उत्तराखंड से 21 से 28 अप्रैल के दौरान ही उत्तराखंड के गांवों में 67471 प्रवासी लौटे हैं। देहरादून जिले में सबसे अधिक प्रवासी आए हैं, जबकि उत्तरकाशी में सबसे कम। सचिव पंचायती राज एचसी सेमवाल के अनुसार गांव लौटे प्रवासियों को होम आइसोलेशन में रहने को कहा गया है। उन पर ग्राम प्रधानों के साथ ही ग्राम पंचायत स्तर पर तैनात काॢमकों के माध्यम से नजर रखी जा रही है।

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उत्तराखंड आ रहे प्रवासियों के लिए राज्य सरकार फिर पंचायत भवनों में क्वारंटाइन सेंटर चलाएगी। इसके नोडल अधिकारी प्रभारी सचिव एचसी सेमवाल बनाए गए। अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि पंचायत भवनों को जरूरत के मुताबिक कोविड केयर सेंटर या क्वारंटाइन सेंटर के तौर पर इस्तेमाल किया जाएगा। यहां साफ-सफाई, बिजली और खाद्य सामग्री का इंतजाम पंचायतीराज विभाग करेगा। इधर, सरकार ने ऑक्सीजन उत्पादन केंद्रों पर बिजली की अबाध आपूर्ति के लिए प्रभारी सचिव नीरज खैरवाल को नोडल अफसर बनाया। शहरों में सेनेटाइजेशन और सफाई व्यवस्था को शहरी विकास निदेशक विनोद कुमार सुमन को नोडल अधिकारी नियुक्त कर दिया गया है। 

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पलायन का दंश झेल रहे उत्तराखंड में पिछले साल कोरोना संक्रमण के कारण उपजी परिस्थितियों में करीब साढ़े तीन लाख प्रवासी देश के विभिन्न हिस्सों से गांव लौटे थे। बाद में परिस्थितियां सामान्य होने पर इनमें से करीब डेढ़ लाख वापस लौट गए। अब कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के कारण हालात पिछले साल जैसे होने लगे हैं तो प्रवासियों की वापसी का भी क्रम शुरू हो गया है। इसे देखते हुए सरकार द्वारा इनका पूरा ब्योरा रखा जा रहा है। सचिव पंचायती राज एचसी सेमवाल के अनुसार प्रवासियों की वापसी के लिए स्मार्ट सिटी पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य किया गया है। उन्होंने कहा कि जो लोग बगैर पंजीकरण के गांव पहुंचे हैं, उनका अलग से ब्योरा भी लिया जा रहा है।

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