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AGROHOMEOPATHY: किसानों की आमदनी दोगुनी करने के मिशन पर निकले डॉक्टर ने आम, अमरूद और सब्जियों को कीटों से बचाया, फलों के राजा आम को खूब पसंद आई होम्योपैथी

THE INDIA RISE
मौसम और बीमारी की मार से परेशान आम उत्पादकों को होमियोपैथी से बड़ा सहारा मिला है। आंधी-बारिश के चलते फसल को पहले ही नुकसान पहुंच चुका था। बची-खुची फसल पर कीटों ने हमला किया तो फल उत्पादकों की बेचैनी बढ़ गई। ऐसे में होमियोपैथी के इलाज से कीट मर गए। अब लॉकडाउन में फलों के राजा आम की फसल पूरी तरह तैयार हैं। वह भी कीटों से पूरी तरह मुक्त।
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कीटों से परेशान आम की दोस्त बनी होम्योपैथी
आम की फसल पर इस बार हॉपर कीट का हमला हुआ था। पाउडरी मिलड्यू जैसी बीमारियों से ग्रस्त होने के चलते आम बेहद कमजोर होकर गिर रहे थे। पेड़ों और फल पर किसी तरह की कोई चमक भी नहीं थी। जिले के तमाम किसानों ने होम्योपैथी डॉक्टर विकास वर्मा से संपर्क साधा। डॉ विकास ने अपनी दवा की छिड़काव किया। मात्र 10 दिन बाद देखने मे जो आया वो किसी चमत्कार से कम नहीं था। मौसमी बदलाव के बाद भी आम की बीमारी दूर हो गई। अमरूद की फसल पर भी दवा का बहुत लाभ हुआ। यहां तक बैगन, कद्दू, लौकी, ककड़ी टमाटर शिमला मिर्च आदि सब्जियों में बीमारी एक दम रुक गयी। किसानों को जितनी खुशी फसल बचने की है उतनी ही खुशी इस बात की है अब होम्योपैथी से संरक्षित खेती कर बिना जहर की फसलें उग पा रही हैं।
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90 फीसदी आम की फसल ठीक हो गई होम्योपैथी से
उन्नतशील किसान पीपी सिंह कहते है कि हमने बाजार में मिलने वाली अच्छी से अच्छी दवा लगा ली थी। कोई लाभ न मिलते देख हार मान ली थी। जिन दवाओं से हर वर्ष बीमारी रुक जाती थी, वो भी बेअसर साबित हो रही थी। हमने तो फसल डूबी मान ली थी। डॉ विकास की दवा का असर जादू की तरह हुआ। आम का गिरना 90 प्रतिशत तक रुक गया। पेड़ और फल में चमक आ गई। ठेकेदार सुहैल ने बताया कि पूरे देश में आम झड़ने की समस्या से किसान पीड़ित है और महंगी से महंगी खतरनाक रासायनिक दवाओं के उपयोग के उपरांत भी बीमारियों ने रुकने का नाम नहीं लिया। ऐसे में यह एक चमत्कार ही है।

अमरूद के बाद में कीटों का हमला, होम्योपैथी से भागे
ग्राम रहपुरा के रहने वाले किसान मथुरा प्रसाद अमरूद  की फसल में मिलीबग से परेशान थे। अमरूद में फूल तो अच्छा आया मगर अमरूद आते ही झड़ जा रहा था। दवा लगाने के बाद कीट ने भी धीरे धीरे खाना छोड़ दिया और पांच दिन में बिल्कुल अशक्त हो कर गिर गया। अब हमारी फसल बिल्कुल कीट मुक्त है और फूल भी नहीं गिर रहा। उम्मीद है फल भी अच्छा आएगा। मथुरा प्रसाद का कहना है कि रासायनिक दवा लगाते समय अपनी सेहत की भी चिंता होती है। कई बार एलर्जी हो जाती है। होमियोपैथी दवा से कोई हानि नहीं है।
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बीमार सब्जियां होम्योपैथी से लहलहा उठीं
किसान पीपी सिंह ने सब्जियों की भी खेती कर रखी है। इनमें भी काफी कीट लग गए थे। जैविक कृषि से उत्पादन होने के कारण वो रसायन का प्रयोग कर नहीं सकते थे। बाजार में उपलब्ध सभी प्रसिद्ध जैविक प्रोडक्ट्स को आजमाने बाद भी नतीजा सिफर रहा। डॉ विकास वर्मा ने निरीक्षण उपरांत दवा लगाने को दी। दवा लगाते ही बैगन, कद्दू, लौकी, ककड़ी टमाटर शिमला मिर्च आदि में बीमारी एक दम रुक गयी। फसल लहलहा रही है। सब्जियों की गुणवत्ता भी अच्छी हो रही है।

फसलों को बीमारियों से बचाने के लिए क्या कर रहे डॉ. विकास, जानने के लिए देखें यह वीडियो
https://www.youtube.com/watch?v=u0tUjbYF0Us&t=14s

किसानों की आमदनी दोगुनी करने और जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए होम्योपैथी सबसे कारगर विधा है। दुनिया के तमाम देश एग्रीहोम्योपैथी और एग्रो होम्योपैथी अपना रहे हैं। धीरे-धीरे हमारे देश के किसानों की समझ में भी यह बात आने लगी है। अच्छी और सेहतमंद फसल और धरती के लिए यह बेहतर संकेत है।
–डॉ. विकास वर्मा, प्रगतिशील किसान व होम्योपैथिक चिकित्सक

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