ayodhya temple construction has begun

 राम मंदिर का निर्माण शुरू हो चुका है। गुरुवार को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की दिल्ली में बैठक हुई ट्रस्ट के महासचिव और विश्व हिन्दू परिषद के नेता चंपत राय ने कई जानकारियां साझा की हैं

 

● भूकंप से बचाने के लिए परंपरागत तकनीकों से निर्माण होगा। 

 

● पत्थरों को जोड़ने के लिए 10 हजार तांबे की पत्तियों का होगा इस्तेमाल 

 

● दानकर्ता पत्तियों पर अपना नाम गुदवा सकते हैं। 

 

● पूरे मंदिर के निर्माण में लोहे का इस्तेमाल नहीं होगा। 

 

● 36 से 40 महीने में मंदिर निर्माण कार्य पूरा होने की उम्मीद 

 

अयोध्या में अब राम मंदिर का निर्माण शुरू हो चुका है। गुरुवार को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की दिल्ली में बैठक हुई। इस दौरान ट्रस्ट के महासचिव और विश्व हिन्दू परिषद के नेता चंपत राय ने कहा की मंदिर निर्माण में 10 हजार तांबे की छड़ों का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि जो भी लोग मंदिर निर्माण के लिए मदद करना चाहते हैं वो तांबा दान कर सकते हैं। जानकारी के मुताबिक, तांबा जंग लगने से बचाता है, जो कि निर्माण को हजारों सालों तक टिकाए रखेगा। इसी तरह की परत स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी (न्यूयॉर्क) पर भी देखी जा सकती है।

 

ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का कहना है कि मंदिर के निर्माण के लिए करीब 36 से 40 महीने का अनुमान लगाया जा रहा है। मंदिर करीब एक हजार वर्ष तक चले इनके लिए कई इंतजाम किए जा रहे हैं। मंदिर में इसलिए सिर्फ पत्थर और तांबे का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि मंदिर की प्रकिया में IIT चेन्नई और केंद्रीय भवन अनुसंधान संसाधन के सदस्यों से राय ली जा रही है। मंदिर की डिज़ाइन तो पहले ही बन गई है, लेकिन कुछ बदलाव के लिए इस पर भी चर्चा चल रही है।

 

ayodhya temple construction has begun

 

जमीन की क्षमता की जांच IIT चेन्नई के इंजीनियर करेंगे साथ ही मंदिर को भूकंप से बचाने के लिए भी सलाह ली जा रही हैं।

 

मंदिर में लगने वाले पत्थरों को जोड़ने के लिए ताबें का इस्तेमाल किया जा रहा है। निर्माण के लिए 18 इंच लंबी, 3 मीमी गहरी  और 30 मीमी चौड़ी 10 हजार ताबें की पत्तियों की आवश्यकता पड़ेगी। ट्रस्ट के कहना है कि तांबा दान करने वाले लोग अपना नाम या क्षेत्र का नाम भी गुदवा सकते हैं।

ताबें की यह पत्तियां न केवल देश की एकात्मता का अभूतपूर्व उदाहरण बनेंगी, बल्कि मंदिर निर्माण में सम्पूर्ण राष्ट्र के योगदान का प्रमाण भी बनेंगी।

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