भारत देश के जाने–माने मशहूर सेलेब्रिटी फोटोग्राफर विक्की राय ( Vicky Rai ) देश के युवाओं के लिए एक प्रेरणा बन चुके हैं । बहुत कम उम्र में उन्होंने हिम्मत और लगन से काम कर के आज एक बड़ा नाम कमा लिया है ।

प्रारंभिक जीवन

विक्की राय ( Vicky Rai ) का जन्म पश्चिम बंगाल में स्थित एक पुरुलिया नामक गांव के एक गरीब परिवार में हुआ था । विक्की के साथ उनकी तीन बहन और तीन भाई भी थे । गरीबी के कारण उनके माता पिता कहीं न कहीं काम खोजने में लगे रहते , ताकि वे अपने बच्चों का पालन पोषण कर सकें । जिसकी वजह से विक्की और उनके अन्य भाई बहन ज्यादातर अपने नाना नानी के घर में ही रहते थे जहां उन्हें बिलकुल अच्छा नहीं लगता था और इसी कारण से उन्होंने घर छोड़ के भागने का फैसला कर लिए था ।
1999 में जब वह 11 वर्ष के थे उन्होंने अपने मामा की जेब से 900 रुपए की चोरी की और पुरुलिया रेलवे स्टेशन से ट्रेन पकड़ दिल्ली आ गए ।

यह भी पढ़े : उत्‍तराखंड में फिलहाल नहीं लगेगा लाकडाउन, विवाह समारोह में बस 50 व्यक्तियों को अनुमति 

Vicky Rai

दिल्ली आने के बाद जब उनके पास कोई भी नही था उनकी मुलाकात कुछ ऐसे बच्चों से हुई जो पहले से ही दिल्ली रेलवे स्टेशन पर रहते थे और वहां पर कचड़ा उठाने का काम करते थे । उन बच्चों ने विक्की को भी इस काम में शामिल कर लिया जिसके बाद विक्की भी पटरियों पर से पानी की खाली बोतलें उठते और उनमें पानी भर अलग अलग ट्रेनों के जनरल डब्बों में 5 रुपया में बेच देते थे । ऐसा करने से उन्हे कुछ पैसे मिल जाते जिससे वो कुछ खाने को खरीद सकते थे ।


लेकिन इतने से ही उनकी गरीबी नहीं मिट रही थी इसलिए उन्होंने कोई दूसरा काम करने का फैसला लिया । कुछ महीनो बाद उन्होंने नई दिल्ली के अजमेरी गेट के पास एक रेस्टोरेंट में बर्तन धोने का काम शुरू किया । लेकिन ठंड के मौसम में रात में 12 बजे तक ठंडे पानी में बर्तन धोने से उनके हाथों में छाले पड़ जाते थे और खून निकलता था । एक बार उसी रेस्टोरेंट में एक व्यक्ति ने जब विक्की का यह हाल देखा तो उन्होंने उन्हें समझाया और उनका दाखिला “सलाम बालक” नाम की एक संस्था में कक्षा 6 में करवा दिया । कक्षा 6 से 10 तक वह वहीं पढ़े लेकिन दसवीं की परीक्षा में उनके बहुत कम अंक आए जिससे वह बहुत निराश हो गए थे

यह भी पढ़े : उत्‍तराखंड में फिलहाल नहीं लगेगा लाकडाउन, विवाह समारोह में बस 50 व्यक्तियों को अनुमति 

फोटोग्राफी की शुरुआत

2004 में सलाम बालक ट्रस्ट में ही फोटोग्राफी वर्क शॉप का आयोजन हुआ था जिसमे ब्रिटिश फिल्ममेकर डिक्सी बेंजामिन आए थे । उन्हें देख कर ही विक्की को कुछ अलग करने का खयाल आया और उनकी दिलचस्पी फोटोग्राफी में हो गई ।

विक्की ने उनके साथ काम भी किया और फोटोग्राफी भी सीखी लेकिन उन्हें थोड़ा कष्ट भी उठाना पड़ता था क्योंकि न तो विक्की को अच्छी अंग्रेजी आती थी ना डिक्सी को हिंदी । कुछ समय बाद डिक्सी को वापस जाना पड़ा और विक्की की ट्रेनिंग बीच में ही छूट गई । ट्रेनिंग छूट गई लेकिन उनका हौसला पहले जैसा ही मजबूत रहा । और इसी बीच उनकी मुलाकात हुई दिल्ली की मशहूर फोटोग्राफर एनी मान से । जिनसे उन्होंने अपने आगे की ट्रेनिंग लेनी शुरू की और उन्ही के वर्कशॉप में फोटोग्राफर के रूप में काम भी किया । काम करने की वजह सिर्फ पैसा कमाना था विक्की को अपने खर्चे उठने के लिए पैसों की जरूरत पड़ने लगी थी ।

18 साल का होने के बाद उन्हें सलाम बालक ट्रस्ट छोड़ना पड़ा और वह बाहर किराए के मकान में रहने लगा । लेकिन इससे उनकी परेशानी काम होने के बजाय और बढ़ गई थी । कम पैसों में अब उन्हें अपने खर्च के साथ साथ मकान का किराया भी भरना था । इसलिए उन्होंने बाहर दुबारा से रेस्टोरेंट में वेटर की नौकरी करनी शुरू कर दी थी ।

यह भी पढ़े : उत्‍तराखंड में फिलहाल नहीं लगेगा लाकडाउन, विवाह समारोह में बस 50 व्यक्तियों को अनुमति 

2007 में विक्की ने अपनी फोटोग्राफी को आगे बढ़ाने के लिए एक हैबिटेट सेंटर में “स्ट्रीट ड्रीम्स” के नाम से प्रदर्शनी लगाई । जिसके बाद से लोग विक्की को इसके बेहतरीन काम के वजह से पहचानने लगे थे । इतना ही नहीं , फोटोग्राफी में उनके काम को देख लोग उन्हें विदेशों में भी बुलाने लगे थे । उन्होंने विदेश में रह कर भी बहुत कुछ सीखा और भारत वापस आ गए ।

भारत वापस लौटने के बाद उन्हें सलाम बालक ट्रस्ट ने इंटरनैशनल अवार्ड फॉर यंग पीपल , 2010 में ब्रेन इंडिया लेडीज एसोसिएशन द्वारा यंग अचीवर फ्रॉम इंडिया , और 2014 में उन्हें एम. आई. टी. मीडिया फेलोशिप से सम्मानित किया गया । 2016 में उन्होंने फोर्ब्स एशिया “30 अंडर 30” सूची में चित्रित किया गया ।
2019 में उन्होंने एशिया सोसाइटी टेक्सास सेंटर ए. एस. टी. सी. में “स्क्रेपिंग द स्काई : फोटोग्राफ्स बाई विक्की राय ” की शुरूआत की ।

2011 में उन्होंने एक फोटोग्राफी लायब्रेरी की शुरुआत की जिससे वह ऐसे लोगों की मदद करते जो गरीब हों और अपनी पढ़ाई नहीं कर पाते । गरीब और बेसहारा बच्चे उनकी लायब्रेरी में आते और पढ़ाई करते थे और यह लायब्रेरी उन्हें बिना किसी सुल्क के किताबें उपलब्ध कराती थी । इसी साल दिल्ली फोटो फेस्टिवल में विक्की ने अपनी पहली बुक लिखी “होम स्ट्रीट होम” जिसे नज़र फाउंडेशन ने पब्लिश किया था ।

2013 में विक्की ने नेशन ज्योग्राफी चैनल में और सात अपने जैसे फोटोग्राफरों के साथ मिल कर रियलिटी शो का आयोजन किया था जहां उन्हें उनके गांव के किसी व्यक्ति ने टी. वी. पर देख लिया और उनका नंबर खोज उन्हें फोन किया । 1999 के बाद 2013 में कहीं उन्होंने अपने परिवार वालों से बातें की और अपनी कहानी बताई । आज उनके घर वालों को उनके ऊपर बहुत गर्व महसूस होता है । विक्की ने अपने गांव में एक प्लॉट भी लिया था ताकि वह अपने परिवार के लिए एक बढ़िया और शानदार घर बनवा सके ।

यह भी पढ़े : उत्‍तराखंड में फिलहाल नहीं लगेगा लाकडाउन, विवाह समारोह में बस 50 व्यक्तियों को अनुमति 

विक्की का कहना है “मैं किसी को भी घर से भागने के लिए प्रोत्साहित नहीं करता , यह जरूरी नहीं है की हर बच्चा जो घर से भागे उसे वही सारे अवसर मिले जो मुझे मिले हैं ।”
सफलता उसी को मिली है जो उसके लिए लड़ा और उसे पाने के लिए अपना सारा ध्यान उस पर केंद्रित कर दिया ।जिंदगी के रास्ते मे बहुत सी तकलीफें हैं , लेकिन यह पूरी तरह से आप पर निर्भर है की आप उन तकलीफों से कैसे जूझते हैं । हिम्मत , मेहनत , समझदारी और लगन ही आपको आपके लक्ष्य तक पहुंचा सकती है ।

Follow Us