ये समय है बदलाव का। इंसान,प्रकृति ,वन्य जीव, सब बदल रहे है अपनी अपनी चाल ढाल और इसी तरह हमारे गृह नक्षत्र भी बदल रहे है अपनी चाल, अपना घर व अपना स्वाभाव जो असर डालेगा मौसम, जन जीवन व  देश विदेश की परिस्थिति पे ।

ज्येष्ठ मास (8 मई से 5 जून 2020) तक 5 शुक्रवार होने से, 29 मई तक कालसर्प योग रहने से तथा गुरु शनि के योग से विश्व में युद्ध से वातावरण अशांत एवं  असमंजसता बढ़े।  दूध, तेल, जल, घी आदि दैनिक उपयोगी वस्तुओं में विशेष तेजी के योग बने। मिथुन के राहु के प्रभाव के कारण दैवीय दुर्घटनाये जैसे भू स्खलन, जल द्वारा क्षति, आंधी ओले बिना समय बरसात का होना भी संभव हैं जो हानिकारक होगा।

ज्योतिर्विद डॉ0 सौरभ शंखधार बताते है कि 14 मई को सूर्य वृष राशि में 5:33 बजे शाम को प्रवेश करेगा।

 वृष संक्रान्ति का पुण्य काल 14 मई को 10:19 बजे सुबह से शुरु होकर शाम 5:33 बजे शाम तक रहेगा। सूर्य जब वृषभ राशि में संक्रमण करते हैं तो इसे वृष संक्रांति कहा जाता है इस दिन सूर्योदय से पहले किसी पवित्र नदी में स्नान और व्रत का  विधान है, इस दिन सूर्य देव की पूजा की जाती है। जहां सूर्य देव 15 जून तक रहेंगे। सूर्य का राशि परिवर्तन संक्रांति कहा जाता है।

सूर्य के वृषभ राशि में प्रवेश के समय की कुंडली में सूर्य का शुभ ग्रहों बुध और शुक्र से युत होकर मंगल से दृष्ट होना दक्षिण भारत में मानसून  पूर्व की अच्छी वर्षा का संकेत है।

उत्तर भारत में मंगल और सूर्य के इस गोचर के प्रभाव से तापमान 14 मई के बाद तेज़ी से बढ़ेगा जिसके फलस्वरूप कई स्थानों पर व्यापारिक गतिविधियां तेज होंगी। वे कहते है, कि जहाँ सोने-चांदी के रुख में तेजी आएगी वहीँ पानी की कमी से जनता त्रस्त हो सकती है।

सूत्रों क अनुसार 14 मई से 8 जून तक गर्मी अपने प्रचंड रूप में दिखाएगी, दैवीय आपदा ( अति वृष्टि, भूकंप, सुनामी, चक्रवात) योग बनेंगे। सूर्य की वृषभ संक्राति में 25 मई से *नौतपा*(आम भाषा में कहें तो वो नौ दिन जिन में में सूर्य कि तपन अपने चरम पे होती है ) शुरू हो रहा है। इस दिन सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। और यह नौतपा 8 जून तक चलेंगा।

 

 

Dr. Vaishali Agarwal

 

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