उन सभी के बारे में नहीं जानते । वहीं कुछ ऐसे भी ब्रांड होते हैं जिनका इस्तेमाल हम भरोसे के बल पर करते हैं और वे हमारी जिंदगी का हिस्सा बन जाते हैं ।
यह कहानी है एक ऐसे ही ब्रांड ओनर ( Dharampal Gulati ) की जिन्हे हर कोई उनकी सफलता यानी की उनके मसालों के वजह से पहचानता तो है मगर इस सफलता के पीछे की कहानी नहीं जानता ।

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धर्मपाल गुलाटी ( Dharampal Gulati ) का पूरा नाम महाशय धर्मपाल गुलाटी था । यह एक भारतीय व्यापारी थे जिन्होंने “एम. डी. एच.” मसालों की शुरुआत की थी जिसका पूरा नाम “महाशियान दी हट्टी प्राइवेट लिमिटेड” है । उन्हें रेडी टू यूज ग्राउंड मसालों की शुरुआत करने के लिए “मसाला राजा” भी कहा जाता था । 2019 में उन्हें भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा हिंदुस्तान के तीसरे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पद्म भूषण से सम्मानित भी किया जा गया है ।

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प्रारंभिक जीवन

महाशय धर्मपाल गुलाटी जी का जन्म 1923 में पाकिस्तान के सियालकोट में हुआ । उनके पिताजी महाशय चुन्नी लाल गुलाटी एक सोशल ऑर्गेनाइजेशन में काम करते थे और उन्होंने “महाशियां दी हट्टी प्राइवेट लिमिटेड” नाम की एक मसाला कंपनी की भी शुरुआत की । धर्मपाल गुलाटी जी का ध्यान पढ़ाई में कभी नहीं लगा जिससे उन्होंने 5 वीं कक्षा में ही पढ़ाई छोड़ दी और अपने पिताजी के बिजनेस में उनका साथ देने लगे । आगे चल कर उन्होंने अपना योगदान भारत की आजादी के लिए भी दिया । इसके बाद 7 सितंबर 1947 को जब भारत पाकिस्तान में बटवारा हुआ तो वह अपने परिवार के साथ भारत में ही आ गए और अमृतसर के रिफ्यूजी कैंप में रहने लगे ।


घर छोड़ने के बाद उनका सब कुछ तहस–नहस हो चुका था और उनके पास पैसे भी खत्म हो चुके थे । जिससे उनके पूरे परिवार को आर्थिक संकटो का सामना करना पड़ रहा था । जिसे देख उन्होंने पैसे कामनाएं का फैसला किए और दिल्ली आ गए । दिल्ली आने के बाद भी उनकी लाख कोशिशों पर भी उन्हें नौकरी नहीं मिली ।

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अंत में उन्होंने अपने जानने वालों से कुछ पैसे उधार ले कर एक टंगा खरीदा और दिल्ली में कनॉट प्लेस से करोल बाग तक सवारी धोते , जिससे उन्हें कुछ पैसे मिल जाते ।
लेकिन वह रकम इतनी भी नहीं होती थी की वे अपने पूरे परीवार का खर्च उठा सकें ।

एम. डी. एच. मसालों की शुरुआत

जब यह तरीका भी उनके कोई काम न आया , तब उन्होंने अपने पुराने बिजनेस को ही दुबारा से शुरू करने का फैसला लिया । 1948 में उन्होंने करोल बाग में एक छोटी सी झोपड़ी में मसाला बनाना शुरू किया । अच्छी बात तो यह थी की उन्हें इस बिज़नेस के बारे में अच्छी समझ और पकड़ थी जिससे उन्हें बहुत फायदा मिला ।


एक साल बाद जब उनके पास काफी धन इकट्ठा हो चुका था उन्होंने अपने इस बिजनेस को और बढ़ाने का फैसला किया । 1953 में दिल्ली के चांदनी चौक में उन्होंने एक दुकान भाड़े पर ली और उसमें भी अपने मसालों के काम को शुरू किया ।

इसके बाद 1954 में उन्होंने भारत के पहले मॉडर्न मसाले की दुकान की शुरुआत की जिसका नाम उन्होंने रूपक स्टोर्स रखा । बाद में वह स्टोर उनके भाई सतपाल गुलाटी संभालने लगे ।
आखिर में 1959 में उन्होंने अपने मेहनत से कमाए पैसों से


खुद की मसाला फैक्ट्री खोली और उसका नाम उन्होंने एम. डी. एच. रखा ।


पारिवारिक व्यवसाय होने के कारण अब तक धर्मपाल जी को इस बिजनेस की अच्छी समझ हो चुकी थी इसलिए उनके इस फैक्ट्री को भी तरक्की करने में ज्यादा समय नहीं लगा । मसालों की गुणवत्ता के कारण एम. डी. एच. मसाले को लोग काफी पसंद करने लगे थे । अब यह मसाले न केवल भारत बल्कि स्विट्जरलैंड , यू. एस. ए. , जापान , कैनेडा , यूरोप , साउथ ईस्ट एशिया , यू. ए. ई. और सऊदी अरेबिया जैसी 100 से अधिक देशों में अपना व्यापार फैला चुका था और मसालों का निर्यात करने लगा । उस समय का सबसे अच्छा माने जाने वाला मसाला एम. डी. एच. ही था । आज भी लोग इसे खरीदते तथा इस्तेमाल भी करते हैं ।
धर्मपाल गुलाटी जी खुद अपने मसालों का विज्ञापन टी. वी. पर किया करते थे । आज भी उनके विज्ञापनों को देखा जा सकता है ।

2018 में उन्हें विनिर्माण सुविधाओ और 1,095 करोड़ के राजस्व का श्रेय दिया गया । वह सबसे तेज भुगतान करने वाले भारतीय उपभोक्ता थे । वह 21 करोड़ से अधिक कमाते थे । उन्हें ब्रांड शुभंकर , ब्रांड आइकॉन और ब्रांड एंबेसडर के रूप में सेवा देने के साथ , भारत में उद्यमी ब्रांड विपणन का नेतृत्व करने के लिए भी जाना गया ।

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एक पगड़ी , हुक मूंछ , चश्मा और मोती के हार के साथ उनकी छवि उनके कंपनी के सभी मसालों के पैकेटों और विज्ञापनों पर भी छपी थीं । एक ब्रांड एम्बेसडर के रूप में वह सबसे ज्यादा प्रिय और पसंद किए जाने वाले ब्रांड एंबेसडर मे से एक हैं ।

धर्मपाल गुलाटी जी ने प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा को आगे बढ़ाने के लिए 20 स्कूलों की स्थापना की , जिनमे एम. डी. एच. इंटरनेशन स्कूल , महाशय चुन्नीलाल सरस्वती शिशु मंदिर , माता लीलावती कन्या विद्यालय और महाशय धर्मपाल विद्या मंदिर शामिल हैं ।
उन्होंने नई दिल्ली में गरीबों के लिए 200 बिस्तर का अस्पताल और झोपड़ी में रहने वालों के लिए एक मोबाइल अस्पताल स्थापित किया ।
उन्होंने कई गरीब लड़कियों का विवाह भी अपने पैसों से करवाया था और आज वह सब खुशी से रह रही हैं ।
उनके पिता जी के नाम पर चल रहे चैरिटी , महाशय चुन्नी लाल चेरिटेबल ट्रस्ट उनकी कुछ चैरिटी पहल को प्रसारित करता है ।
2020 में COVID–19 महामारी के दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री राहत कोष को पैसे दिए और दिल्ली के केंद्र शासित प्रदेश में स्वास्थ्य कर्मचारियों को 7,500 पी. पी. ई. कीट दान किए ।
धर्मपाल जी के इन नेक सहयोग को दुनिया हेमा याद रखेगी ।

3 दिसंबर 2020 को दिल्ली के माता चानन देवी हॉस्पिटल में , धर्मपाल गुलाटी जी का निधन कार्डियक अरेस्ट से हो गया । लेकिन वह आज भी मसालों के बादशाह के नाम से जाने जाते हैं और हमें उम्मीद है की आगे भी लोग इनकी कहानी को याद कर इनसे कुछ प्रेरणा लेंगे ।

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आज की नई पीढ़ी के लिए धर्मपाल गुलाटी एक सटीक उदाहरण हैं जिन्हें देख युवा व्यापारियों और एंटरप्रेन्योरस को उनके नक्शे कदम पर चलना चाहिए । मसालों के एक विशाल व्यापार को अच्छी तरह से संभालने के बाद उन्होंने अपना बहुत बड़ा योगदान एक कुशल समाज के तरफ ही किया है ।

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