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चतुर्मास: जिसके आरंभ होते ही भगवान श्री हरि विष्णु निंद्रासन को करते हैं प्रस्थान

चतुर्मास के समय उपासना करने सी वैकुंठ लोक की होती है प्राप्ति

चातुर्मास हिन्दू धर्म का महत्वपूर्ण पर्व जगत के पालन हार श्री हरि विष्णु जो चातुर्मास के आरम्भ के साथ ही निद्रासन को चले जाते हैं। मान्यता यहाँ हैं कि श्री हरि विष्णु जी की जो भी भक्त चातुर्मास के समय उपासना करता हैं वैकुंठ लोक की प्राप्ति होती है।

भगवान विष्णु जी ने इस धरा लोक पर अपने भक्तों को संकटों से दूर रखने एवं जगत के पालन न हार के लिये 24 अवतार लिए हैं।

इस वर्ष चातुर्मास का आरम्भ 20 जुलाई से हो रहा है।

त्रेता युग में जन्म लेने वाले हैं पुरुषोत्तम श्रीराम विष्णु जी के ही अवतार हैं, जिनके नाम मात्र जपने से ही भक्तों के समस्त कष्टों का निवारण हो जाता हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान श्री हरि विष्णु के सोलह ऐसे नाम हैं।

जिन्हें जातक द्वारा जपने मात्र से ही उनकी परिस्थितियों के अनुसार जाप करने मात्र से जातकों को कई अन्य तरह के लाभों की प्राप्ति हो सकती है।

भगवान विष्णु के 16 नामों को किन-किन परिस्थितियों में जपना चाहिए,

इस संबंध में शास्त्रों में यह श्लोक भी मिलता हैं।

विष्णोषोडशनामस्तोत्रं 
औषधे चिन्तयेद विष्णुं भोजने च जनार्दनं
शयने पद्मनाभं च विवाहे च प्रजापतिम
युद्धे चक्रधरं देवं प्रवासे च त्रिविक्रमं
नारायणं तनुत्यागे श्रीधरं प्रियसंगमे
दु:स्वप्ने स्मर गोविन्दं संकटे मधुसूदनम
कानने नारसिंहं च पावके जलशायिनम
जलमध्ये वराहं च पर्वते रघुनंदनम
गमने वामनं चैव सर्वकार्येषु माधवं
षोडश-एतानि नामानि प्रातरुत्थाय य: पठेत
सर्वपाप विनिर्मुक्तो विष्णुलोके महीयते
-इति विष्णु षोडशनाम स्तोत्रं सम्पूर्णं

किन-किन परिस्थितियों में जपें भगवान विष्णु के नाम

1. औषधे चिन्तयेद विष्णुं अथार्थ दवाई लेते समय जपें- विष्णु

2. भोजने च जनार्दनं अथार्थ भोजन करते समय जपें- जनार्दन

3. शयने च पद्मनाभं अथार्थ सोते समय जपें- पद्मनाभ

4. विवाहे च प्रजापतिम शादी-विवाह के समय जपें- प्रजापति

5. युद्धे च चक्रधरं अथार्थ युद्ध के समय – चक्रधर

6. प्रवासे च त्रिविक्रमं अथार्थ यात्रा के समय जपें- त्रिविक्रम

7. नारायणं तनुत्यागे अथार्थ शरीर त्यागते समय जपें- नारायण

8. श्रीधरं प्रियसंगमे अथार्थ पत्नी के साथ जपें- श्रीधर

9. दु:स्वप्ने स्मर गोविन्दं अथार्थ नींद में बुरे स्वप्न आते समय जपें- गोविंद

10. संकटे मधुसूदनम अथार्थ संकट के समय जपें- मधुसूदन

11. कानने नारसिंहं अथार्थ जंगल में संकट के समय जपें- नृसिंह

12. पावके संकटे च जलशायिनम अथार्थ अग्नि के संकट के समय जपें- जलाशयी

13. गमने वामनं अथार्थ जल में संकट के समय जपें- वाराह

14. चैव सर्वकार्येषु माधवं अथार्थ अन्य सभी शेष कार्य करते समय जपें- माधव

15. गमन करते समय जपें- वामन

16. पहाड़ पर संकट के समय जपें- रघुनंदन

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