Uttarakhand

बिना जेलर और डिप्टी जेलर के अल्मोड़ा जेल बन रही कुख्यात अपराधियों की पनाहगार

अल्मोड़ा । उत्तराखंड के अल्मोड़ा जेल अब कुख्यात अपराधियों की पनाहगार बनी चली जा रही है। उसकी बड़ी वजह से है जेल में पदों की रिक्ति का होना। क्योंकि न तो जेल में जेलर है और न ही कोई सीसीटीवी कैमरे की व्यवस्था की गई है। इसकी वजह से जेल में कैदी रंगदारी , नशे का कारोबार खुले आम कर रहे है। इसी के चलते जेल में कैदी सुधरने के बजाय और बिगड़ रहे है।

 

बीते कुछ समय पहले अल्मोड़ा जेल खबरों में बनी हुई थी। इसकी वजह है रंगदारी और हत्या के षंडयंत्र है। जेल के भीतर नशे का धंधा जोरो पर है। पर इस सब का जिम्मेदार जेल प्रबन्धन ही है। यदि अल्मोड़ा जेल की क्षमता की बात करें तो इसकी क्षमता सिर्फ 102 कैदियों को रखने की है, पर वर्तमान में जेल में 325 बंदी और कैदी रखे गए हैं।

 

अल्मोड़ा जेल में जेलर का पद ही रिक्त है। जेल में चार डिप्टी जेलर होने चाहिए, लेकिन वर्तमान में केवल एक ही डिप्टी जेलर है। यही हाल बंदी रक्षकों का है। 48 पदों के सापेक्ष केवल 32 बंदी रक्षक हैं और 16 पद रिक्त है। जिससे कई बार जेल के अंदर हालात को नियंत्रित करने में खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

जेल में एक भी सीसीटीवी कैमरा नहीं

काफी समय से जेल में सीसीटीवी लगाने की मांग की जा रही है।  जेल प्रशासन की ओर से 16 सीसीटीवी कैमरो की मांग की गईं थी। लेकिन अभी तक जेल में एक भो सीसीटीवी नहीं लगाया गया है।

जैमर न होने का फायदा उठा रहे कैदी

इसके साथ ही जेल प्रशासन के अनुसार यदि जेल में जैमर लग जाता है तो कोई भी मोबाइल इस्तेमाल करने पर लगाम लग सकती थी। लेकिन वो व्यवस्था भी नही करवाई गयी। जिसका फायदा उठा कर कुख्यात अपराधी अंदर बैठे बैठे अपने मकसद को अंजाम दे रहे है।

 

 

 

 

 

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