आईवीआरआई ने खोजे हर्बल दवाओं को बेअसर करने वाले जीन

बरेली। बैक्टीरिया केवल एंटीबायोटिक से ही नहीं अब हर्बल दवाओं से भी प्रतिरोधी बन रहे हैं। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) के वैज्ञानिकों ने दो ऐसे जीन का पता लगाया है जो बैक्टीरिया को हर्बल दवाओं का रेजीस्टेंट बनने के लिए जिम्मेदार है। रिसर्च में जब बैक्टीरिया के एक जीन को इनएक्टिवेट किया गया तो  तो वह हर्बल दवाओं के प्रति 32 गुना सेंसिटिव हो गया। आईवीआरआई की यह रिसर्च इसलिए भी खास है कि वैज्ञानिकों का एक बड़ा वर्ग यह मानने को तैयार नहीं था कि बैक्टीरिया हर्बल दवाओं से भी रेंजीस्टेंट हो सकता है। यह रिसर्च फ्रंटियर इन माइका्रेबायोलॉजी जरनल में प्रकाशित हुआ है।

आईवीआरआई के महामारी विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रधान वैज्ञानिक डॉ. भोजराज सिंह के निर्देशन में पीएचडी कर रही डॉ. प्रसन्न बदना ने रिसर्च में यह बात साबित की है कि बैक्टीरिया के जीन भी हर्बल दवाओं से प्रतिरोध के लिए जिम्मेदार हैं। इसके लिए ट्रांसपोजान म्यूटाजेनेसिस तकनीक की मदद ली गई। इस तकनीक के तहत बैक्टीरिया के जीन को डिफेक्ट करते हैं। एक मदर बैक्टीरिया से 3500 अलग अलग जीन एक्टिवेटेड संतति तैयार की। इन 3500 संतति में अलग अलग डिफेक्टेड जीन थे। इनका अध्ययन शुरू किया गया। अध्ययन में दो बैक्टीरिया ई-कोलाई और स्यूडोमोनास को चुना गया था। ईकोलाई में अस्थायी जबकि सूडोमोनास परमानेंट सेंसिटिव मिला। अध्ययन में पाया गया कि सूडोमोनास में मैक्स-ए और रेक-जी जीन ऐसे पाए गए जो हर्बल ड्रग से प्रतिरोध के लिए जिम्मेदार मिले। दरअसल यह बात चौंकाने वाली इसलिए भी है कि अब वैज्ञानिकों का एक बड़ा वर्ग एंटीबायोटिक प्रतिरोध से निपटने के लिए हर्बल दवाओं का एक विकल्प के रुप में मान रहा है, पर यह रिसर्च आंख खोलने वाली है कि बैक्टीरिया अब हर्बल दवाओं को भी बेअसर करने की क्षमता का विकास कर रहे हैं।

हर्बल तत्व कार्बाक्रॉल को भी दोनों जीन ने दी मात
डॉ. भोजराज सिंह ने बताया कि रिसर्च में कार्बाक्रॉल तत्व का इस्तेमाल किया गया। कार्बाक्रॉल में एंटीबैक्टीरियल एक्टिवटी होती है यानि की यह एक तरह से हर्बल एंटीबायोटिक है। यह आरगेनो आयल, थाइम आयल और अजवाइन के तेल में पाया जाता है। वैज्ञानिकों ने अब मैक्स ए जीन को इनएक्टिवेट किया तो बैक्टीरिया कार्बाक्रॉल से 35 गुना सेंसिटिव हो गया। यही स्थिति रेक-जी जीन की भी मिली। दोनों जीन का पता लगाने वाली डॉ. प्रसन्न वदना ने बताया कि यह दोनों जीन फ्लक्स पंप का हिस्सा है। इससे बैक्टीरिया अपने आपको विसाक्त चीजों से बचाते हैं। जीन में डिफेक्ट होने पर यह हर्बल दवाओं से भी सेंसिटिव हो जाते हैं और हर्बल दवाएं भी निष्प्रभावी हो जाती हैं।

कई और हर्बल दवाओं पर भी रिसर्च जारी
डा. भोजराज सिंह ने बतया कि कार्बाक्रॉल के अलवा कई अन्य हर्बल ड्रग को लेकर भी बैक्टीरिया में प्रतिरोधी क्षमता विकसित करने की बात आ रही है। ऐसे में अब वैज्ञानिकों का मानना है कि केवल यह दोनों जीन ही नहीं कई और जीन हैं जिनका पता लगाया जाना बाकी है।

बैक्टीरिया अब एंटीबायोटिक दवाओं के साथ ही हर्बल दवाओं के प्रति भी प्रतिरोधी क्षमता हासिल कर रहे हैं। दो नए जीन का पता लगाया गया है और यह दोनों जीन इसके लिए जिम्मेदार हैं। अभी रिसर्च जारी है और कई और जीन का पता लगाया जाना बाकी है।
डॉ. भोजराज सिंह, वैज्ञानिक, आईवीआरआई

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