Harela Festival: उत्तराखंड में हरेला त्योहार बड़ी ही धूम धाम से मनाया जाता है। ऋतु परिवर्तन और
पर्यावरण से जुड़े इस त्योहार को अलग-अलग जगह मनाया जाता है। विभिन्न इलाकों में इसकी मान्यताएं भी
अलग-अलग हैं।

उत्तराखंड को देश में सबसे ज्यादा लोक पर्व वाला वाला राज्य माना जाता है। और यहां इस त्योहार को
खुशहाली और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। 10 दिनों की पूजा के बाद आज हरेले को विधि विधान से
पूज कर काटा गया है। सबसे पहले भगवान को हरेला लगाया जाता है फिर बुजुर्गों और बच्चों को हरेला
लगाया जाता है। हरेला का इंतजार साल भर रहता है। यह पर्व मेले का आगाज करता है।

नैनीताल के कुछ लोगों से बातचीत के बाद उन्होंने बताया कि इस त्योहार का इंतजार साल भर रहता है। इस
दिन बेटी अपने मायके आती है और हरेला लगती है। यह बहुत पुरानी परंपरा है। साथ ही मीना भट्ट का कहना
है, कि बच्चे आजकल मोबाइल और पढ़ाई में लगे रहते हैं उनको त्योहारों को लेकर जानकारी देनी जरूरी है।
जिससे परंपरा और उत्साह बना रहे।

इस त्योहार में घरों में पुड़ा बनाकर सात प्रकार के अनाजों से बोया जाता है। इस त्योहार को किसानों से भी
जोड़ा गया है। कहा जाता है कि किसान घरों में अनाज को बोकर अपनी फसल का परीक्षण करते हैं।
इसके साथ ही हरेला ऋतु परिवर्तन के साथ भगवान शिव के विवाह के रूप में भी मनाया जाता है। पहाड़ों में
इस त्योहार को बड़े ही धूमधाम से मनाते हैं।

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