द इंडिया राइज
12000 फीट की उंचाई में 87.5 वर्ग किलोमीटर में फैली फूलों की घाटी में खिलने वाले रंग बिरंगे फूलों के दीदार कोरोना संक्रमण के कारण इस वर्ष पर्यटक कब कर पायेंगे इस पर संशय बरकरार है। लेकिन फूलों की घाटी अपने तय समय यानी एक जून को खुलेगी, इसकी तैयारी वन प्रभाग ने कर दी है। जोशीमठ पहुंचे वन विभाग के डीएफओ किशन चन्द्र ने कहा कि वेली ऑफ फ्लावर को उसके तय समय में ही खोला जायेगा। उन्होंने कहा कि घाटी में पर्यटक कब फूलों के दीदार करने पहुंचते हैं इसका निर्णय सरकार करेगी।
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हर वर्ष 1 जून को फूलों की घाटी पर्यटकों के लिए खुलकर 31 अक्टूबर को बंद की जाती है , लेकिन कोरोना संक्रमण के कारण इस बार कब तक फूलों की घाटी के दीदार करने पर्यटक पहुंच पाएंगे अभी कहना मुश्किल है। हालांकि वन प्रभाग ने फूलों की घाटी को खोलने का निर्णय ले लिया है। अभी भी घाटी में चार फीट तक बर्फ मौजूद है तो वहीं दो किमी से अधिक के रास्ते बर्फ से पटे हुए हैं, जिन्हें काटकर विभाग ने बीचों बीच पैदल रास्ते बना दिए हैं। फूलों की घाटी को खोलने के लिए वन विभाग ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। 30 जून को वन विभाग की पहली टीम घांगरिया पहुंच जाएगी।
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500 से अधिक प्रजाति के रंग बिरंगे फूल
भ्यूंडार घाटी के शीर्ष पर स्थित फूलों की घाटी में प्रतिवर्ष मौसमवार 500 से अधिक प्रजाति के रंग-बिरंगे फूल खिलते हैं। यहां पर जपान का राष्ट्रीय पुष्प ब्ल्यू पापी व उत्तराखंड का राज्य पुष्प ब्रह्म कमल के अतिरिक्त पोटैंटिला, सन फ्लावर, एनीमून, वाइल्ड रोज भारी तादाद में पया जाता है। इसके अतरिक्त उच्च हिमालयी क्षेत्रों में पाई जाने वाली सैकड़ों प्रजाति की जड़ी-बुटियां भी यहां पाई जाती है। पिछले वर्ष फूलों की घाटी में 17हजार 645 पर्यटक यहां पहुंचे थे, जिससे वन विभाग को 27 लाख 60 हजार की आमद हुई थी।

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