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इस वक्त जितना जरूरी मास्क पहनना हो गया है उतना ही जरूरी उस मास्क का सही तरीके से निस्तारण भी है

कोरोना वायरस की वज़ह से विश्व भर के अलग-अलग जलवायु और संस्कृति वाले देशों में लोगों को एक साथ अपने जीवन जीने के तरीके बदलने पड़ रहे हैं. यह सब अचानक और इतने बड़े पैमाने पर हुआ है. इसके लिए न तो किसी देश के योजना विशेषज्ञ तैयार थे और न ही राजनेता व समाज के अन्य अगुआ. आज जब कई विशेषज्ञ कह रहे हैं कि यह वैश्विक महामारी बमारे आसपास एक लंबे समय तक रहने वाली है, तब अपनी जीवन शैली में परिवर्तन लाना और रोज़मर्रा के जीवन में नयी सावधानियां बरतना एक सामान्य और जरूरी चीज़ हो गया है.

कोरोना वायरस की वैश्विक महामारी के लगातार फैलाव को देखते हुए 24 मार्च, 2020 को संयुक्त राष्ट्र के पर्यावरण कार्यक्रम ने दुनिया भर की सरकारों से कोविड-19 से सम्बंधित कचरे के सावधानीपूर्वक निस्तारण की अपील की. संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि स्वास्थ्य और पर्यावरण पर इस महामारी के प्रभाव को कम से कम करने के लिए इस प्रकार के जरूरी कदम उठाने ही होंगे.

बायोमेडिकल कचरा

चीन के वूहान शहर में कोरोना वायरस के लिए न सिर्फ अस्पताल बनाया गया बल्कि वहां मेडिकल कचरे से निपटने के लिए एक ‘विशेष कोविड-19 कचरा प्रबंधन संयंत्र’ भी लगाया गया. इस संयंत्र के साथ अन्य 46 अस्थाई कचरा संशोधन केंद्र भी बनाये गए थे. इसकी वजह यह थी कि वूहान के अस्पतालों में कोरोना वायरस वायरस से संक्रमित लोगों के इलाज के दौरान सामान्य दिनों की अपेक्षा लगभग छः गुना मेडिकल कचरा उत्पन्न हो रहा था.

यह सब इस प्रकार का कचरा है जो महामारी को और अधिक फैलने से जुड़े गंभीर खतरे उत्पन्न कर सकता है और कोविड-19 के खिलाफ छेड़ी गई लड़ाई को कमज़ोर कर सकता है. आंकड़ों के अनुसार सन 2017 तक भारत में उत्पन्न होने वाले लगभग 200,000 टन बायोमेडिकल कचरे का लगभग 78 फीसदी भाग देश की “कॉमन बायो मेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट फैसिलिटी” (CBWTF) निस्तारित कर रही थी. बाकी कचरा या तो अन्य विभाग निस्तारित करते थे या उसे ज़मींदोज कर दिया जाता था. कोविड-19 की वैश्विक महामारी से इस कचरे की उत्पादन मात्रा में कई गुना इजाफा हुआ है. मेडिकल स्टाफ के साथ-साथ ये भी हमारे सबसे महत्वपूर्ण ‘कोरोना योद्धाओं’ में से एक हैं. कचरा उठाने वाले कर्मचारियों को इंग्लैंड में “मुख्य-कार्यकर्ताओं” का विशेष दर्जा दिया गया है.

कोविड-19 कचरा प्रबंधन

कोविड कचरे की समस्या से निबटने के लिए केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कुछ दिशानिर्देश जारी किये हैं, जिनका पालन आवश्यक है. इन दिशा निर्देशों में कहा गया है कि:

  • कोविड-19 के मरीजों वाले एकांत शिविरों और अस्पतालों में कचरा इकठ्ठा करने के लिए दो-परतों वाले झोलों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए, जिससे कि रिसाव की संभावना न रहे.
  • कोविड-19 से सम्बंधित कचरा “कॉमन बायो मेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट फैसिलिटी” (CBWTF) भेजे जाने से पहले इस तरह के कचरे के झोलों पर कोविड-19 का स्टीकर लगा होना चाहिए. इस कचरे को सामान्य कचरे से अलग किसी अन्य कमरे में रखा जाना चाहिए. इस प्रकार इस कचरे को सीधे “कॉमन बायो मेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट फैसिलिटी” के कर्मियों को सौंपा जाना चाहिए ताकि संक्रामक कचरे को प्रमुखता और प्राथमिकता के साथ निस्तारित किया जा सके.
  • विभिन्न प्रदेशों में बने कोविड-19 एकांत शिविरों आदि की जानकारी प्राथमिकता के साथ प्रादेशिक प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड्स को भेजी जानी चाहिए. कोविड-19 वाले कचरे के ढ़ोने के लिए अलग वाहनों का इस्तेमाल होना चाहिए जिनके शुद्धिकरण के लिए 1प्रतिशत हाइपोक्लोराईट विलयन का इस्तेमाल अति-आवश्यक है.
  • कोविड के कचरे को इकठ्ठा करने के लिए प्रदेशों को तुरंत विशेष सफाई कर्मचारियों को नियुक्त करना चाहिए जो कि प्राथमिकता के आधार पर कोविड-कचरा अस्थाई कचरा भण्डारण केन्द्रों तक पहुंचा सकें.

जिन कोलोनियों या क्षेत्रों को कन्टेनमेंट क्षेत्र बनाया गया है उनके घरों से निकलने वाले कचरे को “हेजर्डस वेस्ट ट्रीटमेंट स्टोरेज एंड डिस्पोजल फैसिलिटी” (HWTSDFs) के ज़रिये स्थानीय शहरी संस्थाओं की सहायता से निस्तारित किया जाना आवश्यक हो गया है.

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