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क्या विपक्ष के दबाव के कारण हुआ वैक्सीन नीति में बदलाव ? बुलाया जा सकता है संसद सत्र?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते सोमवार को देश को संबोधित करते हुए टीकाकरण नीति में बदलाव किया इस दौरान उन्होंने देश के हर नागरिक को मुफ्त कोरोना टीका लगाने की बात की है, आपको बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस ऐलान के बाद विपक्षी दल सुप्रीम कोर्ट की पहली जीत मान रहें हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन के बाद विपक्षी पार्टियों के कई नेताओं ने इसे सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी और राज्य सरकार द्वारा बनाया गया दबाव बताया। दरअसल विपक्षी दलों का यह मानना है कि कोरोना वायरस महामारी की दूसरी लहर के कहर और किसानों का आंदोलन 6 महीने से अधिक लंबा खींच जाने के बाद देर सवेर सरकार को कृषि कानूनों पर भी लचीला रुख अपनाना पड़ेगा।

change in vaccine policy

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि केंद्र सरकार द्वारा लाए गए नई कृषि कानूनों पर भी जमकर विरोध हुआ था जो अभी भी चल रहा है किसान नेताओं की मांग है कि तीनों कृषि कानूनों को वापस लिया जाए जिसको लेकर देश में कई हिस्सों पर किसान आंदोलन देखने को मिला आंदोलन के दौरान कई नए चेहरे भी निकल कर सामने आए जो कृषि कानून को किसान विरोधी कानून बताकर इसे वापस लेने की मांग कर रहे हैं, ऐसे में विपक्ष ने भी सरकार को निशाने पर रखा हुआ है। और वैक्सीन नीति में बदलाव को अपनी जीत मानते हुए विपक्ष कृषि कानूनों पर भी ऐसा ही दबाव बना के कानूनों को वापस करवाने के प्रयास में है।

कांग्रेस ने की रोडमैप स्पष्ट करने की मांग

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन पर कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने वैक्सीन नीति पर निशाना साधा था उन्होंने ट्वीट करके कहा था की वैक्सीन की क़ीमत निजी अस्पताल क्यों वसूल रहे हैं जब यह सब के लिए मुफ्त है । इसी को लेकर अब संसद में वैक्सिन नीति का रोड मैप स्पष्ट करने की मांग करते हुए कई सवाल खड़े किए गए हैं।

कांग्रेस के बड़े नेताओं के पत्रों का दिया हवाला

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई वैक्सीन नीति में बदलाव के बाद कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने पीएम की घोषणा को लेकर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की और कहा की पार्टी के बड़े नेताओं की बार-बार सभी लोगों का मुफ्त टीकाकरण करने के लिए उठाई गई आवाज ने सरकार को अपनी वैक्सीन नीति में बदलाव करने के लिए मजबूर किया है इसी क्रम में उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह कांग्रेस पार्टी की अध्यक्ष सोनिया गांधी और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी की तरफ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे गए पत्रों का हवाला भी दिया।

जयराम ने कहा कि विपक्ष के 12 बड़े नेताओं के संयुक्त पत्र में भी यही बात कही गई थी,और आखिरकार सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख के बाद सरकार कुंभकर्णी नींद से जागी और प्रधानमंत्री को वैक्सीन नीति में बदलाव की घोषणा करनी पड़ी। कांग्रेस समेत कुछ अन्य दलों के वरिष्ठ नेताओं ने अनौपचारिक बातचीत में कहा कि कृषि कानूनों की खिलाफत में भी विपक्ष इसी रणनीति पर चलेगा।

अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 फीसद वैक्सीनेशन की जिम्मेदारी निजी अस्पतालों को देने की बात कही जिस पर अस्पतालों द्वारा तय किए गए शुल्क पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता जयराम ने कहा कि सरकार टीकाकरण की डेडलाइन के पीछे नहीं बल्कि हेड लाइन के पीछे भाग रही है उन्होंने यह भी कहा कि सभी जगह मुफ्त वैक्सीन लगाई जानी चाहिए और CoWIN App पर पंजीकरण की अनिवार्यता भी खत्म की जानी चाहिए क्योंकि करोड़ों लोगों विशेषकर ग्रामीणों को डिजिटल प्लेटफॉर्म सुलभ नहीं है।

टीकाकरण नीति पर संसद सत्र बुलाने की मांग

प्रधानमंत्री के संबोधन के बाद टीकाकरण की नीति पर संसद में चर्चा किए जाने की जरूरत बताते हुए कांग्रेस पार्टी ने विशेष सत्र बुलाने की मांग की है पार्टी द्वारा कहा गया है कि इसके लिए आवश्यक बजट तय करना होगा वैक्सीन के लिए बजट में 33000 करोड रुपए का प्रावधान है और नए ऐलान के बाद 50000 करोड रुपए की जरूरत का अनुमान लगाया जा रहा है ऐसे में संसद में वैक्सीन नीति और बजट पर चर्चा जरूरी है

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वैक्सीन वितरण में न हो भेदभाव

वैक्सीन वितरण में किसी तरह का भेदभाव नहीं किए जाने की बात उठाते हुए जयराम ने कहा कि भाजपा शासित राज्यों को टीका उपलब्ध कराने में तवज्जो दिए जाने का उदाहरण देखा गया है। इसलिए सरकार को सहकारी संघवाद का अनुसरण करते हुए राज्यों को पक्षपात किए बिना टीका मुहैया कराना चाहिए ताकि इस साल दिसंबर तक सभी को वैक्सीन लगाने का लक्ष्य हासिल किया जा सके।

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