हिंदुओं में व्रत को काफी ज्यादा महत्व दिया गया है लेकिन आज के समय में लोग अपने पूर्वजों से सीखते सीखते व्रत तो रखने लगे हैं मगर उन्हें वह जानकारी नहीं है जो उन्हें होनी चाहिए थी हम अक्सर व्रत में सेंधा नमक का सेवन करते हैं। लेकिन क्यों क्या आपने कभी यह सोचा है? अगर नहीं तो आज हम आपको बताएंगे कि आखिर व्रत में सादा नमक का सेवन छोड़ सेंधा नमक का सेवन क्यों करना शुरू कर देते हैं।

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हिंदू कैलेंडर के अनुसार इस वक्त चैत्र का महीना चल रहा है और नवरात्रि का त्यौहार हिंदू बड़े धूमधाम से मनाते हैं 9 दिन तक देवी माता की आराधना की जाती है और 9 दिन तक व्रत रखकर देवी की उपासना की जाती है। नवरात्रि में रखे जाने वाला यह व्रत खाद सामग्री पर निर्भर करता है वह खाद सामग्री जो खाई जाती है।

इन सामग्रियों में एक नाम सेंधा नमक का भी है, व्रत के दौरान सेंधा नमक का खाए जाना एक खास वजह को दर्शाता है। तो चलिए जानते हैं कि वह क्या खास कारण है जिनके वजह से व्रत के दौरान सेंधा नमक का सेवन किया जाता है।

ठंडक देता है सेंधा नमक

व्रत में खाया जाने वाला सेंधा नमक अपने शीतल गुणों के लिए काफी प्रसिद्ध है क्योंकि आंखों के लिए काफी अच्छा होता है इतना ही नहीं यह आपके ब्लड प्रेशर के स्तर को बनाए रखने में काफी मददगार साबित हो सकता है इसमें आयरन मैग्नीशियम सहित कई अन्य खनन शामिल होते हैं नवरात्रि में आमतौर पर घर में व्रत रखने वाले व्यक्ति सेंधा नमक का ही इस्तेमाल करते हैं इस्तेमाल लोग आमतौर पर नहीं करते। साथ ही यह नमक शरीर को ठंडा रखने में काफी सहायता करता है और व्रत के दौरान शरीर कमजोर पड़ने लगता है जिससे यह नमक शरीर में ठंडक पैदा कर शरीर को कमजोर होने से रोकता है।

शरीर को रखें मजबूत

व्रत में कम खाने से इंसान के शरीर में कमजोरी आने लगती है ऐसे में सेंधा नमक शरीर को मजबूत बनाने में सहायता करता है , आमतौर पर व्रत में सेंधा नमक का ही सेवन किया जाता है और साथ में नमक को गलती से छुआ भी नहीं जाता इसका कारण यह है कि सादा नमक को सी साल्ट कहा जाता है ऐसा इसलिए क्योंकि ये समुद्री नमक होता है इससे शुद्ध या डिफाइन करने के लिए कई तरीके की प्रक्रिया के बाद वास्तविक रूप में खाने के लिए बनाया जाता है।

नवरात्रि साल में 2 बार आती है लेकिन जिस मौसम में आती है उस वक्त मौसम बदलने का समय हो जाता है इस दौरान व्रत करने से जलवायु परिवर्तन का सामना करने के लिए शरीर की इम्युनिटी बनाए रखने में सेंधा नमक काफी मदद करता है सेंधा नमक का शुद्धतम रूप माना जाता है सेंधा नमक को पहाड़ी नमक या रॉक साल्ट कहां जाता है जिस वजह से इसे पूर्ण रूप से शुभ माना जाता है यह ना केवल कम खारा होता है बल्कि आयोडीन युक्त भी होता है।

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क्यों होता है फायदेमंद ?

रक्त के दौरान हम काफी देर तक खाली पेट रहते हैं सामान में मत की तुलना में सेंधा नमक हल्का होता है और यह पाचन तंत्र को मजबूत कर देता है, इसके अलावा शादी नमक के मुकाबले यह नमक कम खारा होता है इसलिए यह ब्लड प्रेशर जैसी दिक्कतों को होने से रोकता है , वही ऐसा भी कहा जाता है कि यह नमक इम्यूनिटी को मजबूत करता है इसीलिए कोरोना वायरस काल में इस नमक को घरेलू नुस्खे के रूप में इस्तेमाल किया जाता है ताकि संक्रमण से बचा जा सके।

सेंधा नमक की खास बात यह है कि यह आपके खाए हुए भोजन में आवश्यक पोषण के तत्व और खनिजों को अवशोषित करने में शरीर को सहायता देता है शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स को बनाए रखता है जो आपके दिन भर ऊर्जा देता है और आपको व्रत के दौरान कम खाने पर भी कमजोरी महसूस नहीं होती है।

कैसे बनता है सेंधा नमक?

दरअसल सेंधा नमक बनता नहीं वह पहले से बना बनाया होता है पूरे उत्तर भारतीय उपमहाद्वीप मैं हसीन पत्थर के नमक को सेंधा नमक या सेंधा नमक लाहौरी नमक अधि अधि नाम से जाना जाता है । इसका मतलब है सिंध या सिंधु के इलाक़े से आया हुआ वहां नमक के बड़े बड़े पहाड़ हैं सुरंगे हैं वहां यह नमक आता है मोटे मोटे टुकड़ो मे होता है आजकल पीसा हुआ भी आने लगा है यह हृदय के लिए उत्तम होता है।

सेंधा नमक बनाने के लिए किसी तकनीक या केमिकल का इस्तेमाल नहीं किया जाता है यही कारण है कि लोग इसे व्रत में इस्तेमाल करते हैं यह नमक दूसरे नमक के मुकाबले शुद्ध होता है सेंधा नमक पूरी तरह से प्राकृतिक होता है इसीलिए इस नमक को स्वास्थ्य के लिहाज से सबसे सही माना जाता है। सेंधा नमक तब बनता है जब समुद्र या झील के किनारे वाला खारा पानी सोडियम क्लोराइड के रंगीन क्रिस्टल को छोड़ता है।

एक वक्त था जब भारत में 1930 से पहले कोई भी समुद्री नमक यानी साधे नमक को नहीं खाता था विदेशी कंपनियां भारत से नमक के व्यापार में आजादी से पहले उतरी हुई है उनके कहने पर ही भारत के अंग्रेजी प्रशासन द्वारा भारत की भोली-भाली जनता को आयोडीन मिलाकर समुद्र नमक खिलाया जाने लगा तब से लेकर आज तक यह नमक भारत के घर-घर में मौजूद है। और सेंधा नमक व्रत के दौरान ही अब भारत के अंदर घरों में खाया जाता है।

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आयुर्वेद में है ज़िक्र

पुरानी आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति में भी भोजन में सेंधा नमक के ही इस्तेमाल की सलाह दी गई है। भोजन में नमक व मसाले का प्रयोग भारत, नेपाल, चीन, बंगलादेश और पाकिस्तान में अधिक होता है। आजकल बाजार में ज्यादातर समुद्री जल से तैयार नमक ही मिलता है। जबकि 1960 के दशक में देश में लाहौरी नमक मिलता था।

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