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प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना

भारत देश में सरकारों का काम जनता के लिए काम करना होता है। देश के संचालन का पूरा बीड़ा ये सरकारें अपने कंधों पर उठाती हैं जिनके लिए वो कई कदम उठाया करतीं हैं। कई ऐसी योजनाएं हैं जिससे देश के लोगों को भरपूर फायदा होता है।ऐसी ही एक योजना है “प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना” (Pradhanmantri Ujjwala Yojana)। यह योजना महिलाओं को सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण में भोजन पकाने की उपलब्धता को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से शुरू की गई थी। आज हम आपको इसी योजना के बारे में जानकारी देंगे।


क्या है उज्ज्वला योजना?

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भारत सरकार द्वारा शुरू की गयी एक बहुत ही लाभकारी योजना है। उज्ज्वला योजना के अंतर्गत भारत सरकार भारत के लोगों को एलपीजी कनेक्शन उपलब्ध कराएगी। इसके साथ ही भारत सरकार ने लोगों के फायदे के लिए और भी कई प्रयास किए हैं।यह एलपीजी कनेक्शन केवल गरीबी रेखा से नीचे यानी कि “बिलो पॉवर्टी लाइन” ( Below Poverty Line) के परिवारों से सम्बंधित महिलाओं को दिया जाएगा। केंद्र सरकार द्वारा शुरू की यह योजना गरीब महिलाओं को मिट्टी के चूल्‍हे से आजादी दिलाएगी।


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना’ की शुरुआत 1 मई 2016 को उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से की थी। इस योजना की टैगलाइन ” स्वच्छ ईंधन, बेहतर जीवन ” है। इस योजना का फायदा वह महिलाएं उठा सकती हैं जिनकी उम्र 18 वर्ष से अधिक है और जिनके पास बैंक खाता और बीपीएल कार्ड है।

इस योजना में गैस सिलेंडर के अलावा बीपीएल परिवारों के लिए और भी लाभ हैं। सभी परिवारों को एक एलपीजी कनेक्शन के लिए 1,600 रुपये की वित्तीय सहायता भी सरकार के द्वारा उपलब्ध कराई जाती है। इन 1,600 रुपयों से कनेक्शन की कीमत में एक सिलेंडर, प्रेशर रेगुलेटर, एक बुकलेट, सेफ्टी हाउस आदि शामिल होता है। और इसे भी सरकार वहन करती है। इस योजना में सभी परिवारों को अपने गैस चूल्हा यानी की गैस स्टोव (Gas Stove) का खर्चा खुद ही उठाना पड़ता है।

क्या है उज्ज्वला योजना की आवश्यकता?

एक अध्ययन के हिसाब से भारत में पारंपरिक चूल्हों या स्टोव पर लकड़ी या दूसरे ईंधन के ज़रिए खाना पकाने की वजह से लोगों को कई असुविधाओं का सामना करना पड़ता है। चूल्हे से निकलने वाला धुआं फेफड़ों में जाता है जिसकी वजह से लोग इस धुएं के कारण पैदा होने वाली बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं। इसी वजह से सालाना औसतन एक लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो जाती है। गैर-सरकारी संगठनों के मुताबिक, यह तादाद इससे भी कहीं ज्यादा है। सकेंड साइट नामक संस्था के सर्वे के अनुसार चूल्हे के धुएं से यहां के लोगों के आंखों की रोशनी जा रही है। अस्थमा, फेफड़ों का कैंसर ,आदि जैसी कई बीमारियां चूल्हे से निकलने वाले धुएं की वजह से ही होती हैं।


बीमारियां ही नहीं इसकी वजह से पर्यावरण को भी काफी नुकसान पहुंचता है। जंगल की लकड़ियां काटने की वजह से देश में पर्यावरण की समस्या भी और गंभीर हुई है।


क्रिसिल का एक सर्वेक्षण हुआ जिसमें 13 राज्यों के 120 जिलों में एक लाख से ज्यादा लोगों को शामिल किया गया। सर्वेक्षण के बाद दी गई रिपोर्ट में कहा गया था कि 86 फीसदी लोगों के मुताबिक उनके लिए एलपीजी एक महंगा सौदा है। इसी वजह से खाना पकाने के लिए वो लकड़ी और कोयले जैसे ईंधनों पर ही निर्भर रहा करते हैं।यही वजह है कि उज्ज्वला योजना लोगों के लिए एक वरदान बनकर उभरी।

क्या है उद्देश्य और किसको फायदा?

उज्ज्वला योजना का मुख्य उद्देश्य भारत में स्वच्छ ईंधन जैसे एलपीजी (Liquified Petroleum Gas) के उपयोग को बढ़ावा देना है।शुरुवाती दौर में इस योजना का मुख्य लक्ष्य 5 करोड़ कनेक्शन उपलब्ध कराना था। सरकार ने इस लक्ष्य को पूरा करने समय मार्च 2019 निर्धारित किया था। लेकिन अच्छे काम के चलते यह लक्ष्य निर्धारित समय से सात महीने पहले ही 2018 में पूरा कर लिया गया था।


बाद ने इस योजना का दूसरा चरण बढ़ा कर 8 करोड़ कनेक्शन कर दिया गया था। इस लक्ष्य को भी जल्द ही पूरा कर लिया गया। यह विश्व का एक अनोखा रिकॉर्ड है जिसकी हर जगह सराहना हुई।डब्ल्यूएचओ और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा संस्थान ने भी इसकी तारीफ की।


इस योजना में खास ध्यान महिलाओं पर दिया गया है।इससे महिलाओं और घर के सदस्यों के स्वास्थ्य की चूल्हे के धुएं से होने वाली अनेक बीमारियों से सुरक्षा की जा सकती है।इसका एक उद्देशय यह भी है कि इससे महिला सशक्तिकरण को काफी बढ़ावा मिलेगा।


इस योजना में ‘गिव इट अप’ सब्सिडी कैंपेन भी था। इसके अनुसार लोग खुद चाह कर अपनी सब्सिडी का त्याग कर सकते हैं।अभी तक इस कैंपेन के जरिये एक करोड़ से ज्यादा लोगों ने गैस सब्सिडी को अपने आप छोड़ा है। इसी वजह से करीब 5000 करोड़ रुपये की बचत हुई है।


योजना के लिए सरकार का बजट


भारत सरकार ने योजना के कार्यान्वयन के लिए पहले चरण में कुल 8000 करोड़ रूपए का बजट बनाया था। यह बजट 2016 से 2019 तक यानी कि 3 साल के लिए था। वित्त वर्ष 2016-17 के लिए भारत सरकार के पूर्व वित्त मंत्री श्री अरुण जेटली जी ने पहले ही 2000 करोड़ रूपए चिन्हित किए थे।वहीं योजना का वित्त पोषण अथवा योजना पर खर्च होने वाला पैसा लोगो द्वारा छोड़ी गई सब्सिडी में बचाए गए पैसे से होगा।


कैसे और कौन कर सकते हैं आवेदन?

इस योजना के लिए आवेदन करने का तरीका बहुत ही आसान रखा गया है।जो भी उम्मीदवार योजना का फायदा उठाना चाहते हैं उन्हें योजना का आवेदन पत्र भरकर अपने नजदीकी एलपीजी (LPG) वितरण केंद्र में जमा कराना है। योजना का आवेदन पत्र LPG वितरण केंद्र से मुफ्त में प्राप्त किया जा सकता है। इसी के साथ डिजिटल इंडिया के तहत यह आवेदन पत्र ऑनलाइन भी डाउनलोड किया जा सकता है। इस आवेदन पत्र में आप अपने सिलेंडर का चयन भी कर सकते हैं।आवेदन पत्र हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओँ में उपलब्ध है जोकि इसे और आसान बनाता है।


इस योजना के लिए आवेदक की उम्र 18 साल या इससे अधिक होनी चाहिए।इसी के साथ आवेदक BPL परिवार से सम्बन्ध रखने वाली महिला होनी चाहिए। इस योजना के लिए पुरुष आवेदन नहीं कर सकते। इसकी एक और शर्त यह है कि आवेदक के घर में किसी के नाम से पहले से ही कोई भी एलपीजी कनेक्शन नहीं होना चाहिए। आवेदन पत्र भरने के लिए आवेदक के पास गरीबी रेखा से नीचे प्रमाण पत्र अथवा बीपीएल का राशन कार्ड भी होना आवश्यक है।


इस योजना के आवेदन पत्र के साथ कई दस्तावेजों और चीजों की भी आवश्यकता पड़ेगी। ये दस्तावेज और चीज़े हैं –पंचायत अधिकारी या नगर पालिका अध्यक्ष द्वारा अधिकृत बीपीएल प्रमाणपत्र या फिर बीपीएल का राशन कार्ड, एक फोटो आईडी( यह आधार कार्ड (Aadhar Card) या मतदाता पहचान पत्र हो सकता है), एक पासपोर्ट साइज फोटो,ड्राइविंग लाइसेंस, लीज करार, टेलीफोन, बिजली या पानी का बिल, पासपोर्ट की प्रति, राजपत्रित अधिकारी द्वारा सत्यापित स्व-घोषणा पत्र, आवास पंजीकरण दस्तावेज, LIC पालिसी, बैंक / क्रेडिट कार्ड स्टेटमेंट। आवेदन के लिए इनमे से कुछ चीजों का होना आवश्यक है।
2021 में उज्ज्वला योजना


बजट 2021 (Budget 2021) में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने उज्ज्वला योजना (Ujjwala Yojana) के तहत और अधिक घोषणाएं की। उन्होंने 1 करोड़ और गैस कनेक्शन देने का ऐलान किया है। वित्त मंत्री ने कहा है कि मुफ्त रसोई गैस एलपीजी योजना यानी की उज्ज्वला योजना का विस्तार किया जाएगा। इसके अंतर्गत एक करोड़ और लाभार्थियों को इसके दायरे में लाया जाएगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार एक विकास वित्त संस्थान यानी डीएफआई (DFI) स्थापित करेगी। इसकी पूर्ति के लिए 20,000 करोड़ रुपये की पूंजी दी जाएगी।

क्या हैं योजना में समस्याएं और चुनौतियां?

सरकार के द्वारा शुरू की गई यह योजना काफी सराहनीय है लेकिन साथ ही साथ इसकी कई दिक्कतें भी हैं। कई जगहों पर इस योजना के तहत सब्सिडी की रकम मिलने में बैंक खातों की समस्या सामने आ रही है। कहीं डीलर ऐसे लोगों से ज्यादा पैसे वसूल रहे हैं। गरीब परिवारों को कनेक्शन लेने पर पहले रिफिल करवाने पर सब्सिडी और मासिक किस्तों में भुगतान की सुविधा है। लेकिन उसके बाद परेशानी आती है क्योंकि उनको अपने खर्च पर सिलेंडर खरीदना होता है। आज के मौजूदा हालातों में बढ़ती सिलेंडर की कीमतों से सभी वाकिफ होंगे ही और इससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है की इससे गरीब परिवारों के लिए सिलेंडर बार–बार रिफिल करवाना कितना कठिन होता होगा। योजना के बाद देश में एलपीजी कनेक्शनों की तादाद में 12.26 फीसदी की वृद्धि हुई लेकिन गैस सिलेंडरों का इस्तेमाल महज 9.83 फीसदी ही बढ़ा। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि बीपीएल परिवार बाद में सिलेंडर रिफिल करवाने में असक्षम रहे।


यही नहीं लोगों ने भी इस योजना का गलत तरीके से फायदा उठाने का खूब प्रयास किया है। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि उज्ज्‍वला योजना के अंतर्गत 13.96 लाख उपभोक्ताओं ने एक महीने में 3 से 41 बार तक एलपीजी सिलेंडर रीफिल कराएं हैं।वहीं योजना के नियमों पर गौर किया जाए तो इसके मुताबिक कनेक्शन की वैधता केवल एक सिलेंडर तक ही सीमित है।

उपसंहार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने उज्जवला योजना शुरू कर भारत के लोगों के स्वास्थ्य के प्रति अपनी चिंता व्यक्त की। महिलाओं के लिए मुख्य तौर पर शुरू की गई यह योजना अपने लक्ष्य को पाने में कार्यरत है। हालांकि योजना को पूरा होने में कई दिक्कतें भी सामने आ रही हैं परंतु सरकार का सराहनीय काम कई लोगों के जीवन को उज्ज्वल करने में सफल रहा है।

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